लातेहार में आदिवासी महिला से मारपीट: CM हेमंत सोरेन के संज्ञान के बाद थाना प्रभारी समेत 3 पुलिसकर्मी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के लातेहार जिले में आदिवासी महिला पुनिया देवी के साथ कथित मारपीट, जातिसूचक गालियाँ और यौन दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के बाद बारियातू थाना प्रभारी प्रभात कुमार दास और निजी चालक चंद्रदेव ठाकुर समेत तीन पुलिसकर्मियों को 9 अक्टूबर 2026 को निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सीधे संज्ञान लेने और तत्काल कार्रवाई के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया।
क्या है पूरा मामला
5 अक्टूबर 2026 को पुनिया देवी अपने गाँव के पास बकरी चरा रही थीं। उनके अनुसार, सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उन पर पोस्ता की खेती से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की। महिला का आरोप है कि उन्हें जबरन थाने ले जाया गया और रास्ते में भी मारपीट जारी रही।
महिला ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया कि थाने में उन्हें प्रताड़ित किया गया, जातिसूचक गालियाँ दी गईं, यौन दुर्व्यवहार किया गया और घर में बेटी की शादी के लिए रखे ₹80,000 भी ले लिए गए। महिला के अनुसार उन्हें 6 अक्टूबर की रात थाने से छोड़ा गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि उस दिन बगनदी महुआ के पास पोस्ता बरामदगी के लिए छापेमारी की गई थी।
शिकायत और सोशल मीडिया से मिली रफ़्तार
पुनिया देवी ने 8 अक्टूबर को लातेहार के पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव को लिखित आवेदन देकर थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर औपचारिक आरोप लगाए। इसके समानांतर, झारखंड जनाधिकार महासभा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर यह मामला उठाया, जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक यह मसला पहुँचा।
मुख्यमंत्री ने लातेहार पुलिस को तत्काल जाँच और उचित कार्रवाई का निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है। यह उल्लेखनीय है कि नागरिक समाज के दबाव और सोशल मीडिया की सक्रियता के बिना यह मामला इतनी तेज़ी से प्रशासनिक कार्रवाई तक नहीं पहुँच पाता।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जाँच दल
पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने पुष्टि की है कि महिला का आवेदन प्राप्त हो गया है और पूरे मामले की जाँच कराई जा रही है। मामले की विस्तृत जाँच के लिए बालूमाथ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तथा एक महिला पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष जाँच दल गठित किया गया है। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा और व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में आदिवासी अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर बहस लगातार तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि नार्कोटिक्स छापेमारी अभियानों के दौरान ग्रामीण, विशेषकर आदिवासी समुदायों के साथ पुलिस के व्यवहार पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि वंचित तबके की महिलाओं के साथ ऐसे दुर्व्यवहार के मामले अक्सर दर्ज ही नहीं होते।
आगे की राह
पुलिस के अनुसार, जाँच दल के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। निलंबित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय प्रक्रिया अलग से जारी है। पुनिया देवी द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता — विशेषकर यौन दुर्व्यवहार और धन हड़पने के दावों — को देखते हुए मानवाधिकार संगठनों की नज़र इस जाँच पर बनी रहेगी।