दक्षिण 24 परगना में भाजपा उम्मीदवार पर हमले के आरोप में दो पुलिसकर्मी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार पर कथित हमले के मामले में बारुईपुर पुलिस स्टेशन के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार के अधिकारियों ने मंगलवार, 12 मई को यह जानकारी दी। निलंबित किए गए अधिकारियों में इंस्पेक्टर-इन-चार्ज समर डे और सब-इंस्पेक्टर सुकुमार रुइदास शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
आरोपों के अनुसार, 5 मई को बारुईपुर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बारुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से BJP उम्मीदवार बिस्वजीत पाल के साथ मारपीट की। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में इंस्पेक्टर-इन-चार्ज समर डे और अन्य पुलिसकर्मी कथित तौर पर BJP उम्मीदवार के साथ मारपीट करते और उन्हें एक गाड़ी में ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
बिस्वजीत पाल ने आरोप लगाया कि सड़क पर उन्हें देखते ही पुलिस ने बिना किसी उकसावे के उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी दावा किया कि मारपीट के अलावा उनके खिलाफ एक झूठा मुकदमा भी दर्ज किया गया।
घटना की पृष्ठभूमि
स्थानीय लोगों के अनुसार, उस दिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया था कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के दौरान बारुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में उसके पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की जा रही थी। इसी शिकायत पर बारुईपुर पुलिस स्टेशन के अधिकारी मौके पर पहुँचे थे। BJP ने दावा किया कि यह घटना दोपहर के समय हुई।
अनुशासनात्मक कार्रवाई
बिस्वजीत पाल द्वारा दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर राज्य पुलिस ने जाँच शुरू की। जाँच के बाद इंस्पेक्टर-इन-चार्ज समर डे और सब-इंस्पेक्टर सुकुमार रुइदास के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई राज्य में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद हुई है।
नई सरकार का संदर्भ
गौरतलब है कि BJP ने हाल के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को हराकर पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की है। TMC ने पिछले 15 वर्षों तक राज्य पर शासन किया था। BJP नेता सुवेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बने हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री अधिकारी ने राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में अपनी पहली कैबिनेट बैठक की और इसके बाद राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की।
आगे की स्थिति
यह घटना पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर उठने वाले सवालों के बीच सामने आई है। नई BJP सरकार के लिए यह मामला एक शुरुआती परीक्षा है — क्या वह राज्य पुलिस बल को निष्पक्ष रूप से संचालित कर पाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।