29 जून 2026
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जिम्स ग्रेटर नोएडा: 15 दिन के आंदोलन पर प्रशासन की अपील, 6 सदस्यीय समिति से मांगों के समाधान का वादा

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जिम्स ग्रेटर नोएडा: 15 दिन के आंदोलन पर प्रशासन की अपील, 6 सदस्यीय समिति से मांगों के समाधान का वादा

सारांश

ग्रेटर नोएडा के जिम्स में 15 दिन से जारी कर्मचारी आंदोलन के बीच प्रशासन ने संवाद का रास्ता खोला है — 6 सदस्यीय समिति के जरिए मांगों के समाधान का वादा, लेकिन साथ में तोड़फोड़ पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी। गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित।

मुख्य बातें

जिम्स ग्रेटर नोएडा प्रशासन ने 29 जून 2026 को 15 दिन से आंदोलनरत कर्मचारियों से तत्काल काम पर लौटने की अपील की।
मांगों के समाधान के लिए छह सदस्यीय समिति बनेगी — 3 कर्मचारी प्रतिनिधि और 3 प्रशासनिक प्रतिनिधि ; अध्यक्षता जिला प्रशासन करेगा।
लगातार धरने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
प्रशासन ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या कानून व्यवस्था भंग करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
कोविड-19 के दौरान सेवाएं देने वाले और भविष्य में सेवारत रहने वाले कर्मचारियों को सरकारी लाभकारी निर्णयों का फायदा मिलेगा।
प्रशासन ने काम न लौटने पर वैकल्पिक व्यवस्था करने की चेतावनी भी दी।

राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स), ग्रेटर नोएडा के प्रशासन ने 29 जून 2026 को पिछले 15 दिनों से धरना-प्रदर्शन पर बैठे कर्मचारियों से तत्काल कार्य पर लौटने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगों के प्रति उसे पूरी सहानुभूति है और संस्थान स्तर पर जो भी समाधान संभव है, उसे प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाएगा।

समिति गठन का प्रस्ताव

जिम्स प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार के लिए छह सदस्यीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है। इस समिति में कर्मचारियों के तीन प्रतिनिधि और जिम्स प्रशासन के तीन प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति की अध्यक्षता जिला प्रशासन करेगा और समिति के निर्णयों को संस्थान स्तर पर लागू किया जाएगा अथवा आवश्यकता पड़ने पर शासन को भेजा जाएगा।

मरीजों पर गंभीर असर

प्रशासन ने चिंता जताई कि लगातार 15 दिनों के धरने के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। इसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा। प्रशासन ने कर्मचारियों से मरीजों के हित को सर्वोपरि रखते हुए काम पर वापस लौटने की भावुक अपील की है।

बाहरी तत्वों पर आरोप और अफवाहों का खंडन

प्रशासन ने आंदोलनरत कर्मचारियों को आगाह किया कि कुछ बाहरी अराजक तत्व उन्हें भ्रमित करने और आंदोलन का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले कुछ दिनों से फैलाई जा रही इस अफवाह में कोई सच्चाई नहीं है कि पुलिस कर्मचारियों को उनके हॉस्टल या घरों से उठाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि जो कर्मचारी कानून व्यवस्था का उल्लंघन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सरकारी संपत्ति नुकसान पर सख्त चेतावनी

प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ करने अथवा कार्यरत कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्य में बाधा डालने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते, तो संस्थान को वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए विवश होना पड़ेगा।

कर्मचारी हित में आश्वासन

प्रशासन ने यह भी आश्वस्त किया कि प्रशिक्षण, उच्च संस्थानों में कोचिंग, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा वेतन एवं भत्तों में सुधार जैसे विषयों पर सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे। यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार के लाभकारी निर्णय उन कर्मचारियों पर लागू होंगे जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान संस्थान में सेवाएं दीं और भविष्य में भी सेवाएं जारी रखेंगे। प्रशासन ने संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की पेशकश करते हुए सभी मांगों पर समयबद्ध तरीके से विचार का वादा किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर वैकल्पिक व्यवस्था और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अस्पतालों में कर्मचारी असंतोष एक व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति बन चुका है। असली सवाल यह है कि क्या यह समिति महज खानापूर्ति होगी या इसके पास वास्तविक निर्णय-शक्ति होगी — क्योंकि शासन स्तर की मांगों को 'भेजने' का वादा अक्सर अनिश्चितकाल के लिए टाल देने का पर्याय बन जाता है। गरीब मरीजों की पीड़ा दोनों पक्षों के लिए नैतिक दबाव का सबसे बड़ा बिंदु है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिम्स ग्रेटर नोएडा में कर्मचारी कितने दिनों से आंदोलन पर हैं?
जिम्स ग्रेटर नोएडा के कर्मचारी 29 जून 2026 तक लगातार 15 दिनों से धरना-प्रदर्शन पर हैं। इस आंदोलन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
जिम्स प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों के लिए क्या प्रस्ताव दिया है?
प्रशासन ने छह सदस्यीय समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें कर्मचारियों के तीन और प्रशासन के तीन प्रतिनिधि होंगे। इस समिति की अध्यक्षता जिला प्रशासन करेगा और सभी मांगों पर समयबद्ध तरीके से विचार किया जाएगा।
जिम्स आंदोलन से मरीजों पर क्या असर पड़ा है?
15 दिनों के धरने के कारण जिम्स की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से बाधित हुई हैं। सबसे अधिक असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
क्या जिम्स प्रशासन ने आंदोलनकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है?
हाँ, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ करने या कार्यरत कर्मचारियों के काम में बाधा डालने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चेतावनी दी है कि काम पर न लौटने की स्थिति में संस्थान वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए बाध्य होगा।
जिम्स प्रशासन ने कर्मचारियों को क्या आश्वासन दिए हैं?
प्रशासन ने प्रशिक्षण, उच्च संस्थानों में कोचिंग, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और वेतन-भत्तों में सुधार पर सकारात्मक प्रयास का वादा किया है। कोविड-19 के दौरान सेवाएं देने वाले और भविष्य में सेवारत रहने वाले कर्मचारियों को सरकारी लाभकारी निर्णयों का लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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