10 अगस्त 2026
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जिम्स अस्पताल धरना विवाद: पुलिस पर मारपीट के आरोप, 12 गंभीर मरीज प्रभावित, प्रशासन ने नकारे दावे

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जिम्स अस्पताल धरना विवाद: पुलिस पर मारपीट के आरोप, 12 गंभीर मरीज प्रभावित, प्रशासन ने नकारे दावे

सारांश

ग्रेटर नोएडा के जिम्स अस्पताल में स्थायी नियुक्ति की माँग को लेकर 15 जून से चल रहा आउटसोर्स कर्मचारियों का धरना 25 जून को उग्र हो गया। पुलिस पर मारपीट के आरोप, 12 गंभीर मरीजों पर असर और प्रशासन की सफाई — गतिरोध अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

जिम्स, ग्रेटर नोएडा में आउटसोर्स कर्मचारी 15 जून 2026 से स्थायी नियुक्ति की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर हैं।
25 जून को धरना उग्र हुआ; कर्मचारियों और पुलिस के बीच कथित धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
कई महिला कर्मचारियों ने पुलिस कार्रवाई में चोट लगने का दावा किया; पुलिस ने मारपीट के सभी आरोप नकारे।
आईसीयू में नर्सिंग स्टाफ के कार्य बहिष्कार से 12 गंभीर मरीज प्रभावित हुए; बाद में डॉक्टरों ने देखभाल संभाली।
डीसीपी और एडीएम के साथ करीब पाँच-छह घंटे की वार्ता बेनतीजा रही; गतिरोध बरकरार।

ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में 15 जून से चल रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन धरने ने 25 जून को उग्र रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कथित धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कर्मचारियों ने पुलिस पर मारपीट और बल प्रयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।

धरने की पृष्ठभूमि

जिम्स में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारी 15 जून 2026 से स्थायी नियुक्ति की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से संस्थान में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा लगातार उठता रहा है।

बुधवार का घटनाक्रम

प्रशासन के अनुसार, बुधवार को डीसीपी, एडीएम और अन्य अधिकारियों के साथ करीब पाँच से छह घंटे तक वार्ता चली। जिला प्रशासन, पुलिस और संस्थान के अधिकारियों द्वारा धरनारत कर्मचारियों से 10 से 15 बार बातचीत की जा चुकी थी। प्रशासन का दावा है कि वार्ता के दौरान कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने धरना समाप्त करने पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना निर्णय बदलते हुए प्रदर्शन जारी रखा।

मरीजों पर असर

अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि प्रदर्शनकारी ओपीडी के मुख्य द्वार और मरीज पंजीकरण क्षेत्र में धरना देकर बैठ गए, जिससे मरीजों को भारी परेशानी हुई। जिम्स प्रशासन का यह भी दावा है कि आईसीयू में तैनात कुछ नर्सिंग स्टाफ ने कार्य का बहिष्कार कर दिया, जिससे 12 गंभीर मरीजों की स्थिति प्रभावित हुई। बाद में डॉक्टरों और अन्य नर्सिंग कर्मियों ने मरीजों की देखभाल संभाली।

पुलिस और कर्मचारियों के परस्पर आरोप

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कथित आरोप है कि जबरन हटाने के दौरान पुलिस ने धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया। कई महिला कर्मचारियों ने चोट लगने का दावा किया है। दूसरी ओर पुलिस ने मारपीट और लाठीचार्ज के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। पुलिस का कहना है कि कर्मचारियों से केवल धरना स्थल बदलने का अनुरोध किया गया था, लेकिन कुछ लोगों द्वारा विरोध और हंगामा किए जाने के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

मौजूदा स्थिति

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शांति व्यवस्था कायम है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल जिम्स अस्पताल में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन कर्मचारियों और प्रशासन के बीच गतिरोध अभी भी बना हुआ है। गौरतलब है कि स्थायी नियुक्ति की माँग पर कोई ठोस आश्वासन न मिलने तक धरना जारी रहने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिम्स अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारी क्यों धरने पर बैठे हैं?
जिम्स, ग्रेटर नोएडा में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारी स्थायी नियुक्ति की माँग को लेकर 15 जून 2026 से अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। उनका कहना है कि वर्षों से संस्थान में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है।
25 जून को जिम्स में क्या हुआ?
25 जून को धरना उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच कथित धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। कर्मचारियों ने पुलिस पर मारपीट और बल प्रयोग के आरोप लगाए, जबकि पुलिस ने इन्हें निराधार बताया।
क्या जिम्स में मरीजों की देखभाल प्रभावित हुई?
हाँ, जिम्स प्रशासन के अनुसार आईसीयू में तैनात कुछ नर्सिंग स्टाफ के कार्य बहिष्कार से 12 गंभीर मरीजों की स्थिति प्रभावित हुई। बाद में डॉक्टरों और अन्य नर्सिंग कर्मियों ने मरीजों की देखभाल संभाली।
पुलिस ने मारपीट के आरोपों पर क्या कहा?
पुलिस ने मारपीट और लाठीचार्ज के सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। पुलिस का कहना है कि कर्मचारियों से केवल धरना स्थल बदलने का अनुरोध किया गया था और स्थिति कुछ लोगों के हंगामे के कारण तनावपूर्ण हुई।
जिम्स विवाद में अभी तक वार्ता का क्या नतीजा रहा?
जिला प्रशासन, पुलिस और संस्थान के अधिकारियों द्वारा अब तक 10 से 15 बार बातचीत की जा चुकी है। 25 जून को पाँच-छह घंटे की वार्ता के बाद भी गतिरोध बना हुआ है; कर्मचारियों और प्रशासन के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।
राष्ट्र प्रेस
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