राम संपत: जिंगल से 'डेली बेली' तक, ऐसे बने बॉलीवुड के चहेते म्यूजिक डायरेक्टर
सारांश
मुख्य बातें
संगीत निर्देशक राम संपत का सफर विज्ञापन जगत के छोटे-छोटे जिंगल से शुरू होकर हिंदी सिनेमा के शीर्ष संगीतकारों तक पहुँचा है — और यह यात्रा किसी प्रेरणादायक फिल्म की पटकथा से कम नहीं। मुंबई में जन्मे राम संपत ने विज्ञापन की दुनिया में अपनी धुनों की छाप छोड़ने के बाद बॉलीवुड को कई यादगार संगीत रचनाएँ दी हैं।
प्रारंभिक जीवन और संगीत की नींव
राम संपत का जन्म 25 जुलाई, 1977 को मुंबई में हुआ। उनके माता-पिता दोनों संगीत प्रेमी थे, जिसके चलते घर में सुर और धुनों का माहौल बचपन से ही बना रहा। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के ओएलपीएस हाई स्कूल से ली और बाद में पोदार कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई का विषय भले ही वाणिज्य था, लेकिन संगीत के प्रति जुनून ने उन्हें अपनी असली राह दिखाई।
जिंगल से बनी पहचान
फिल्मी दुनिया में प्रवेश से पहले राम संपत ने देश के कई बड़े ब्रांड्स के लिए विज्ञापन जिंगल तैयार किए। टाटा डोकोमो, एयरटेल, थम्स अप, पेप्सी, टाइम्स ऑफ इंडिया और सर्फ एक्सेल जैसे नामी ब्रांड्स की धुनें उन्होंने तैयार कीं, जो श्रोताओं के बीच खासी लोकप्रिय हुईं। यह दौर उनके लिए एक मज़बूत संगीत प्रयोगशाला साबित हुआ, जहाँ उन्होंने कम समय में बड़ा प्रभाव छोड़ने की कला सीखी।
बॉलीवुड में कदम और असली पहचान
राम संपत ने साल 2002 में फिल्म 'लेट्स टॉक' से बतौर संगीत निर्देशक बॉलीवुड में प्रवेश किया। इसके बाद 'खाकी' और 'फैमिली' जैसी फिल्मों में उन्होंने संगीत दिया। हालाँकि असली पहचान उन्हें साल 2011 में आई फिल्म 'डेली बेली' से मिली, जिसका संगीत युवाओं में बेहद लोकप्रिय हुआ और उनका नाम बड़े संगीतकारों की सूची में दर्ज हो गया।
इसके बाद आमिर खान की फिल्म 'तलाश: द आंसर लाइज विदिन' के संगीत ने उनके करियर को नई ऊँचाई दी। फिल्म के गाने दर्शकों और संगीत समीक्षकों दोनों को पसंद आए। 'फुकरे' फिल्म के लिए उनका तैयार किया गाना 'अंबरसरिया' आज भी श्रोताओं की पसंदीदा सूची में शामिल है। इस गाने को उनकी पत्नी और मशहूर गायिका सोना मोहपात्रा ने आवाज़ दी थी।
सोना मोहपात्रा के साथ संगीत की जुगलबंदी
राम संपत और सोना मोहपात्रा की जोड़ी संगीत जगत में एक विशेष स्थान रखती है। दोनों ने कई प्रोजेक्ट्स में मिलकर काम किया है। राम संपत की विशेषता यह है कि वे भारतीय लोक संगीत को रॉक, पॉप, फंक और इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक के साथ सहजता से मिला देते हैं — यही उनकी अनूठी शैली उन्हें समकालीन संगीतकारों से अलग करती है।
टेलीविजन पर भी छाप
फिल्मों के अलावा राम संपत ने साल 2009 में म्यूजिक रियलिटी शो 'एमटीवी रॉक ऑन' के ज़रिए टेलीविजन की दुनिया में भी कदम रखा। इसके बाद आमिर खान के चर्चित सामाजिक कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' के लिए उन्होंने थीम म्यूजिक और कई यादगार गाने तैयार किए, जिन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिलों को छुआ। राम संपत का यह सफर बताता है कि प्रतिभा और धैर्य के साथ छोटी शुरुआत भी बड़े मुकाम तक पहुँचा सकती है।