जम्मू-कश्मीर सुरक्षा समीक्षा: एलजी मनोज सिन्हा ने लोक भवन में उपायुक्तों-एसएसपी के साथ बैठक की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर स्थित लोक भवन में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति और तैयारियों का व्यापक आकलन किया गया। बैठक में सभी जिलों के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया।
बैठक में क्या हुआ
अधिकारियों के अनुसार, समीक्षा बैठक में नागरिक प्रशासन और पुलिस तंत्र के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने उपराज्यपाल को अपने-अपने जिलों की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम और तैयारियों के उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए जिला स्तरीय प्रशासनिक और पुलिस तंत्र की प्रस्तुतियाँ भी की गईं।
एलजी के निर्देश और प्राथमिकताएँ
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बेहतर समन्वय के निर्देश देते हुए यह स्पष्ट किया कि जिला स्तर पर प्रशासनिक और पुलिस मशीनरी को किसी भी उभरती चुनौती का त्वरित और प्रभावी जवाब देने के लिए सदैव तत्पर रहना होगा। सुरक्षा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई को केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से संचालित करने पर जोर दिया गया।
संवैधानिक और कानूनी ढाँचा
गौरतलब है कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत कानून-व्यवस्था, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े विषय सीधे उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं — इन्हें निर्वाचित विधानसभा की विधायी और कार्यकारी शक्तियों से अलग रखा गया है। अधिनियम के अंतर्गत कार्य संचालन नियमों में किए गए संशोधनों ने पुलिस, कारागार, अभियोजन और फोरेंसिक विज्ञान विभागों पर उपराज्यपाल के प्रशासनिक नियंत्रण और निर्णय लेने के अधिकार को और स्पष्ट कर दिया है।
इसी के साथ, आईएएस और आईपीएस सहित अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों की नियुक्तियाँ, तबादले और सेवा संबंधी मामले भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। महाधिवक्ता एवं विधि अधिकारियों की नियुक्ति तथा अभियोजन संबंधी स्वीकृतियों पर निर्णय के लिए भी उपराज्यपाल की सहमति अनिवार्य है।
व्यापक संदर्भ
यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और केंद्र नियंत्रित प्रशासन के बीच शक्ति-संतुलन को लेकर चर्चाएँ जारी हैं। केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा पर कड़ी निगरानी रखना और जिला-स्तरीय तंत्र को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखना एलजी प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
आगे की राह
इस बैठक के बाद जिला स्तर पर नागरिक और पुलिस तंत्र के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसी समीक्षा बैठकें नियमित रूप से की जाती हैं ताकि सुरक्षा तंत्र को समय रहते अपडेट किया जा सके और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने की क्षमता बनाए रखी जा सके।