कुलगाम आतंकी हमला: एलजी मनोज सिन्हा ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, बाहरी मजदूरों की सुरक्षा के लिए SOP समीक्षा के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 1 अगस्त को कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले के बाद एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दो गैर-स्थानीय मजदूरों की हत्या कर दी गई थी। बैठक में बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया गया।
बैठक में क्या निर्देश दिए गए
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी उपायुक्तों और एसएसपी को निर्देश दिया कि जम्मू-कश्मीर से बाहर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए श्रमिकों की सुरक्षा के लिए बनाई गई SOP की तत्काल समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियोक्ता यह सुनिश्चित करें कि सभी बाहरी मजदूरों का बीमा कराया जाए और उनका पूरा विवरण स्थानीय पुलिस एवं जिला प्रशासन के पास पंजीकृत हो।
बैठक में उपराज्यपाल ने कहा, 'हमें आतंकियों को निष्क्रिय करने के लिए सटीक और प्रभावी आतंकवाद विरोधी अभियान तेज करने होंगे।' उन्होंने अधिकारियों को कुलगाम हमले के पीड़ितों का गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने और शोक संतप्त परिवारों को हर संभव सहायता देने का भी निर्देश दिया।
अमरनाथ यात्रा सुरक्षा पर भी चर्चा
बैठक में चल रही अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजामों को और सुदृढ़ करने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को यात्रा मार्ग पर निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, डीजीपी नलिन प्रभात, गृह विभाग के प्रधान सचिव चंद्रकर भारती, एसडीजी कोऑर्डिनेशन एस.जे.एम. गिलानी, एडीजीपी सीआईडी नितीश कुमार, जीएडी के आयुक्त/सचिव एम. राजू, आईजीपी, मंडलायुक्त, एसएसपी, उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
हाइब्रिड आतंकवाद का बदलता चेहरा
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, प्रमुख नागरिकों, धार्मिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याओं और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति बदलकर हाइब्रिड आतंकवाद की ओर रुख किया है। इसके तहत घाटी में निहत्थे गैर-स्थानीय मजदूरों, सड़क किनारे व्यापारियों, ड्राइवरों और कुशल श्रमिकों को निशाना बनाया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर में आर्थिक पुनरुद्धार के प्रयास जारी हैं और बाहरी राज्यों से आए श्रमिक निर्माण, कृषि और पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गौरतलब है कि यह इस वर्ष गैर-स्थानीय मजदूरों पर हुए कई हमलों में से एक है।
ज़मीनी सुरक्षा उपाय
जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल गैर-स्थानीय मजदूरों के ट्रांजिट कैंपों के आसपास कड़ी निगरानी रख रहे हैं। रात में गश्त बढ़ाकर उन इलाकों में सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ाई जा रही है जहाँ आतंकियों के छिपे होने और उनके ओवर ग्राउंड वर्करों के सक्रिय होने की आशंका है। आने वाले दिनों में सुरक्षा एजेंसियाँ बाहरी श्रमिकों के पंजीकरण और बीमा की स्थिति की समीक्षा करेंगी।