जेएनयू यौन उत्पीड़न मामला: भाजपा महिला मोर्चा का देशव्यापी प्रदर्शन, राहुल गांधी से चुप्पी तोड़ने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला शाखा, भाजपा महिला मोर्चा, ने 10 अक्टूबर 2026 को देशभर में विरोध प्रदर्शन किया — इसका निशाना था जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले में नामजद मणिपुर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम। भाजपा नेता तुहिन सिन्हा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से सवाल किया कि वे इस मामले पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि
भाजपा नेता तुहिन सिन्हा ने दावा किया कि मणिपुर से कांग्रेस के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम का नाम जेएनयू में यौन उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में सामने आया है। उनके अनुसार, कथित तौर पर छात्राओं की शिकायतों के आधार पर संबंधित सांसद को विश्वविद्यालय में उनके प्रोफेसर पद से बर्खास्त किया गया। सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण पर कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई सार्वजनिक निंदा या स्पष्ट बयान नहीं आया है।
भाजपा नेताओं के तीखे आरोप
तुहिन सिन्हा ने राहुल गांधी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को इस मामले में अपना रुख तत्काल स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के हालिया विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। भाजपा नेता ने मांग की कि आरोपी सांसद को पार्टी से तत्काल निष्कासित किया जाए।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'हर मुद्दे पर महिला अधिकारों की बात करने वाले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अब मौन क्यों हैं? महिला सम्मान सिर्फ दूसरों को नसीहत देने के लिए है या अपनी पार्टी पर भी लागू होता है?' यह उल्लेखनीय है कि आरोप 'अंकों के बदले यौन शोषण' जैसे गंभीर हैं, जो शैक्षणिक संस्थानों में शक्ति-असंतुलन से उत्पन्न शोषण के व्यापक संदर्भ में रखे जा रहे हैं।
राजस्थान और हरियाणा में भी प्रदर्शन
राजस्थान में भाजपा महिला मोर्चा ने जयपुर स्थित कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और छात्राओं के सम्मान एवं न्याय की माँग को प्रमुखता से उठाया। हरियाणा में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहाँ महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के मुद्दे पर जवाबदेही की माँग की गई। यह प्रदर्शन देशभर में एक समन्वित राजनीतिक अभियान के रूप में संगठित प्रतीत हुआ।
दिल्ली पुलिस का सीजेपी संस्थापक से जुड़े दावों पर स्पष्टीकरण
इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके से जुड़े दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया। पुलिस ने कहा कि यह दावा कि अभिजीत दिपके को हिरासत में रहने के कारण उनकी दादी के निधन की जानकारी नहीं दी गई — पूरी तरह गलत है। पुलिस ने बताया कि उन्हें यह सूचना 'पूरी संवेदनशीलता के साथ तुरंत' दी गई, उन्हें अंतिम संस्कार के समय की भी जानकारी दी गई, और मानवीय आधार पर उनके गृहनगर जाने के लिए 'हरसंभव मदद की पेशकश' की गई।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में राजनीतिक रूप से गर्म हुआ है जब संसद का अगला सत्र निकट है और विपक्ष-सत्तापक्ष के बीच महिला सुरक्षा के मुद्दे पर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि जेएनयू पहले भी विभिन्न राजनीतिक विवादों का केंद्र रहा है। कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जो आने वाले दिनों में इस विवाद को और गहरा कर सकती है।