17 जुलाई 2026
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जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मु ने की नियुक्ति

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जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मु ने की नियुक्ति

सारांश

जस्टिस शील नागू की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद रिक्त हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के शीर्ष पद पर राष्ट्रपति मुर्मु ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत की गई यह नियुक्ति उच्च न्यायालय की प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करती है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 जून 2026 को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत जस्टिस शील नागू की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद हुई।
जस्टिस मिश्रा ने 21 जुलाई 2025 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में कार्यभार संभाला था।
उन्होंने 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने।
जस्टिस मिश्रा निठारी हत्याकांड (2005-2006) मामले में फैसले और अवैध खनन के विरुद्ध कड़े आदेशों के लिए उल्लेखनीय हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 जून 2026 को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति जस्टिस शील नागू की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद उत्पन्न हुई रिक्तता को भरने के लिए की गई है।

नियुक्ति का संवैधानिक आधार

केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (न्याय विभाग) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जस्टिस मिश्रा को यह दायित्व सौंपा गया है। जस्टिस शील नागू की सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के परिणामस्वरूप पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का प्रमुख पद रिक्त हो गया था, जिसके चलते संवैधानिक प्रावधान के तहत कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति अनिवार्य हो गई थी।

जस्टिस मिश्रा की शैक्षिक एवं व्यावसायिक पृष्ठभूमि

16 नवंबर 1968 को जन्मे जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बी.ए. (ऑनर्स) की उपाधि प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और मुख्य रूप से दीवानी, संवैधानिक तथा सेवा कानून के क्षेत्र में वकालत की।

अपने वकालत के दौरान उन्होंने नोएडा प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इफ्फको (IFFCO), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और उत्तर प्रदेश विद्युत निगम जैसे वैधानिक एवं सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ वकील के रूप में राज्य सरकार की पैरवी भी की।

न्यायिक सेवा का सफर

जस्टिस मिश्रा को 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। 3 फरवरी 2014 को उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। 20 जुलाई 2025 तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सेवाएँ देने के बाद उनका स्थानांतरण पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में हुआ, जहाँ उन्होंने 21 जुलाई 2025 को कार्यभार संभाला।

उल्लेखनीय फैसले एवं आदेश

जस्टिस मिश्रा की पीठ ने 2005-2006 के निठारी हत्याकांड मामले में दिए गए फैसले के लिए विशेष रूप से चर्चा पाई। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कार्यकाल के दौरान उनकी पीठ ने अवैध खनन के विरुद्ध कड़े आदेश जारी किए और सेवा एवं संवैधानिक मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए।

आगे की स्थिति

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस मिश्रा का दायित्व तब तक जारी रहेगा जब तक पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हो जाती। यह नियुक्ति उच्च न्यायालय की प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े प्रश्न की ओर ध्यान दिलाती है — उच्च न्यायालयों में नियमित मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में लगातार विलंब क्यों होता है? देश के कई उच्च न्यायालय महीनों तक कार्यवाहक व्यवस्था पर चलते रहते हैं, जो न्यायिक प्रशासन और दीर्घकालिक नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करता है। कॉलेजियम और सरकार के बीच नियुक्ति प्रक्रिया में तेज़ी लाना न्यायिक दक्षता के लिए अनिवार्य है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश क्यों नियुक्त किया गया?
जस्टिस शील नागू की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के बाद पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो गया था। संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को 1 जून 2026 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा कौन हैं?
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा 16 नवंबर 1968 को जन्मे वरिष्ठ न्यायविद हैं, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। वे 2014 से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहे और जुलाई 2025 में पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित हुए।
संविधान का अनुच्छेद 223 क्या कहता है?
संविधान का अनुच्छेद 223 राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि जब किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त हो या वे अनुपस्थित हों, तो उस न्यायालय के किसी न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जा सके।
जस्टिस मिश्रा के कार्यकाल के उल्लेखनीय फैसले कौन से हैं?
जस्टिस मिश्रा की पीठ ने 2005-2006 के निठारी हत्याकांड मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में उन्होंने अवैध खनन के विरुद्ध कड़े आदेश जारी किए और सेवा एवं संवैधानिक मामलों में ऐतिहासिक निर्णय दिए।
जस्टिस मिश्रा कब तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहेंगे?
जस्टिस मिश्रा तब तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहेंगे जब तक पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हो जाती। नियमित नियुक्ति की समय-सीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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