4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बुधवार का व्रत: भगवान गणेश और बुध देव की पूजा कैसे करें?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बुधवार का व्रत: भगवान गणेश और बुध देव की पूजा कैसे करें?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि बुधवार का व्रत रखने से कैसे दूर होते हैं बुध ग्रह के दोष? इस लेख में जानें गणेश और बुध देव की पूजा विधि, जो आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा कर सकती है। पढ़ें और जानें कि कैसे करें सही तरीके से पूजा।

मुख्य बातें

बुधवार का व्रत भगवान गणेश की पूजा से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है।
पूजा विधि का पालन करना आवश्यक है।
इस दिन मांस-मदिरा का सेवन वर्जित है।
प्रसाद का वितरण करना चाहिए।

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि बुधवार को आ रही है। इस दिन सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में स्थित रहेंगे।

द्रिक पंचांग के अनुसार, बुधवार को कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है और राहुकाल का समय दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से शुरू होकर 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस तिथि पर कोई विशेष पर्व नहीं है। यदि आप बुध ग्रह से संबंधित दोषों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो आप बुधवार का व्रत रख सकते हैं।

स्कंद पुराण में कहा गया है कि बुधवार के दिन भगवान गजानन महाराज की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से बुद्धि, ज्ञान और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके साथ ही, बुध ग्रह से संबंधित दोष भी समाप्त होते हैं।

पौराणिक ग्रंथों में पूजा विधि का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार बुधवार के दिन गणपति का व्रत आरंभ करने के लिए आप ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें। इसके बाद ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की ओर मुख करके इस आसन पर बैठें। फिर भगवान गणेश को पंचामृत (जल, दूध, दही, शहद, घी) से स्नान कराएं और फिर उन पर सिंदूर और घी का लेप लगाएं। उसके बाद, कम से कम तीन दूर्वा और पीले, लाल पुष्प अर्पित करें। साथ ही, बुध देव को हरे रंग के वस्त्र और दाल भी चढ़ानी चाहिए।

लड्डू, हलवा, या मीठी चीजों का भोग लगाने के बाद श्री गणेश और बुध देव के मंत्रों का जाप करें। फिर व्रत कथा सुनें और उनकी पूजा करें। इसके बाद श्री गणेश और बुध देव की आरती करें।

पूजन के समापन के बाद प्रसाद परिवार में सभी को बांटें। गरीबों और ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दें। इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना और तेल मालिश करना वर्जित है। व्रत का उद्यापन 12 व्रतों के बाद किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह मानसिक शांति और समृद्धि की प्राप्ति का भी माध्यम है। आज के समय में, जहां व्यस्तता और तनाव बढ़ रहे हैं, ऐसे में इस व्रत के माध्यम से लोग अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। यह व्रत एक अद्भुत अवसर है खुद को और अपने परिवार को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुधवार का व्रत क्यों रखा जाता है?
बुधवार का व्रत रखने से बुध ग्रह के दोषों से मुक्ति मिलती है और बुद्धि, ज्ञान में वृद्धि होती है।
भगवान गणेश की पूजा विधि क्या है?
भगवान गणेश की पूजा विधि में स्नान, पूजा सामग्री का प्रबंध, पंचामृत से स्नान और पुष्प अर्पित करना शामिल है।
क्या व्रत के दिन कोई विशेष नियम हैं?
इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना और अपमान करना वर्जित है।
प्रसाद का वितरण कैसे करना चाहिए?
पूजन के बाद प्रसाद को परिवार में बांटें और गरीबों को दान दें।
बुधवार का व्रत कब करना चाहिए?
यह व्रत हर बुधवार को किया जा सकता है, विशेषकर कार्तिक मास के दौरान।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले