9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कांशीराम को भारत रत्न दो — मायावती की केंद्र से फिर माँग, बोलीं: बहुजन समाज ही मेरा परिवार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कांशीराम को भारत रत्न दो — मायावती की केंद्र से फिर माँग, बोलीं: बहुजन समाज ही मेरा परिवार

सारांश

कांशीराम की पुण्यतिथि पर मायावती ने भारत रत्न की माँग फिर दोहराई और बहुजन समाज को अपना 'असली परिवार' घोषित किया। साथ ही UP, उत्तराखंड और पंजाब चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट किया और AI-आधारित फेक न्यूज़ से सतर्क रहने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

मायावती ने 9 अक्टूबर 2026 को कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर भारत रत्न देने की माँग केंद्र सरकार से दोहराई।
कार्यक्रम लखनऊ के BSP केंद्रीय कैंप कार्यालय, 9 माल एवेन्यू में हुआ; राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
मायावती ने पार्टी और आंदोलन को परिवारवाद से मुक्त रखने तथा बहुजन समाज को सत्ता की मास्टर चाबी दिलाने का संकल्प दोहराया।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं से पूरी ताकत से जुटने की अपील की।
राजनीतिक विरोधियों पर AI, फेक न्यूज़ और पेड न्यूज़ के ज़रिए BSP को भटकाने की कोशिश का आरोप लगाया।
गरीबी, महंगाई और बेरोज़गारी पर सरकारों से संवैधानिक जवाबदेही और ठोस जनकल्याण कदमों की माँग की।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 9 अक्टूबर 2026 को पार्टी संस्थापक कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर केंद्र सरकार से उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ने की माँग एक बार फिर दोहराई। लखनऊ स्थित BSP के केंद्रीय कैंप कार्यालय, 9 माल एवेन्यू में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मायावती ने कांशीराम की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और स्पष्ट किया कि उनके लिए बहुजन समाज के करोड़ों लोग ही उनका असली परिवार हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम में BSP के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। मायावती ने कांशीराम की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए उनके विचारों और मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। उत्तर प्रदेश में प्रदेश स्तर पर तथा अन्य राज्यों में जोन स्तर पर संगोष्ठियाँ और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।

भारत रत्न की माँग और उसका आधार

मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न मिला है, और कांशीराम भी सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के प्रमुख नायक रहे हैं। उनके अनुसार, कांशीराम ने अंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उन्होंने तर्क दिया कि सामाजिक परिवर्तन में उनके ऐतिहासिक योगदान और बहुजन समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए यह सम्मान दिया जाना चाहिए।

परिवारवाद से मुक्त राजनीति का संकल्प

BSP प्रमुख ने अपनी राजनीतिक पहचान को रेखांकित करते हुए कहा कि वे पार्टी और आंदोलन को परिवारवाद से मुक्त रखकर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कांशीराम का हवाला देते हुए कहा कि बहुजन समाज को सत्ता किसी की दया या मेहरबानी से नहीं, बल्कि संविधान से मिले मताधिकार की ताकत से प्राप्त होगी। उनके अनुसार, बहुजन समाज को शोषित वर्ग से शासक वर्ग बनाने और संवैधानिक बहुजन युग को धरातल पर उतारने के लिए सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करनी होगी।

आगामी चुनावों पर नज़र और फेक न्यूज़ की चेतावनी

मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से तन, मन और धन से जुटने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी मीडिया, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर BSP का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटकाने की कोशिश कर सकते हैं। कार्यकर्ताओं को फेक न्यूज़, पेड न्यूज़ और भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने की सलाह देते हुए उन्होंने पार्टी के मिशन पर एकाग्र रहने का आह्वान किया।

सरकारों से जनकल्याण पर जवाबदेही की माँग

मायावती ने गरीबी, महंगाई, बेरोज़गारी और अशिक्षा जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ मुट्ठी भर लोगों के लिए 'फीलगुड' का माहौल बनाकर पूरे देश को सुखी और संपन्न नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोज़गार को जनहित के बुनियादी क्षेत्र बताते हुए कहा कि इन मामलों में सरकारों को निजी क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी की मुखरता का हवाला देते हुए सरकारों से केवल दावों की जगह ठोस काम करने की अपील की। BSP की 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा में युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों और किसानों सहित समाज के सभी वर्गों के हित निहित हैं।

मायावती ने अंत में कहा कि कांशीराम के मिशन को उसके वास्तविक उद्देश्य तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी — और इसके लिए BSP को संगठनात्मक रूप से और मज़बूत करना अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उत्तराखंड और पंजाब के चुनाव क़रीब हैं और BSP को अपने मतदाता आधार को पुनः एकजुट करने की ज़रूरत है। 'परिवारवाद से मुक्त' राजनीति का संदेश SP और कांग्रेस दोनों पर सीधा निशाना है, लेकिन आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद पारिवारिक उत्तराधिकार के सवाल भी उठे हैं — एक विरोधाभास जिसे विपक्ष उठाने से नहीं चूकेगा। AI और फेक न्यूज़ की चेतावनी बताती है कि BSP डिजिटल मोर्चे पर अपनी कमज़ोरी महसूस कर रही है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह भाषण जमीनी संगठन में तब्दील होता है — 2022 UP चुनाव में BSP का प्रदर्शन बताता है कि सिर्फ भावनात्मक अपील पर्याप्त नहीं रही।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने कांशीराम को भारत रत्न देने की माँग क्यों दोहराई?
मायावती के अनुसार, कांशीराम ने सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन में ऐतिहासिक योगदान दिया और बहुजन समाज को शोषित वर्ग से शासक वर्ग बनाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न मिला, उसी तरह कांशीराम को भी यह राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए।
कांशीराम महापरिनिर्वाण दिवस 2026 कार्यक्रम कहाँ हुआ?
यह कार्यक्रम 9 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित BSP के केंद्रीय कैंप कार्यालय, 9 माल एवेन्यू में आयोजित हुआ। इसमें राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मायावती ने आगामी चुनावों के बारे में क्या कहा?
मायावती ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से तन, मन और धन से जुटने की अपील की। उन्होंने यह भी आगाह किया कि राजनीतिक विरोधी AI, फेक न्यूज़ और पेड न्यूज़ के ज़रिए BSP का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटकाने की कोशिश कर सकते हैं।
BSP की 'सत्ता की मास्टर चाबी' से क्या तात्पर्य है?
मायावती के अनुसार, यह कांशीराम की सीख है कि बहुजन समाज को सत्ता किसी की दया से नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त मताधिकार की ताकत से मिलेगी। इसका अर्थ है कि बहुजन मतदाताओं को एकजुट होकर चुनावी बहुमत हासिल करना होगा, जिससे वे शासक वर्ग बन सकें।
मायावती ने सरकारों से जनकल्याण पर क्या माँग रखी?
मायावती ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोज़गार को बुनियादी जनकल्याण क्षेत्र बताते हुए माँग की कि सरकारें इन मामलों में निजी क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी निभाएँ। उन्होंने कहा कि गरीबी, महंगाई और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं के रहते मुट्ठी भर लोगों के लिए 'फीलगुड' का माहौल बनाकर पूरे देश को सुखी नहीं बनाया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले