9 अक्टूबर 2026
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कांशीराम महापरिनिर्वाण दिवस: मायावती बोलीं — मिशन को मंजिल दिलाना ही सच्ची श्रद्धांजलि

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कांशीराम महापरिनिर्वाण दिवस: मायावती बोलीं — मिशन को मंजिल दिलाना ही सच्ची श्रद्धांजलि

सारांश

कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने एक्स पर लिखा — दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को 'शोषित से शासक' बनाने का उनका संकल्प ही बसपा की नींव है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में चार बार की बसपा सरकारों को कांशीराम के मिशन की सफलता बताया।

मुख्य बातें

बसपा अध्यक्ष मायावती ने 9 अक्टूबर 2026 को कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर एक्स के ज़रिये भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार बार सरकार बनना कांशीराम के मिशनरी संकल्प का परिणाम था।
उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले , श्री नारायण गुरु , शाहूजी महाराज और डॉ.
आंबेडकर की विरासत को कांशीराम के मिशन से जोड़ा।
बसपा प्रमुख ने कांशीराम के मिशन को आगे बढ़ाने को ही उनकी 'सच्ची श्रद्धांजलि' करार दिया।
यह संदेश आगामी चुनावों में बसपा की राजनीतिक दिशा का संकेत देता है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 9 अक्टूबर 2026 को पार्टी संस्थापक कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिये कांशीराम के जीवन-संघर्ष और बहुजन आंदोलन में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।

मायावती का श्रद्धांजलि संदेश

मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'देश में जाति के आधार पर सदियों से तोड़े व पछाड़े गए खासकर 'बहुजन समाज' के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों एवं अन्य कमजोर तबकों आदि को उनके वोट की ताकत के माध्यम से सत्ता की मास्टर चाबी देकर उन्हें शोषित से शासक वर्ग बनाने हेतु इनके मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के रुके एवं बिखरे हुए कारवां को आगे मंजिल तक पहुंचाने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम को आज उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर बसपा परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।'

उत्तर प्रदेश में बसपा की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

मायावती ने याद दिलाया कि मान्यवर कांशीराम के मिशनरी संकल्प का ही परिणाम था कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में उनके नेतृत्व में बसपा की चार बार सरकार बनी। उन्होंने कहा कि इन सरकारों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुए।

यह ऐसे समय में आया है जब बसपा उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता पुनः स्थापित करने की कोशिश में है। गौरतलब है कि पार्टी पिछले विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर पाई थी।

महान संतों और महापुरुषों की विरासत

मायावती ने बहुजन समाज के महान नायकों — महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायण गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर — के समता और समानता के संघर्ष का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों की प्रेरणा को जमीनी स्तर पर उतारकर संविधान की पवित्र मंशा को साकार किया गया।

कानून-व्यवस्था और जनकल्याण का संकल्प

बसपा प्रमुख ने कहा कि इन महापुरुषों की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के हित में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के मामलों में 'कानून द्वारा कानून का राज' स्थापित किया गया। साथ ही जनहित, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर मान्यवर कांशीराम को सच्ची श्रद्धांजलि दी गई।

आगे का रास्ता

मायावती का यह संदेश स्पष्ट करता है कि बसपा कांशीराम की विरासत को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उनके अधूरे मिशन को पूरा करना ही पार्टी का प्राथमिक राजनीतिक लक्ष्य है। आने वाले चुनावी वर्षों में यह संदेश बसपा की रणनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सूक्ष्म राजनीतिक पुनः-स्थापन है — ऐसे दौर में जब बसपा उत्तर प्रदेश में अपना जनाधार पुनर्निर्मित करने की जद्दोजहद में है। कांशीराम के नाम पर 'शोषित से शासक' के नारे को दोहराना पार्टी के मूल मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विचारधारा की यह पुनरावृत्ति संगठनात्मक पुनरुत्थान में तब्दील हो पाएगी। उत्तर प्रदेश की चार सरकारों की उपलब्धियों को दोहराना गौरवशाली अतीत है — मगर 2024 के बाद की बदली राजनीतिक ज़मीन पर बसपा की प्रासंगिकता का परीक्षण अभी भी बाकी है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांशीराम का महापरिनिर्वाण दिवस कब मनाया जाता है?
कांशीराम का महापरिनिर्वाण दिवस प्रत्येक वर्ष 9 अक्टूबर को मनाया जाता है। वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक थे और दलित-बहुजन राजनीति के सबसे प्रभावशाली नायकों में से एक माने जाते हैं।
मायावती ने कांशीराम को किस प्लेटफॉर्म पर श्रद्धांजलि दी?
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिये कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस पोस्ट में उन्होंने कांशीराम के बहुजन मिशन और बसपा की स्थापना के उद्देश्य का उल्लेख किया।
मायावती ने बसपा की किन उपलब्धियों का जिक्र किया?
मायावती ने कहा कि कांशीराम के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बसपा की चार बार सरकार बनी। उन्होंने इन सरकारों के दौरान सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक मुक्ति, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में किए गए कार्यों को ऐतिहासिक बताया।
कांशीराम का बहुजन आंदोलन में क्या योगदान था?
कांशीराम ने दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य कमजोर वर्गों को मताधिकार की शक्ति के माध्यम से राजनीतिक सत्ता दिलाने का संकल्प लिया। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के अधूरे मिशन को आगे बढ़ाया और बसपा की स्थापना की।
मायावती ने किन महापुरुषों का उल्लेख किया?
मायावती ने महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायण गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के समता और समानता के संघर्ष को जमीनी स्तर पर उतारकर संविधान की भावना को पूरा किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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