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कांवड़ यात्रा 2026: उत्तराखंड में 10 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात, ड्रोन-CCTV से होगी निगरानी

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कांवड़ यात्रा 2026: उत्तराखंड में 10 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात, ड्रोन-CCTV से होगी निगरानी

सारांश

कांवड़ यात्रा 2026 के लिए उत्तराखंड प्रशासन ने अब तक की सबसे व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है — 10 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी, ड्रोन-CCTV निगरानी, 18 सुपर जोन और UP पुलिस के साथ संयुक्त तैनाती। अनुमान है कि इस वर्ष 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालु हरिद्वार पहुँचेंगे।

मुख्य बातें

कांवड़ यात्रा 2026 के लिए उत्तराखंड में 10 हजार से अधिक पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
सुरक्षा बलों में सीपीएमएफ, एसडीआरएफ, एटीएस, पीएसी, जल पुलिस, डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ता शामिल हैं।
पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन , 40 जोन और लगभग 160 सेक्टरों में बाँटा गया है।
ड्रोन और अत्याधुनिक CCTV नेटवर्क से पूरे मेले की लगातार निगरानी होगी।
दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे पर कांवड़ यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित; सर्वोच्च न्यायालय के ध्वनि दिशा-निर्देशों का सख्त पालन होगा।
इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या 4 करोड़ से अधिक पहुँचने का अनुमान; उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ संयुक्त तैनाती।

कांवड़ यात्रा 2026 को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन ने 25 जुलाई 2026 को व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त की जानकारी साझा की। हरिद्वार सहित पूरे कांवड़ मार्ग पर 10 हजार से अधिक पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। अनुमान है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या 4 करोड़ से अधिक पहुँच सकती है।

सुरक्षा बलों की तैनाती

उत्तराखंड पुलिस के अतिरिक्त केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीपीएमएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी), जल पुलिस, डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता और होमगार्ड की टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात की गई हैं। प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और लगभग 160 सेक्टरों में विभाजित किया है।

हरिद्वार के अलावा देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी के नीलकंठ महादेव और टिहरी में भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं।

आईजी नीलेश आनंद भरणे का बयान

आईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी अधिकारियों और जवानों की विस्तृत ब्रीफिंग पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर कांवड़ यात्री हरिद्वार से गंगाजल लेकर सुरक्षित रूप से अपने-अपने शिवालयों तक पहुँच सके। मानसून को देखते हुए जल पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशिक्षित गोताखोरों को सभी प्रमुख घाटों पर तैनात किया गया है तथा उनके उपकरणों की जाँच और आवश्यक प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया है।

एडीजी वी. मुरुगेसन की अपील और सख्त निर्देश

एडीजी उत्तराखंड वी. मुरुगेसन ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को किसी प्रकार की असुविधा न होने देना भी है। उन्होंने कांवड़ यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखें।

मुरुगेसन ने स्पष्ट किया कि बैट, बॉल, त्रिशूल जैसे संभावित खतरनाक सामान की जाँच की जाएगी और इन्हें यात्रा में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। डीजे की ध्वनि सीमा को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि स्तर की अनुमति नहीं दी जाएगी।

तकनीक और अंतरराज्यीय समन्वय

इस बार कंट्रोल रूम को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जहाँ से ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए पूरे मेले की लगातार निगरानी की जाएगी। दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे पर कांवड़ यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी और इस प्रतिबंध का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ कई दौर की समन्वय बैठकें पूरी हो चुकी हैं और दोनों राज्यों की पुलिस कई स्थानों पर संयुक्त रूप से तैनात रहेगी। सभी जोनल पुलिस अधिकारियों और सेक्टर मजिस्ट्रेटों के साथ समन्वय बैठकें भी संपन्न हो चुकी हैं। यह व्यवस्था ऐसे समय में की गई है जब पिछले वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा भीड़ के चरम पर होगी — जब लाखों श्रद्धालु एक साथ सड़कों पर होंगे। पिछले वर्षों में कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क दुर्घटनाओं और भगदड़ की घटनाएँ सामने आई हैं, जो महज संख्या बल से नहीं रोकी जा सकतीं। ड्रोन और CCTV निगरानी तकनीकी रूप से सशक्त कदम है, परंतु जब तक नियंत्रण कक्ष से जमीनी प्रतिक्रिया की गति तेज न हो, यह निगरानी केवल दस्तावेज़ीकरण बनकर रह जाती है। UP-उत्तराखंड संयुक्त तैनाती एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अंतरराज्यीय समन्वय की असली परीक्षा किसी आपात स्थिति में होगी, न कि बैठकों में।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांवड़ यात्रा 2026 में उत्तराखंड में कितने सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं?
कांवड़ यात्रा 2026 के लिए उत्तराखंड में 10 हजार से अधिक पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें उत्तराखंड पुलिस के अलावा सीपीएमएफ, एसडीआरएफ, एटीएस, पीएसी, जल पुलिस, डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता और होमगार्ड शामिल हैं।
कांवड़ यात्रा 2026 में ड्रोन और CCTV निगरानी कैसे काम करेगी?
अत्याधुनिक तकनीक से लैस कंट्रोल रूम से ड्रोन और CCTV कैमरों के ज़रिए पूरे मेला क्षेत्र की लगातार निगरानी की जाएगी। यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और किसी भी अप्रिय घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए की गई है।
कांवड़ यात्रा 2026 में कितने श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है?
अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या 4 करोड़ से अधिक पहुँच सकती है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
कांवड़ यात्रा 2026 में क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?
दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे पर कांवड़ यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। बैट, बॉल, त्रिशूल जैसे संभावित खतरनाक सामान ले जाने की अनुमति नहीं होगी और डीजे की ध्वनि सीमा के लिए सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का सख्त पालन कराया जाएगा।
कांवड़ यात्रा 2026 में उत्तर प्रदेश पुलिस की क्या भूमिका है?
उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ कई दौर की समन्वय बैठकें पूरी हो चुकी हैं और दोनों राज्यों की पुलिस कई स्थानों पर संयुक्त रूप से तैनात रहेगी। दोनों राज्यों के अधिकारी कंट्रोल रूम में भी समन्वय बनाए रखेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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