26 जुलाई 2026
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ऑपरेशन सफेद सागर: 26 मई 1999 को शुरू हुए हवाई अभियान ने कारगिल में पाकिस्तान की कमर तोड़ी

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ऑपरेशन सफेद सागर: 26 मई 1999 को शुरू हुए हवाई अभियान ने कारगिल में पाकिस्तान की कमर तोड़ी

सारांश

26 मई 1999 को शुरू हुआ ऑपरेशन सफेद सागर सिर्फ हवाई समर्थन नहीं था — यह कारगिल युद्ध का टर्निंग पॉइंट था। 5,000 स्ट्राइक मिशन, मिराज-2000 की सटीक मार और चार वीरों के सर्वोच्च बलिदान ने 16,000 फीट की ऊँचाई पर भारत की जीत की नींव रखी।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सफेद सागर की शुरुआत 26 मई 1999 को थल सेना के ऑपरेशन विजय के समर्थन में की गई थी।
भारतीय वायुसेना ने लगभग 5,000 स्ट्राइक मिशन , 350 टोही मिशन , 800 एस्कॉर्ट उड़ानें और 2,000 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित कीं।
28 मई 1999 को 152 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार वायु योद्धाओं — स्क्वाड्रन लीडर आर.
पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस.
मुहिलान, सार्जेंट पी.वी.एन.आर.
प्रसाद और सार्जेंट आर.के.
साहू — ने टोलोलिंग में मिशन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया।
चारों वीरों को मरणोपरांत वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया।
मिराज-2000 विमानों ने 16,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर लेजर-निर्देशित बमों से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार किए।
प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारतीय वायुसेना ने 26 मई 1999 को ऑपरेशन सफेद सागर की शुरुआत की — एक ऐसा हवाई अभियान जिसने कारगिल युद्ध का रुख भारत के पक्ष में पलटने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह अभियान थल सेना के ऑपरेशन विजय के समर्थन में चलाया गया था, जिसका स्पष्ट उद्देश्य था — कारगिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा के साथ भारतीय चौकियों पर अवैध कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खदेड़ना। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे सफल और जटिल हवाई अभियानों में से एक है।

अभियान का विस्तार और आँकड़े

ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान भारतीय वायुसेना ने लगभग 5,000 स्ट्राइक मिशन, 350 टोही और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) मिशन तथा करीब 800 एस्कॉर्ट उड़ानें संचालित कीं। घायल सैनिकों की निकासी और रसद पहुँचाने के लिए 2,000 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें भी भरी गईं। इन अभियानों ने अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे भारतीय सैनिकों को महत्वपूर्ण सामरिक बढ़त दिलाई।

152 हेलीकॉप्टर यूनिट का बलिदान

152 हेलीकॉप्टर यूनिट, जिसे 'द माइटी आर्मर' के नाम से जाना जाता है, ने इस युद्ध में अतुलनीय साहस का प्रदर्शन किया। 28 मई 1999 को इस यूनिट के स्क्वाड्रन लीडर आर. पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस. मुहिलान, सार्जेंट पी.वी.एन.आर. प्रसाद और सार्जेंट आर.के. साहू को 'नुबरा' फॉर्मेशन के तहत टोलोलिंग क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों पर लाइव स्ट्राइक का दायित्व सौंपा गया। मिशन सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लौटते समय उनके हेलीकॉप्टर को दुश्मन की स्टिंगर मिसाइल ने निशाना बनाया, जिसमें चारों वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अद्वितीय साहस के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत वायु सेना पदक (वीरता) से नवाज़ा गया।

मिराज-2000 की निर्णायक भूमिका

इस अभियान में भारतीय वायुसेना ने मिग-21, मिग-23, मिग-27 और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों का प्रभावी उपयोग किया। विशेष रूप से मिराज-2000 विमानों ने दुश्मन के बंकरों, रसद केंद्रों और रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमले कर युद्ध की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 16,000 फीट से अधिक ऊँचाई वाले लक्ष्यों पर लेजर-निर्देशित बमों का सफल इस्तेमाल भारतीय वायुसेना की तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण बना।

विषम परिस्थितियों में असाधारण पराक्रम

गौरतलब है कि कारगिल का युद्ध दुनिया के सबसे ऊँचे और दुर्गम युद्धक्षेत्रों में लड़ा गया था। बर्फ से ढकी चोटियाँ, ऑक्सीजन की कमी, प्रतिकूल मौसम और सीमित दृश्यता ने हवाई अभियान को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया था। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय वायुसेना ने तेज़ी से तकनीकी बदलाव अपनाए और प्रभावी हवाई कार्रवाई को अंजाम दिया। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभियान ने राष्ट्र की सुरक्षा में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को पुनः स्थापित किया।

कारगिल विजय दिवस और राष्ट्रीय स्मरण

ऑपरेशन सफेद सागर ने न केवल दुश्मन की आपूर्ति व्यवस्था और सैन्य ठिकानों को भारी क्षति पहुँचाई, बल्कि थल सेना की जमीनी कार्रवाई को भी निर्णायक मजबूती प्रदान की। थल सेना और वायुसेना के इस उत्कृष्ट समन्वय ने अंततः भारत को कारगिल युद्ध में विजय दिलाई। इसी विजय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है — उन सभी वीर सैनिकों और वायु योद्धाओं को श्रद्धांजलि, जिनके साहस और बलिदान ने तिरंगे की शान को अक्षुण्ण रखा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 स्ट्राइक या 2,000 हेलीकॉप्टर उड़ानें — बल्कि उस सैद्धांतिक बदलाव में है जो इसने भारतीय सैन्य सोच में लाया। 16,000 फीट की ऊँचाई पर लेजर-निर्देशित हथियारों के सफल प्रयोग ने साबित किया कि आधुनिक वायु शक्ति पारंपरिक पहाड़ी युद्ध की सीमाओं को पार कर सकती है। हालाँकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इस विजय की कीमत चार वायु योद्धाओं के बलिदान से चुकाई गई, जिनका स्मरण केवल विजय दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कारगिल ने थल-वायु समन्वय का जो मॉडल स्थापित किया, वह आज भी भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध-क्षमता का आधार है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सफेद सागर क्या था?
ऑपरेशन सफेद सागर भारतीय वायुसेना का वह हवाई अभियान था जो 26 मई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान थल सेना के ऑपरेशन विजय के समर्थन में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य कारगिल सेक्टर में भारतीय चौकियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खदेड़ना था।
ऑपरेशन सफेद सागर में कितने मिशन उड़ाए गए?
इस अभियान में भारतीय वायुसेना ने लगभग 5,000 स्ट्राइक मिशन, 350 टोही और ELINT मिशन, करीब 800 एस्कॉर्ट उड़ानें तथा 2,000 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित कीं। ये उड़ानें घायल सैनिकों की निकासी और रसद आपूर्ति के लिए भी भरी गईं।
28 मई 1999 को कारगिल में क्या हुआ था?
28 मई 1999 को 152 हेलीकॉप्टर यूनिट के स्क्वाड्रन लीडर आर. पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस. मुहिलान, सार्जेंट पी.वी.एन.आर. प्रसाद और सार्जेंट आर.के. साहू ने टोलोलिंग क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों पर लाइव स्ट्राइक मिशन पूरा किया। वापसी के दौरान दुश्मन की स्टिंगर मिसाइल से उनका हेलीकॉप्टर निशाना बना और चारों वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया; उन्हें मरणोपरांत वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया।
कारगिल युद्ध में मिराज-2000 की क्या भूमिका थी?
मिराज-2000 विमानों ने दुश्मन के बंकरों, रसद केंद्रों और रणनीतिक ठिकानों पर लेजर-निर्देशित बमों से सटीक हमले किए, जो 16,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर संचालित किए गए। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इन हमलों ने युद्ध की दिशा बदलने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कारगिल विजय दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
कारगिल विजय दिवस प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारत ने कारगिल युद्ध में औपचारिक विजय प्राप्त की थी और यह दिन उन सभी सैनिकों व वायु योद्धाओं के बलिदान को राष्ट्रीय श्रद्धांजलि का अवसर है जिन्होंने भारत की सीमाओं की रक्षा की।
राष्ट्र प्रेस
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