27 अगस्त 2026
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कर्नाटक सरकार ने शिक्षा सुधार के लिए कैबिनेट उप-समिति गठित, यूटी खादर होंगे अध्यक्ष

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कर्नाटक सरकार ने शिक्षा सुधार के लिए कैबिनेट उप-समिति गठित, यूटी खादर होंगे अध्यक्ष

सारांश

कर्नाटक सरकार ने छात्रों की समस्याओं और शिक्षा सुधार के लिए पाँच मंत्रियों की कैबिनेट उप-समिति बनाई है। यूटी खादर की अध्यक्षता में यह समिति फीस, परीक्षा निष्पक्षता, मानसिक स्वास्थ्य और रोज़गार से जुड़े मुद्दों पर एक महीने में रिपोर्ट देगी।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 27 अगस्त 2026 को छात्र मुद्दों और शिक्षा सुधार के लिए कैबिनेट उप-समिति का गठन किया।
समिति की अध्यक्षता मंत्री यूटी खादर करेंगे; सदस्यों में मधु बंगारप्पा , बसवराज रायरेड्डी , प्रियांक खड़गे और शरण प्रकाश पाटिल शामिल हैं।
समिति परीक्षा निष्पक्षता, फीस नियमन, बुनियादी ढाँचा, कौशल विकास और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों की जाँच करेगी।
यह कदम राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
समिति को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

कर्नाटक सरकार ने 27 अगस्त 2026 को छात्रों की समस्याओं के समाधान और राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार की सिफारिश करने के लिए एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्वास्थ्य, अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज व वक्फ मंत्री यूटी खादर को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। समिति को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

समिति का गठन और सदस्य

मंत्री यूटी खादर की अध्यक्षता वाली इस कैबिनेट उप-समिति में चार वरिष्ठ मंत्री सदस्य के रूप में शामिल हैं — स्कूल शिक्षा व साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा, उच्च शिक्षा मंत्री बसवराज रायरेड्डी, गृह, आईटी-बीटी व ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खड़गे और चिकित्सा शिक्षा व कौशल विकास मंत्री शरण प्रकाश पाटिल। इस बहु-विभागीय संरचना से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा को स्कूल से लेकर रोज़गार तक एक समग्र दृष्टिकोण से देखना चाहती है।

किन मुद्दों की होगी जाँच

समिति को निम्नलिखित विषयों पर सिफारिशें देने का निर्देश दिया गया है: परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता, शिक्षा की लागत, फीस और कोचिंग का नियमन, सार्वजनिक संस्थानों में बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम में सुधार, कौशल विकास और रोज़गार से जुड़ाव, छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य एवं भलाई, और शिक्षा तक पहुँच व समानता। ये मुद्दे देश के अन्य राज्यों में भी लंबे समय से बहस का विषय रहे हैं, जिससे यह पहल राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी प्रासंगिक हो जाती है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह निर्णय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के संदर्भ में आया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव लाना था। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देशभर में छात्र रोज़गार, परीक्षा पारदर्शिता और उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

सरकार का रुख

स्कूल शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि 'राज्य का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर करता है और सरकार उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जरूरी बुनियादी ढाँचा और पर्याप्त अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।' उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों, युवाओं और आम जनता से सुझाव व प्रतिक्रिया का स्वागत किया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने समिति को निर्देश दिया है कि वे सीधे छात्रों से संवाद करें और उनकी आकांक्षाओं को नीतिगत सिफारिशों में परिवर्तित करें।

आगे क्या होगा

समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर कर्नाटक सरकार शिक्षा क्षेत्र में ठोस नीतिगत बदलाव लागू करने की योजना बना रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति की सिफारिशें कितनी जल्दी और किस रूप में ज़मीन पर उतरती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक महीने में तैयार रिपोर्ट क्या वास्तव में नीतिगत बदलाव ला पाएगी या यह महज़ एक राजनीतिक संकेत बनकर रह जाएगी। 'छात्रों की गूंज' जैसे विपक्षी कार्यक्रम के जवाब में बनी समिति पर यह दबाव है कि वह प्रतिक्रियावादी नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधार का रोडमैप दे। कोचिंग नियमन और परीक्षा पारदर्शिता जैसे मुद्दे राज्य की सीमाओं से परे हैं और केंद्र-राज्य समन्वय के बिना इनका समाधान अधूरा रहेगा। यदि समिति की सिफारिशें ठोस क्रियान्वयन तंत्र के बिना आईं, तो यह पहल भी पिछली ऐसी कमेटियों की तरह फाइलों में दफन हो सकती है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक की कैबिनेट उप-समिति किन मुद्दों पर काम करेगी?
यह समिति परीक्षा और भर्ती में निष्पक्षता, शिक्षा की फीस और कोचिंग नियमन, सार्वजनिक संस्थानों में बुनियादी ढाँचा, पाठ्यक्रम सुधार, कौशल विकास, छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा तक समान पहुँच जैसे मुद्दों की जाँच करेगी।
कैबिनेट उप-समिति का अध्यक्ष कौन है और इसमें कौन-कौन से मंत्री हैं?
समिति की अध्यक्षता मंत्री यूटी खादर कर रहे हैं। इसमें मधु बंगारप्पा, बसवराज रायरेड्डी, प्रियांक खड़गे और शरण प्रकाश पाटिल सदस्य हैं।
यह समिति कब तक रिपोर्ट देगी?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने समिति को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
यह समिति क्यों बनाई गई?
यह समिति राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में बनाई गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाना था। कर्नाटक सरकार छात्रों की आकांक्षाओं को समझकर उचित नीतिगत बदलाव लागू करना चाहती है।
इस समिति से छात्रों को क्या फायदा होगा?
समिति सीधे छात्रों से संवाद करेगी और उनकी समस्याओं को नीतिगत सिफारिशों में बदलेगी। इससे फीस नियमन, परीक्षा पारदर्शिता और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसे क्षेत्रों में ठोस सुधार की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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