22 सितंबर 2026
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कर्नाटक: 2030 तक नमक की खपत 30% घटाने की राज्य कार्य योजना लॉन्च, मंत्री यूटी खादर ने की शुरुआत

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कर्नाटक: 2030 तक नमक की खपत 30% घटाने की राज्य कार्य योजना लॉन्च, मंत्री यूटी खादर ने की शुरुआत

सारांश

कर्नाटक ने 2030 तक नमक की खपत 30% घटाने का लक्ष्य रखा है — भारतीय औसत WHO की सीमा से दोगुना है। यह बहुक्षेत्रीय कार्य योजना घर, बाहर के खाने और पैकेटबंद उत्पादों — तीनों मोर्चों पर एकसाथ काम करेगी।

मुख्य बातें

मंत्री यूटी खादर ने 22 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक राज्य बहुक्षेत्रीय कार्य योजना लॉन्च की।
लक्ष्य: 2030 तक नमक की जनसंख्या-स्तरीय खपत में 30 प्रतिशत की कमी।
WHO की अनुशंसा प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 5 ग्राम से कम ; भारतीय वर्तमान में औसतन 8–11 ग्राम उपभोग करते हैं।
RGUHS के कुलपति भगवान बी.सी.
की अध्यक्षता में तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) गठित।
योजना तीन क्षेत्रों — घरेलू उपयोग, बाहर का खाना और पैकेटबंद/प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ — पर केंद्रित।
समन्वय के लिए बहु-विभागीय राज्य संचालन समिति के गठन का आह्वान।

कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यूटी खादर ने 22 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के विधान सौधा में कर्नाटक राज्य बहुक्षेत्रीय कार्य योजना का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक राज्य में नमक की प्रति व्यक्ति खपत को 30 प्रतिशत तक कम करना है। यह पहल भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक सेवन की अनुशंसा के अनुरूप है। गैर-संचारी रोगों (NCDs) की रोकथाम की दिशा में यह कर्नाटक सरकार का अब तक का सबसे संरचित सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप माना जा रहा है।

योजना की पृष्ठभूमि और ज़रूरत

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारतीय प्रतिदिन औसतन 8 से 11 ग्राम नमक का सेवन करते हैं — जो WHO की अनुशंसित मात्रा से लगभग दोगुना है। अधिक नमक सेवन उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और हृदय रोगों के जोखिम से सीधे जुड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में NCDs का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है और स्वास्थ्य संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने पहले ही अधिक वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों (HFSS) से निपटने के लिए कुछ उपाय लागू किए हैं। नई कार्य योजना उन्हीं प्रयासों को एक व्यापक और बहुक्षेत्रीय ढाँचे में समेकित करती है।

मुख्य घटनाक्रम

यह कार्य योजना विधान सौधा में आयोजित तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) की बैठक के दौरान शुरू की गई। इस अवसर पर पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव और राज्यसभा सांसद मंसूर अली खान भी उपस्थित थे।

योजना तीन प्रमुख क्षेत्रों में नमक की खपत पर ध्यान केंद्रित करती है: घरेलू उपयोग, घर के बाहर खाया जाने वाला भोजन और प्रसंस्कृत एवं पैकेटबंद खाद्य पदार्थ। प्रमुख उपायों में नमक के अनावश्यक उपयोग में कटौती, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा घटाने के लिए उद्योग को प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से आहार परामर्श को सुदृढ़ बनाना और पोटेशियम युक्त कम-सोडियम नमक पर शोध को समर्थन देना शामिल है।

तकनीकी सलाहकार समूह का गठन

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RGUHS) के कुलपति भगवान बी.सी. की अध्यक्षता में एक तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) का गठन किया गया है। यह समूह नमक की मात्रा कम करने और स्वस्थ आहार प्रथाओं पर साक्ष्य-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

इस समूह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जयदेव हृदय रोग विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, NIMHANS, शैक्षणिक-पोषण संस्थानों और जन स्वास्थ्य संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हैं। जयदेव हृदय रोग स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के निदेशक दिनेश बी. ने तकनीकी विचार-विमर्श में भाग लिया।

सरकार की प्रतिबद्धता और अगले कदम

मंत्री खादर ने स्वस्थ आहार के माध्यम से NCDs की रोकथाम हेतु सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कई विभागों को मिलाकर एक राज्य संचालन समिति गठित करने का आह्वान किया, ताकि स्वस्थ आहार आदतों पर समन्वित और निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक ज्ञानेश कामथ ने बैठक में राज्य कार्य योजना के तहत प्रमुख प्राथमिकताओं और प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। आने वाले महीनों में विभागीय स्तर पर क्रियान्वयन शुरू होने की उम्मीद है, और इसकी प्रगति की निगरानी TAG द्वारा की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन में है। घरेलू खपत घटाना जागरूकता अभियानों से हो सकता है, परंतु प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग पर सोडियम कटौती के लिए नियामक दबाव या कानूनी ढाँचे के बिना 30% का लक्ष्य महत्वाकांक्षी ही रहेगा। भारत में FSSAI के मौजूदा लेबलिंग नियम पर्याप्त रूप से लागू नहीं हो पाए हैं, और स्वैच्छिक उद्योग प्रतिबद्धताओं का वैश्विक ट्रैक रिकॉर्ड मिला-जुला है। TAG का गठन और बहु-विभागीय समिति की संकल्पना उत्साहजनक है, लेकिन प्रगति मापने के लिए पारदर्शी और सार्वजनिक निगरानी तंत्र के बिना यह योजना एक और अच्छी-नीयत की घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक राज्य बहुक्षेत्रीय कार्य योजना क्या है?
यह 22 सितंबर 2026 को लॉन्च की गई एक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है, जिसका लक्ष्य 2030 तक कर्नाटक में नमक की खपत को 30 प्रतिशत तक कम करना और WHO की प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक की सिफारिश के अनुरूप प्रगति करना है। यह योजना घरेलू उपयोग, बाहर के खाने और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों — तीनों मोर्चों पर एकसाथ काम करेगी।
भारतीय कितना नमक खाते हैं और यह क्यों चिंताजनक है?
सरकारी अनुमानों के अनुसार भारतीय प्रतिदिन औसतन 8 से 11 ग्राम नमक का सेवन करते हैं, जो WHO की 5 ग्राम प्रतिदिन की अनुशंसित सीमा से लगभग दोगुना है। अधिक नमक सेवन उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और हृदय रोगों के बढ़े हुए जोखिम से सीधे जुड़ा है।
तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) की भूमिका क्या होगी?
RGUHS के कुलपति भगवान बी.सी. की अध्यक्षता में गठित TAG नमक की मात्रा कम करने और स्वस्थ आहार प्रथाओं पर साक्ष्य-आधारित तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसमें स्वास्थ्य विभाग, जयदेव हृदय रोग संस्थान, NIMHANS और पोषण-शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
इस योजना में नमक कम करने के क्या-क्या उपाय शामिल हैं?
योजना में नमक के अनावश्यक उपयोग में कटौती, प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को सोडियम घटाने के लिए प्रोत्साहित करना, स्वास्थ्य प्रणाली के ज़रिए आहार परामर्श मज़बूत करना, स्वास्थ्यवर्धक खाद्य विकल्पों को बढ़ावा देना और पोटेशियम युक्त कम-सोडियम नमक पर शोध का समर्थन करना शामिल है।
इस योजना से कर्नाटक की आम जनता को क्या फायदा होगा?
नमक की खपत में कमी से उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और हृदय रोगों का जोखिम कम होगा, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य खर्च घटेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ कम होगा। राज्य संचालन समिति के ज़रिए बहु-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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