25 सितंबर 2026
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कर्नाटक में मातृ मृत्यु दर 73 से 70 के नीचे लाने का लक्ष्य, सुमन रोडमैप 2030 जारी

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कर्नाटक में मातृ मृत्यु दर 73 से 70 के नीचे लाने का लक्ष्य, सुमन रोडमैप 2030 जारी

सारांश

कर्नाटक ने मातृ मृत्यु दर को 73 से 70 से नीचे लाने का तत्काल लक्ष्य तय किया है और सुमन रोडमैप 2030 जारी किया है। यह रोडमैप जोखिम पहचान, आपातकालीन तैयारी और जिला स्तरीय जवाबदेही पर टिका है — महज़ कागज़ी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि परिणाम-आधारित ढाँचा।

मुख्य बातें

कर्नाटक की मातृ मृत्यु दर (MMR) फिलहाल प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 73 है — तत्काल लक्ष्य इसे 70 से नीचे लाना है।
स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने 25 सितंबर 2026 को सुमन रोडमैप 2030 कार्यशाला का उद्घाटन किया।
रोडमैप में जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाया गया है — गर्भधारण-पूर्व से प्रसवोत्तर अवधि तक निरंतर देखभाल सुनिश्चित होगी।
PPH, सेप्सिस और उच्च रक्तचाप जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को दवाओं, उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मियों से लैस किया जाएगा।
MDSR प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएगा — मृत्यु समीक्षाएँ अब केवल दस्तावेजीकरण तक नहीं, बल्कि मूल कारण विश्लेषण और सुधारात्मक कार्रवाई तक विस्तारित होंगी।
राज्य स्तरीय प्रगति के साथ-साथ जिला स्तरीय जवाबदेही को भी रोडमैप का केंद्रीय स्तंभ बनाया गया है।

कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 25 सितंबर 2026 को राज्य की मातृ मृत्यु दर (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इसके लिए एक विस्तृत रोडमैप का अनावरण किया। यह रोडमैप रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को दीर्घकालिक रूप से शून्य तक पहुँचाने के लक्ष्य के साथ तैयार किया गया है।

कार्यशाला और रोडमैप का अनावरण

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) कार्यक्रम के अंतर्गत सुमन रोडमैप 2030 पर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका विषय था — 'रोडमैप से परिणाम तक: रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को शून्य तक पहुँचाने की दिशा में कर्नाटक की यात्रा को गति देना।' कार्यशाला का उद्घाटन राज्य के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने किया और अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने राज्यभर में गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सम्मानजनक मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मौजूदा स्थिति और तत्काल लक्ष्य

2022-24 की नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के अनुमान के अनुसार, कर्नाटक में मातृ मृत्यु दर फिलहाल प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 73 है। विभाग ने इसे तत्काल 70 से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी MMR में कमी की गति धीमी बताई जा रही है, और राज्यों पर प्रदर्शन का दबाव बढ़ा है।

रोडमैप की मुख्य रणनीतियाँ

इस रोडमैप का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा कवरेज से गुणवत्ता, जोखिम पहचान से समयबद्ध हस्तक्षेप, कार्यक्रम क्रियान्वयन से मापने योग्य परिणाम और राज्य स्तरीय प्रगति से जिला स्तरीय जवाबदेही की ओर ध्यान केंद्रित करना है। राज्य जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाएगा — गर्भधारण-पूर्व देखभाल से लेकर गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

गर्भावस्था से पहले एनीमिया, पोषण संबंधी कमियों, गैर-संक्रामक रोगों और अन्य जोखिम कारकों की पहचान और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए, पहचान और जोखिम वर्गीकरण से लेकर रेफरल, उपचार, फॉलो-अप और सुरक्षित प्रसव तक की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा।

आपातकालीन तैयारी और अवसंरचना

रोडमैप में प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH), उच्च रक्तचाप संबंधी आपात स्थितियों और सेप्सिस जैसी प्रसूति आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी पर विशेष जोर है। स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाएँ, उपकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन परिवहन व रेफरल प्रणालियाँ सुनिश्चित की जाएंगी।

निगरानी और जवाबदेही तंत्र

मातृ मृत्यु निगरानी और प्रतिक्रिया (MDSR) प्रणाली को भी बेहतर बनाया जाएगा। विभाग के अनुसार, मातृ मृत्यु समीक्षाएँ अब केवल दस्तावेजीकरण तक सीमित नहीं रहेंगी — इनमें मूल कारणों की पहचान, सुधारात्मक कार्रवाई और ऐसी मौतों को भविष्य में रोकने के लिए अनुवर्ती कदम भी शामिल होंगे। गौरतलब है कि यह जवाबदेही-केंद्रित दृष्टिकोण पिछली समीक्षा प्रक्रियाओं से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। राज्य के इस प्रयास के परिणाम अगले दो-तीन वर्षों में SRS के आँकड़ों में परिलक्षित होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — राज्य में पिछले कुछ वर्षों में MMR में गिरावट की गति असमान रही है और जिला स्तर पर स्वास्थ्य अवसंरचना की खाई अभी भी चिंताजनक है। MDSR को मूल कारण विश्लेषण से जोड़ना सराहनीय कदम है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलेगा जब जिला अधिकारी समीक्षाओं के निष्कर्षों पर जवाबदेह हों — न कि महज़ रिपोर्टें भेजें। यह भी ध्यान देने योग्य है कि SRS के आँकड़े वास्तविक स्थिति से पीछे चलते हैं; 2022-24 का अनुमान 73 है, जबकि जमीनी स्थिति भिन्न हो सकती है। रोकी जा सकने वाली मौतों को शून्य पर लाना एक नैतिक लक्ष्य है — पर इसके लिए संख्याओं से परे, ग्रामीण महिलाओं की पहुँच और सामाजिक बाधाओं पर भी उतनी ही गंभीरता चाहिए।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक की मातृ मृत्यु दर (MMR) अभी कितनी है और लक्ष्य क्या है?
2022-24 की SRS रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक की MMR प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 73 है। राज्य का तत्काल लक्ष्य इसे 70 से नीचे लाना है और दीर्घकालिक लक्ष्य रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को शून्य तक पहुँचाना है।
सुमन रोडमैप 2030 क्या है?
सुमन रोडमैप 2030 कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया एक परिणाम-आधारित ढाँचा है। यह जोखिम पहचान, आपातकालीन तैयारी, जिला जवाबदेही और MDSR प्रणाली को मज़बूत करने पर केंद्रित है।
कर्नाटक सरकार उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को कैसे संभालेगी?
उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए जोखिम पहचान और वर्गीकरण से लेकर रेफरल, उपचार, फॉलो-अप और सुरक्षित प्रसव तक की पूरी श्रृंखला को सुदृढ़ किया जाएगा। गर्भावस्था से पहले एनीमिया, पोषण की कमी और गैर-संक्रामक रोगों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मातृ मृत्यु निगरानी और प्रतिक्रिया (MDSR) प्रणाली को कैसे मज़बूत किया जाएगा?
MDSR प्रणाली में अब केवल दस्तावेजीकरण नहीं, बल्कि मृत्यु के मूल कारणों की पहचान, सुधारात्मक कार्रवाई और ऐसी मौतों को रोकने के लिए अनुवर्ती कदम भी शामिल किए जाएंगे। यह बदलाव जवाबदेही-केंद्रित दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कर्नाटक में मातृ स्वास्थ्य सुधार से किसे फायदा होगा?
इस योजना का सीधा लाभ राज्य की गर्भवती महिलाओं — विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली उच्च जोखिम वाली महिलाओं — को मिलेगा। जिला स्तर पर बेहतर अवसंरचना और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता से प्रसव के दौरान और बाद में होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों में कमी अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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