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मसाबा गुप्ता बनीं यूएनएफपीए इंडिया की मातृ स्वास्थ्य एडवोकेट, MMR में 73% की कमी के बीच नई पहल

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मसाबा गुप्ता बनीं यूएनएफपीए इंडिया की मातृ स्वास्थ्य एडवोकेट, MMR में 73% की कमी के बीच नई पहल

सारांश

मसाबा गुप्ता का UNFPA इंडिया की मातृ स्वास्थ्य एडवोकेट बनना महज एक सेलिब्रिटी नियुक्ति नहीं — यह उस विमर्श को मुख्यधारा में लाने की कोशिश है जो अब तक हाशिये पर था: माँ बनने के बाद खुद माँ की देखभाल। भारत का MMR 73% गिरकर 87 पर आ चुका है, और 2030 का लक्ष्य पहुँच में है।

मुख्य बातें

मसाबा गुप्ता को UNFPA इंडिया ने 23 सितंबर 2026 को मातृ स्वास्थ्य की नई एडवोकेट नियुक्त किया।
भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2022-24 में घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 हो गया — 2000 से 2023 के बीच 73% की कमी।
यह आँकड़ा 2030 तक 70 से कम के वैश्विक SDG लक्ष्य के करीब है।
मसाबा एक वर्ष तक डिजिटल अभियान, जनसंवाद और जमीनी कार्यक्रमों में भाग लेंगी।
UNFPA इंडिया के नेटवर्क में कृति सेनन (जेंडर समानता एंबेसडर) और सोहा अली खान (यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एडवोकेट) पहले से शामिल हैं।

फैशन डिजाइनर और उद्यमी मसाबा गुप्ता को संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) इंडिया ने मातृ स्वास्थ्य के लिए अपना नया एडवोकेट नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है जब भारत ने वर्ष 2000 से 2023 के बीच मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 73 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है और 2030 के सतत विकास लक्ष्य (SDG) की दहलीज पर खड़ा है।

भारत की मातृ स्वास्थ्य उपलब्धि

UNFPA इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, भारत का MMR वर्ष 2022-24 में घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 हो गया है। यह आँकड़ा अब 2030 तक प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने के वैश्विक लक्ष्य के बेहद निकट है।

संस्था के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में दो दशकों से अधिक समय तक किए गए सतत निवेश ने इस उपलब्धि में निर्णायक भूमिका निभाई है। इससे विशेष रूप से वंचित समुदायों की बड़ी संख्या में महिलाओं की जीवन-रक्षा संभव हो पाई है।

मसाबा गुप्ता की भूमिका और लक्ष्य

मसाबा गुप्ता एक वर्ष तक UNFPA इंडिया के साथ मिलकर मातृ स्वास्थ्य को लेकर डिजिटल जागरूकता अभियान, जनसंवाद और जमीनी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ेंगी। उनका केंद्रीय उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और शुरुआती मातृत्व के दौरान महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाना है।

मसाबा गुप्ता ने अपनी नियुक्ति पर कहा, 'मातृत्व एक महिला से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से क्या कीमत वसूलता है, इसके बारे में कोई नहीं बताता। बच्चे के जन्म के बाद पूरा ध्यान बच्चे पर चला जाता है, जबकि सबसे अधिक देखभाल की जरूरत माँ को होती है। मैं UNFPA के साथ इसलिए जुड़ी हूँ क्योंकि यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि वर्षों से मातृ स्वास्थ्य पर किया गया वास्तविक काम है।'

संस्था का दृष्टिकोण

UNFPA इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनार ने कहा कि मातृ मृत्यु में यह कमी इस बात का प्रमाण है कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, निरंतर सार्वजनिक निवेश और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब लक्ष्य हर महिला को गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करना है।

UNFPA इंडिया का व्यापक नेटवर्क

मसाबा गुप्ता अब UNFPA इंडिया के उन प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में शामिल हो गई हैं जो महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का काम करेंगे। गौरतलब है कि इस पहल में अभिनेत्री कृति सेनन जेंडर समानता की राष्ट्रीय एंबेसडर और सोहा अली खान यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकारों की एडवोकेट के रूप में पहले से जुड़ी हुई हैं।

यह पहल ऐसे समय में और भी अहम हो जाती है जब स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ यह रेखांकित करते रहे हैं कि भारत में प्रसव-पश्चात मानसिक स्वास्थ्य और नवजात माताओं की देखभाल अब भी नीतिगत प्राथमिकताओं में पिछड़ी हुई है। मसाबा जैसी सार्वजनिक हस्ती का जुड़ाव इस विमर्श को शहरी मध्यवर्गीय दर्शकों तक ले जाने में सहायक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर नीतिगत बदलाव को स्पर्श नहीं करती — और यही इसकी असली परीक्षा है। भारत का MMR 73% गिरना निर्विवाद उपलब्धि है, लेकिन यह औसत राज्यों के बीच गहरी असमानता को छुपाता है: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का MMR राष्ट्रीय औसत से कहीं ऊपर है। प्रसव-पश्चात मानसिक स्वास्थ्य — जिसे मसाबा ने खुद रेखांकित किया — अभी भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में बजट-कम श्रेणी में है। डिजिटल अभियान शहरी मध्यवर्ग तक पहुँचने में कारगर होंगे, लेकिन वंचित और ग्रामीण महिलाओं तक असली पहुँच के लिए जमीनी ढाँचे को मज़बूत करना इससे कहीं अधिक ज़रूरी है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मसाबा गुप्ता को UNFPA इंडिया का मातृ स्वास्थ्य एडवोकेट क्यों बनाया गया?
UNFPA इंडिया ने मसाबा गुप्ता को उनकी व्यापक सार्वजनिक पहचान और महिला स्वास्थ्य के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के कारण मातृ स्वास्थ्य एडवोकेट नियुक्त किया है। वे एक वर्ष तक डिजिटल अभियानों, जनसंवाद और जमीनी कार्यक्रमों के ज़रिये गर्भावस्था, प्रसव और मातृत्व के दौरान महिलाओं के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बनाएंगी।
भारत का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) अभी कितना है?
UNFPA इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, भारत का MMR वर्ष 2022-24 में घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 हो गया है। यह वर्ष 2000 से 2023 के बीच 73 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है और 2030 तक 70 से कम के वैश्विक SDG लक्ष्य के बेहद करीब है।
UNFPA इंडिया के मातृ स्वास्थ्य अभियान में और कौन शामिल हैं?
मसाबा गुप्ता के अलावा, अभिनेत्री कृति सेनन इस पहल में जेंडर समानता की राष्ट्रीय एंबेसडर के रूप में और सोहा अली खान यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकारों की एडवोकेट के रूप में पहले से जुड़ी हैं। ये सभी मिलकर महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का काम करती हैं।
भारत में MMR में कमी कैसे आई?
UNFPA इंडिया के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और दो दशकों से अधिक समय तक अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में किए गए निरंतर निवेश ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे विशेष रूप से वंचित समुदायों की महिलाओं की जीवन-रक्षा संभव हो पाई।
मातृ स्वास्थ्य के लिए 2030 का SDG लक्ष्य क्या है?
2030 के सतत विकास लक्ष्य (SDG) के तहत वैश्विक लक्ष्य है कि रोकी जा सकने वाली मातृ मृत्यु को समाप्त किया जाए और MMR को प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाया जाए। भारत का मौजूदा MMR 87 इस लक्ष्य के बेहद करीब है।
राष्ट्र प्रेस
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