मसाबा गुप्ता बनीं यूएनएफपीए इंडिया की मातृ स्वास्थ्य एडवोकेट, MMR में 73% की कमी के बीच नई पहल
सारांश
मुख्य बातें
फैशन डिजाइनर और उद्यमी मसाबा गुप्ता को संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) इंडिया ने मातृ स्वास्थ्य के लिए अपना नया एडवोकेट नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई है जब भारत ने वर्ष 2000 से 2023 के बीच मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 73 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है और 2030 के सतत विकास लक्ष्य (SDG) की दहलीज पर खड़ा है।
भारत की मातृ स्वास्थ्य उपलब्धि
UNFPA इंडिया के आँकड़ों के अनुसार, भारत का MMR वर्ष 2022-24 में घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 हो गया है। यह आँकड़ा अब 2030 तक प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से कम लाने के वैश्विक लक्ष्य के बेहद निकट है।
संस्था के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में दो दशकों से अधिक समय तक किए गए सतत निवेश ने इस उपलब्धि में निर्णायक भूमिका निभाई है। इससे विशेष रूप से वंचित समुदायों की बड़ी संख्या में महिलाओं की जीवन-रक्षा संभव हो पाई है।
मसाबा गुप्ता की भूमिका और लक्ष्य
मसाबा गुप्ता एक वर्ष तक UNFPA इंडिया के साथ मिलकर मातृ स्वास्थ्य को लेकर डिजिटल जागरूकता अभियान, जनसंवाद और जमीनी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ेंगी। उनका केंद्रीय उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और शुरुआती मातृत्व के दौरान महिलाओं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाना है।
मसाबा गुप्ता ने अपनी नियुक्ति पर कहा, 'मातृत्व एक महिला से शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से क्या कीमत वसूलता है, इसके बारे में कोई नहीं बताता। बच्चे के जन्म के बाद पूरा ध्यान बच्चे पर चला जाता है, जबकि सबसे अधिक देखभाल की जरूरत माँ को होती है। मैं UNFPA के साथ इसलिए जुड़ी हूँ क्योंकि यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि वर्षों से मातृ स्वास्थ्य पर किया गया वास्तविक काम है।'
संस्था का दृष्टिकोण
UNFPA इंडिया की प्रतिनिधि एंड्रिया एम. वोजनार ने कहा कि मातृ मृत्यु में यह कमी इस बात का प्रमाण है कि मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, निरंतर सार्वजनिक निवेश और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब लक्ष्य हर महिला को गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करना है।
UNFPA इंडिया का व्यापक नेटवर्क
मसाबा गुप्ता अब UNFPA इंडिया के उन प्रमुख सार्वजनिक चेहरों में शामिल हो गई हैं जो महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का काम करेंगे। गौरतलब है कि इस पहल में अभिनेत्री कृति सेनन जेंडर समानता की राष्ट्रीय एंबेसडर और सोहा अली खान यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकारों की एडवोकेट के रूप में पहले से जुड़ी हुई हैं।
यह पहल ऐसे समय में और भी अहम हो जाती है जब स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ यह रेखांकित करते रहे हैं कि भारत में प्रसव-पश्चात मानसिक स्वास्थ्य और नवजात माताओं की देखभाल अब भी नीतिगत प्राथमिकताओं में पिछड़ी हुई है। मसाबा जैसी सार्वजनिक हस्ती का जुड़ाव इस विमर्श को शहरी मध्यवर्गीय दर्शकों तक ले जाने में सहायक हो सकता है।