16 अक्टूबर 2026
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विश्व खाद्य दिवस 2026: FAO के अनुसार 64 करोड़ भूखे, 2.69 अरब पौष्टिक भोजन से वंचित — नवाचार ही रास्ता

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विश्व खाद्य दिवस 2026: FAO के अनुसार 64 करोड़ भूखे, 2.69 अरब पौष्टिक भोजन से वंचित — नवाचार ही रास्ता

सारांश

दुनिया में अनाज की कमी नहीं, फिर भी 64 करोड़ भूखे और 2.69 अरब लोग पौष्टिक थाली से दूर — विश्व खाद्य दिवस 2026 पर FAO ने कहा: समस्या उत्पादन की नहीं, पहुँच और व्यवस्था की है। नवाचार, सामूहिक प्रयास और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा ही इस संकट का स्थायी हल है।

मुख्य बातें

FAO के अनुसार दुनिया में 64 करोड़ लोग भूख से पीड़ित हैं और 2.69 अरब लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं।
विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम है — 'आज नवाचार करें, कल को समृद्ध बनाएं' ।
संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन खाद्य असुरक्षा को और गहरा कर रहे हैं।
डिजिटल तकनीक, बेहतर बीज और परंपरागत कृषि ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना ज़रूरी बताया गया।
सरकारें, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थान और समुदाय — सभी की साझा भागीदारी अनिवार्य।
भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए पानी, उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा आवश्यक।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आँकड़ों के अनुसार, दुनिया में लगभग 64 करोड़ लोग आज भी भूख का सामना कर रहे हैं और 2.69 अरब लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं — यह तब है जब वैश्विक स्तर पर खाद्य उत्पादन हर व्यक्ति का पेट भरने के लिए पर्याप्त है। 16 अक्टूबर 2026 को मनाए जा रहे विश्व खाद्य दिवस पर FAO ने स्पष्ट किया कि समस्या अनाज की कमी नहीं, बल्कि उसकी पहुँच और वितरण व्यवस्था की है।

विश्व खाद्य दिवस 2026 का संदेश

इस वर्ष विश्व खाद्य दिवस की थीम है — 'आज नवाचार करें, कल को समृद्ध बनाएं।' FAO का यह संदेश उन व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने पर केंद्रित है जो एक साथ दो लक्ष्य पूरे करें: आज की पीढ़ी को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना। यह ऐसे समय में आया है जब संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन ने खाद्य असुरक्षा को और गंभीर बना दिया है।

भूख और कुपोषण की असली जड़

FAO के अनुसार, संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन इस संकट के तीन प्रमुख कारण हैं। गौरतलब है कि दुनिया में खाद्य पदार्थों की भौतिक उपलब्धता पर्याप्त है, परंतु वित्तीय और भौगोलिक बाधाएँ करोड़ों लोगों को पौष्टिक थाली से दूर रखती हैं। इसीलिए FAO का जोर केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खाद्य व्यवस्था के हर स्तर को सुधारने पर है।

नवाचार की भूमिका — खेत से थाली तक

तकनीक की मदद से खेती, भंडारण, परिवहन और बाज़ार तक पहुँच में आमूलचूल बदलाव संभव है। किसानों को डिजिटल माध्यम से मौसम, फसल और कृषि-प्रबंधन की जानकारी देना, बेहतर बीज, नई कृषि तकनीक और जल-भूमि का कुशल उपयोग — ये सभी उत्पादन और वितरण दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

साथ ही, पारंपरिक खेती के अनुभव को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना भी ज़रूरी बताया गया है। किसान, मछुआरे, पशुपालक और वन समुदाय अपनी स्थानीय जानकारी से खाद्य व्यवस्था को और मज़बूत बना सकते हैं। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को इस दिशा में नए अवसर पैदा करने वाली बताया गया है।

सरकार, निजी क्षेत्र और समाज की साझी ज़िम्मेदारी

FAO का स्पष्ट मत है कि भूख और कुपोषण से निपटना किसी एक संस्था की ज़िम्मेदारी नहीं। सरकारें कृषि अनुसंधान में निवेश, ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के विकास और किसान-हितैषी नीतियों के ज़रिये योगदान दे सकती हैं। निजी क्षेत्र खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने, रोज़गार सृजन और नए व्यापार मॉडल के ज़रिये भूमिका निभा सकता है।

शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों पर भी यह दायित्व है कि वे नई तकनीकों और शोध को सीधे खेतों तक पहुँचाएँ, ताकि किसानों को व्यावहारिक लाभ मिले।

दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा — प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा अनिवार्य

खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल आज का भोजन उपलब्ध कराना नहीं है। FAO के अनुसार, भविष्य के लिए पर्याप्त पानी, उपजाऊ भूमि और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। जलवायु संकटों से निपटने की तैयारी और संसाधनों का ज़िम्मेदारीपूर्ण उपयोग — ये दोनों मिलकर एक टिकाऊ खाद्य व्यवस्था की नींव बनाते हैं। यह लड़ाई पीढ़ियों की है और इसकी शुरुआत आज के नवाचार से होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

वितरण और राजनीतिक इच्छाशक्ति की विफलता है। 'नवाचार' का नारा तब तक खोखला है जब तक उसे छोटे किसानों, महिलाओं और हाशिये के समुदायों तक पहुँचाने की ठोस योजना न हो। भारत जैसे देश में जहाँ एक ओर खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन है और दूसरी ओर कुपोषण दर अभी भी चिंताजनक है, यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं के लिए सीधी चुनौती है। असली परीक्षण यह है कि क्या तकनीक और साझेदारी की बातें ज़मीनी बदलाव में बदलती हैं — या हर साल एक दिन मनाकर इति श्री हो जाती है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम क्या है?
विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम है — 'आज नवाचार करें, कल को समृद्ध बनाएं।' इसका उद्देश्य ऐसी खाद्य व्यवस्थाएँ विकसित करना है जो आज लोगों को पौष्टिक भोजन दें और भविष्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों को भी सुरक्षित रखें।
FAO के अनुसार दुनिया में कितने लोग भूख से पीड़ित हैं?
FAO के अनुसार दुनिया में लगभग 64 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि 2.69 अरब लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं। यह स्थिति तब है जब वैश्विक खाद्य उत्पादन हर व्यक्ति का पेट भरने के लिए पर्याप्त है।
खाद्य असुरक्षा के मुख्य कारण क्या हैं?
FAO के मुताबिक संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन खाद्य असुरक्षा के तीन प्रमुख कारण हैं। इनके चलते भोजन की भौतिक उपलब्धता होने के बावजूद करोड़ों लोगों तक पौष्टिक आहार नहीं पहुँच पाता।
खाद्य संकट दूर करने में नवाचार कैसे मदद कर सकता है?
तकनीक की सहायता से खेती, भंडारण, परिवहन और बाज़ार तक पहुँच में सुधार संभव है। किसानों को डिजिटल माध्यम से मौसम और फसल की जानकारी, बेहतर बीज, नई कृषि तकनीक और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर उत्पादन व वितरण दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।
दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ज़रूरी है?
FAO के अनुसार भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त पानी, उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा अनिवार्य है। जलवायु संकटों से निपटने की तैयारी और संसाधनों का ज़िम्मेदारीपूर्ण उपयोग, सरकारों-निजी क्षेत्र-समुदायों की साझा भागीदारी के साथ, एक टिकाऊ खाद्य व्यवस्था की बुनियाद बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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