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करवा चौथ 2026: निर्जला व्रत इन 7 स्थितियों में हो सकता है खतरनाक, जानें कौन न रखे व्रत

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करवा चौथ 2026: निर्जला व्रत इन 7 स्थितियों में हो सकता है खतरनाक, जानें कौन न रखे व्रत

सारांश

करवा चौथ 2026 का निर्जला व्रत 29 अक्टूबर को है, लेकिन गर्भवती, स्तनपान कराने वाली, मधुमेह, हृदय और किडनी रोगी, एनीमिया पीड़ित तथा हालिया सर्जरी से उबर रही महिलाओं के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के यह व्रत स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

मुख्य बातें

करवा चौथ 2026 का निर्जला व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
गर्भवती महिलाओं को डिहाइड्रेशन और कमज़ोरी के जोखिम के कारण डॉक्टर से सलाह लेना अनिवार्य है।
स्तनपान कराने वाली माताओं , डायबिटीज , हृदय रोग और किडनी रोग से पीड़ित महिलाओं के लिए निर्जला व्रत जोखिम भरा हो सकता है।
लो ब्लड प्रेशर , एनीमिया या बार-बार चक्कर आने की समस्या वाली महिलाओं को बेहोशी का खतरा रहता है।
मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव या तेज़ दर्द होने पर व्रत से बचने की सलाह दी जाती है।
कैंसर या हाल की सर्जरी से उबर रही महिलाओं को बिना चिकित्सकीय अनुमति के व्रत नहीं रखना चाहिए।

करवा चौथ 2026 का निर्जला व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुछ विशेष शारीरिक अवस्थाओं में यह निर्जला व्रत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी ज़रूरी

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को निरंतर पर्याप्त पोषण और जल की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और गंभीर कमज़ोरी जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिनका प्रभाव माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श लेना चाहिए।

स्तनपान कराने वाली माताएँ भी रहें सतर्क

जो महिलाएं अपने नवजात या छोटे बच्चे को स्तनपान करा रही हैं, उनके शरीर को इस दौरान अतिरिक्त तरल पदार्थ और पोषण की दरकार होती है। लंबे समय तक पानी न पीने से ऐसी माताओं को थकान, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन की शिकायत हो सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस अवस्था में माँ और शिशु की सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

डायबिटीज, हृदय और किडनी रोगियों के लिए जोखिम

मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित महिलाओं के लिए — विशेषकर जो इंसुलिन या ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवाएं लेती हैं — लंबे समय तक भूखे रहना लो ब्लड शुगर की स्थिति पैदा कर सकता है। कुछ परिस्थितियों में ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना भी संभव है। इसी तरह, हृदय रोग या किडनी की बीमारी से जूझ रही महिलाओं में लंबे समय तक निर्जला रहने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसी सभी महिलाओं के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के व्रत रखना उचित नहीं।

लो ब्लड प्रेशर, एनीमिया और मासिक धर्म की स्थिति में भी परहेज़ ज़रूरी

जिन महिलाओं को अक्सर चक्कर आते हैं, रक्तचाप कम रहता है या एनीमिया (खून की कमी) की समस्या है, उनके लिए निर्जला व्रत और अधिक जोखिम भरा हो सकता है। लंबे समय तक पानी और भोजन से वंचित रहने पर कमज़ोरी बढ़ सकती है और कुछ मामलों में बेहोशी की नौबत भी आ सकती है। मासिक धर्म के दौरान यदि अत्यधिक रक्तस्राव, तेज़ दर्द, चक्कर या गंभीर कमज़ोरी महसूस हो, तो निर्जला व्रत से बचना ही समझदारी है।

गंभीर बीमारी या हालिया सर्जरी के बाद बरतें एहतियात

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उबर रही महिलाओं या हाल ही में कोई बड़ी सर्जरी करवाने वाली महिलाओं को भी डॉक्टर की अनुमति के बिना निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसे समय में शरीर की रोग-प्रतिरोधक और पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए पर्याप्त जलयोजन और पोषण अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीज़न में स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर चिकित्सक समुदाय की ओर से बार-बार सतर्क रहने की अपील की जाती है। आस्था और परंपरा का सम्मान करते हुए स्वास्थ्य की अनदेखी न करें — यही सही संतुलन है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सामाजिक दबाव में कई महिलाएं जोखिम उठाते हुए व्रत रखती हैं। गर्भवती और गंभीर रोगग्रस्त महिलाओं के लिए 'आस्था बनाम सेहत' की यह दुविधा वास्तविक है — और इसका समाधान परंपरा को नकारने में नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने में है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है, जो इस बहस को और प्रासंगिक बनाता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ 2026 का व्रत किस दिन है?
करवा चौथ 2026 का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं।
गर्भावस्था में करवा चौथ का निर्जला व्रत रखना सुरक्षित है?
गर्भावस्था में निर्जला व्रत रखने से डिहाइड्रेशन, चक्कर और कमज़ोरी जैसी समस्याएँ हो सकती हैं, जो माँ और शिशु दोनों के लिए हानिकारक हो सकती हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
डायबिटीज की मरीज़ महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?
मधुमेह से पीड़ित महिलाएं, विशेषकर जो इंसुलिन या ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवाएं लेती हैं, उनमें लंबे समय तक उपवास से लो ब्लड शुगर का खतरा रहता है। ऐसी महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
कौन-सी स्वास्थ्य स्थितियाँ निर्जला व्रत के लिए जोखिम भरी हैं?
गर्भावस्था, स्तनपान, डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, एनीमिया, कैंसर और हाल की सर्जरी — ये सभी स्थितियाँ निर्जला व्रत के लिए जोखिम भरी हो सकती हैं। इनमें से किसी भी स्थिति में डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।
मासिक धर्म के दौरान करवा चौथ का व्रत रखें या नहीं?
मासिक धर्म के दौरान व्रत रखना महिला की शारीरिक स्थिति और धार्मिक परंपराओं पर निर्भर करता है। यदि इस दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, तेज़ दर्द, चक्कर या गंभीर कमज़ोरी हो, तो निर्जला व्रत से बचना ही उचित है।
राष्ट्र प्रेस
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