ईडी अधिकारी की गाड़ी पर हमला: वृंदा करात बोलीं — विरोध अपने आप उभरा, छापा राजनीतिक था
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) — की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने 28 मई 2026 को केरल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की गाड़ी पर हुए कथित हमले को लेकर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तिरुवनंतपुरम में पिनाराई विजयन के आवास के बाहर हुई यह घटना किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा नहीं, बल्कि ईडी की राजनीतिक रूप से प्रेरित छापेमारी के खिलाफ युवाओं का स्वतःस्फूर्त विरोध था।
छापेमारी पर करात का आरोप
करात ने कहा कि सीपीएम नेता पिनाराई विजयन के घरों और दफ्तरों पर ईडी की छापेमारी को अधिकांश लोगों ने राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम माना है। उनके अनुसार, इस छापे का उद्देश्य विपक्ष के एक बड़े नेता को धमकाना, डराना और अपमानित करना था। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सीपीएम नेताओं ने नहीं, बल्कि अन्य दलों के नेताओं ने भी इसे राजनीतिक हमला करार दिया है।
हमला सुनियोजित नहीं था: करात का तर्क
करात ने तर्क दिया कि यदि यह पूर्वनियोजित हमला होता, तो पूरे केरल में ईडी की टीमों को एक जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता। उन्होंने कहा, 'यह बात साफ तौर पर दिखाती है कि यह युवाओं की ओर से विरोध जताने का एक अपने आप उभरा हुआ तरीका था।' करात के मुताबिक, ईडी इसे सोची-समझी साजिश बताकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
भाजपा और ईडी पर सीधा निशाना
करात ने आरोप लगाया कि ईडी, भाजपा के साथ मिलकर काम कर रही है। उनका कहना था कि भाजपा केरल में कांग्रेस के कुछ नेताओं के माध्यम से सीपीआई (एम) के नेतृत्व को कमज़ोर करने और उसकी छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह रणनीति कामयाब नहीं होगी, क्योंकि सीपीआई (एम) ने अतीत में भी कई चुनौतियों का सामना किया है।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार की जाँच एजेंसियों और विपक्ष-शासित राज्यों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अब केरल में ईडी की कार्रवाइयों को विपक्षी दलों ने बार-बार राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। करात का यह बयान उसी व्यापक विमर्श का हिस्सा है जिसमें विपक्ष केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाता रहा है।
आगे क्या होगा
ईडी अधिकारी की गाड़ी पर हमले को लेकर कानूनी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। सीपीआई (एम) का कहना है कि वह इस पूरे मामले में कानूनी और राजनीतिक, दोनों मोर्चों पर अपना पक्ष रखेगी। करात ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेगी।