28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल हाईकोर्ट का आदेश: मोनालिसा को कोच्चि से बाहर नहीं ले जा सकती मध्य प्रदेश पुलिस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल हाईकोर्ट का आदेश: मोनालिसा को कोच्चि से बाहर नहीं ले जा सकती मध्य प्रदेश पुलिस

सारांश

केरल हाईकोर्ट ने कुंभ मेला वायरल स्टार मोनालिसा को कोच्चि से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी है। NCST के निर्देशों के बावजूद अदालत ने स्पष्ट किया कि महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले करने के लिए पहले न्यायालय की अनुमति ज़रूरी होगी।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को आदेश दिया कि मोनालिसा को अदालत की अनुमति के बिना कोच्चि से बाहर नहीं ले जाया जाए।
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने महिला की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने केरल पुलिस को महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले करने को कहा था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाई।
मोनालिसा के वकील का दावा — विवाह के समय उनकी उम्र 18 वर्ष और 3 महीने थी; मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्दीकरण को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
महिला को पहली बार जून 2026 में पुलिस सुरक्षा मिली थी; अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित।

केरल हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को 'कुंभ मेला वायरल स्टार' के नाम से चर्चित महिला मोनालिसा की सुरक्षा के मामले में अहम हस्तक्षेप किया। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध या हाईकोर्ट की अनुमति के बिना कोच्चि शहर की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जाए। यह आदेश उस समय आया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने केरल पुलिस को महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले करने के निर्देश दिए थे।

मामले की पृष्ठभूमि

जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने पुलिस सुरक्षा की माँग करने वाली मोनालिसा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। NCST ने एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर संज्ञान लिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मोहम्मद फरमान से विवाह के समय महिला नाबालिग थी। हालाँकि, मोनालिसा के वकील ने अदालत में दलील दी कि विवाह के समय उनकी मुवक्किल की उम्र 18 वर्ष और 3 महीने थी।

जन्म प्रमाण पत्र विवाद

मोनालिसा के वकील ने यह भी दावा किया कि बाद में उनकी जानकारी के बिना उनका मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया गया। उस रद्दीकरण को पहले ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। वकील ने यह भी तर्क दिया कि यदि महिला को मध्य प्रदेश वापस भेजा गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है।

अदालत के निर्देश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला फिलहाल अदालत की सुरक्षा में है, इसलिए उसे किसी के भी हवाले करने के लिए न्यायालय की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी। जस्टिस थॉमस ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस तभी सुरक्षा दे सकती है जब उसे महिला के ठिकाने की जानकारी हो। अदालत ने यह भी कहा कि यदि महिला छिपकर रहती है तो सुरक्षा देना कठिन होगा। NCST ने भी अपने निर्देश में कहा था कि उन्हें लागू करने से पहले हाईकोर्ट से उचित अनुमति ली जाए।

सुरक्षा का इतिहास

गौरतलब है कि महिला को पहली बार जून 2026 में हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस सुरक्षा मिली थी। बाद में पुलिस के यह बताने पर कि वे महिला का पता नहीं लगा पा रहे, अंतरिम सुरक्षा कुछ समय के लिए वापस ले ली गई थी। पिछले सप्ताह जब मोनालिसा स्वयं सुरक्षा की माँग लेकर अदालत पहुँचीं, तब सुरक्षा पुनः बहाल की गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भी महिला को तत्काल खतरा महसूस हो, वह नियुक्त महिला सुरक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकती हैं।

आगे की सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित है। यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जनजातीय अधिकार संरक्षण और न्यायिक निगरानी के जटिल संगम का उदाहरण बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि तीन संस्थाओं — राज्य पुलिस, केंद्रीय आयोग और उच्च न्यायालय — के बीच अधिकार-क्षेत्र की खींचतान का भी है। NCST का हस्तक्षेप जनजातीय संरक्षण की दृष्टि से उचित हो सकता है, लेकिन जब आयोग स्वयं हाईकोर्ट की अनुमति लेने की बात करे, तो यह स्पष्ट है कि प्रक्रियागत समन्वय की कमी है। जन्म प्रमाण पत्र रद्दीकरण का विवाद इस पूरे मामले की जड़ में है — और जब तक वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अनिर्णीत है, तब तक किसी भी पक्ष का दावा अधूरा है। अदालत का यह कदम महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन असली सवाल यह है कि दस्तावेज़ी सत्य कब और कहाँ स्थापित होगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाईकोर्ट ने मोनालिसा के मामले में क्या आदेश दिया?
केरल हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2026 को आदेश दिया कि कुंभ मेला वायरल स्टार मोनालिसा को उनकी इच्छा के विरुद्ध या अदालत की अनुमति के बिना कोच्चि शहर की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जाए। साथ ही केरल पुलिस को बिना हाईकोर्ट की अनुमति के महिला को मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले करने से रोका गया।
NCST ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए केरल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि मोनालिसा को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए मध्य प्रदेश पुलिस के हवाले किया जाए। आयोग ने यह भी कहा था कि इससे पहले हाईकोर्ट से अनुमति ली जाए।
मोनालिसा के जन्म प्रमाण पत्र का विवाद क्या है?
मोनालिसा के वकील का दावा है कि उनकी मुवक्किल के मूल जन्म प्रमाण पत्र को बाद में उनकी जानकारी के बिना रद्द कर दिया गया। इस रद्दीकरण को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहले ही चुनौती दी जा चुकी है और मामला वहाँ अनिर्णीत है।
मोनालिसा को पुलिस सुरक्षा कब से मिल रही है?
महिला को पहली बार जून 2026 में केरल हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस सुरक्षा दी गई थी। बाद में पुलिस के उनका पता न लगा पाने की रिपोर्ट के बाद अंतरिम सुरक्षा अस्थायी रूप से हटाई गई, और पिछले सप्ताह जब वह स्वयं अदालत पहुँचीं तो सुरक्षा पुनः बहाल की गई।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
केरल हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है। तब तक महिला को दी गई पुलिस सुरक्षा जारी रहेगी और उन्हें कोच्चि से बाहर नहीं ले जाया जा सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले