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केरल में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3 वर्षों में 5,991 मौतें, लोक निर्माण मंत्री ने विधानसभा को दी जानकारी

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केरल में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 3 वर्षों में 5,991 मौतें, लोक निर्माण मंत्री ने विधानसभा को दी जानकारी

सारांश

केरल में तीन वर्षों के दौरान हुई कुल सड़क दुर्घटना-मौतों में से आधी सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं — 11,697 में से 5,991। लोक निर्माण मंत्री का विधानसभा में स्वीकारोक्ति कि ओवरस्पीडिंग और नियम उल्लंघन मुख्य कारण हैं, लेकिन सड़कों की खामियाँ भी जिम्मेदार हैं।

मुख्य बातें

केरल में 2023 से 2025 के बीच कुल 11,697 सड़क दुर्घटना-मौतों में से 5,991 राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं।
लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने केरल विधानसभा में मंत्री कार्यालय के आँकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी।
तेज गति और यातायात नियमों का उल्लंघन सरकार द्वारा चिह्नित प्रमुख कारण हैं; सड़क खामियाँ भी आंशिक रूप से जिम्मेदार मानी गई हैं।
NATPAC के वैज्ञानिक अध्ययनों से दुर्घटना-प्रवण 'ब्लैक स्पॉट' चिह्नित किए गए हैं; संयुक्त निरीक्षण दल नियमित सर्वेक्षण करते हैं।
सुरक्षा उपायों में क्रैश बैरियर , वायर-रोप बैरियर , रंबल स्ट्रिप्स , सौर-चालित ब्लिंकर और रिफ्लेक्टिव साइनेज शामिल हैं।

केरल के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2023 से 2025 के बीच हुई सड़क दुर्घटनाओं में 5,991 लोगों की जान गई — जो इसी अवधि में राज्यभर में दर्ज कुल 11,697 दुर्घटना-मौतों का लगभग आधा हिस्सा है। लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने यह जानकारी केरल विधानसभा में विधायकों के प्रश्नों के उत्तर में दी, और मंत्री कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के आधार पर यह तथ्य सामने आए।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री बशीर ने विधानसभा को बताया कि तेज गति और यातायात नियमों का उल्लंघन सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सड़क निर्माण की खामियों से इन मौतों की पूरी व्याख्या नहीं की जा सकती। हालाँकि, मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि सड़कों की संरचनात्मक खामियाँ भी दुर्घटनाओं में योगदान करती हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर इतनी बड़ी संख्या में मौतें इस सवाल को फिर से उठाती हैं कि उच्च गति यातायात के लिए बनी इन सड़कों पर सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में सड़क सुरक्षा को लेकर नीतिगत बहस तेज है।

ब्लैक स्पॉट और वैज्ञानिक अध्ययन

सरकार ने राष्ट्रीय परिवहन योजना और अनुसंधान केंद्र (NATPAC) द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों के जरिये दुर्घटना-प्रवण स्थानों — जिन्हें 'ब्लैक स्पॉट' कहा जाता है — की पहचान की है। पुलिस, मोटर वाहन विभाग और सड़क प्रबंधन एजेंसियों के संयुक्त निरीक्षण दल इन स्थानों का नियमित सर्वेक्षण करते हैं।

इन निरीक्षणों का उद्देश्य दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करना और सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करना है। बशीर ने बताया कि सड़क पुनर्निर्माण के लिए अनुमान तैयार करने से पहले सड़क की स्थिति, उसका दुर्घटना-इतिहास और मौजूदा सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया जाता है।

सरकार के सुरक्षा उपाय

मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर खतरनाक 'ब्लैक स्पॉट' पर अस्थायी और स्थायी दोनों तरह के उपाय लागू किए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं:

सौर ऊर्जा-चालित ब्लिंकर, रंबल स्ट्रिप्स, स्पीड हंप, रिफ्लेक्टिव रोड साइन, रोड मार्किंग और रोड स्टड। खतरनाक मोड़ों तथा सड़क के मध्य में धातु के क्रैश बैरियर एवं वायर-रोप बैरियर भी स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि दुर्घटनाओं के जोखिम और गंभीरता को कम किया जा सके।

इंजीनियरिंग से परे की चुनौती

मंत्री के जवाब से स्पष्ट होता है कि सड़क सुरक्षा की समस्या केवल बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है। ओवरस्पीडिंग और यातायात नियमों का उल्लंघन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण बने हुए हैं, जिनसे निपटने के लिए सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है। बशीर ने यातायात नियमों के कड़े अनुपालन के साथ-साथ बेहतर सड़क डिज़ाइन पर भी जोर दिया।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर डिज़ाइन वाली सड़कों और जिम्मेदार ड्राइविंग — दोनों की एक साथ जरूरत है। केरल सरकार के सामने यह दोहरी चुनौती है कि वह ब्लैक स्पॉट पर तत्काल इंजीनियरिंग सुधार करे और साथ ही चालकों के व्यवहार में बदलाव के लिए प्रभावी अभियान चलाए। आँकड़े बताते हैं कि बिना दोनों मोर्चों पर एक साथ काम किए, मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाना कठिन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मौतें सड़क सुरक्षा नीति की गंभीर विफलता को रेखांकित करती हैं। मंत्री का यह कहना कि 'केवल सड़क की खामियाँ जिम्मेदार नहीं हैं' तथ्यात्मक तो हो सकता है, लेकिन यह उस सवाल से ध्यान भटकाता है कि क्या ब्लैक स्पॉट सुधार में देरी और बुनियादी ढाँचे में कमी के कारण मौतें बढ़ी हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से कहते आए हैं कि 'थ्री-ई' — इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट और एजुकेशन — सभी एक साथ लागू होने चाहिए, न कि एक को दूसरे पर दोष देकर छोड़ा जाए। जब तक जवाबदेही केवल चालकों पर डाली जाती रहेगी और बुनियादी ढाँचे की खामियों को व्यवस्थित रूप से दूर नहीं किया जाएगा, तब तक ये आँकड़े हर विधानसभा सत्र में दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कितनी सड़क दुर्घटना-मौतें हुईं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच केरल में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 5,991 लोगों की जान गई। यह इसी अवधि में राज्यभर में दर्ज कुल 11,697 सड़क दुर्घटना-मौतों का लगभग आधा हिस्सा है।
केरल में सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण क्या हैं?
लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने विधानसभा में बताया कि तेज गति (ओवरस्पीडिंग) और यातायात नियमों का उल्लंघन सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। मंत्री ने यह भी माना कि सड़कों की संरचनात्मक खामियाँ भी कुछ हद तक दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं।
केरल सरकार ने ब्लैक स्पॉट पर क्या कदम उठाए हैं?
NATPAC के वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर दुर्घटना-प्रवण ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। वहाँ सौर-चालित ब्लिंकर, रंबल स्ट्रिप्स, स्पीड हंप, रिफ्लेक्टिव साइनेज, क्रैश बैरियर और वायर-रोप बैरियर जैसे अस्थायी एवं स्थायी उपाय लागू किए जा रहे हैं।
यह जानकारी विधानसभा में कैसे सामने आई?
लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने केरल विधानसभा में विधायकों के प्रश्नों के उत्तर में मंत्री कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के आधार पर यह जानकारी साझा की। यह 15 अक्टूबर 2026 को सदन में दर्ज की गई।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाएँ रोकने के लिए आगे क्या होगा?
सरकार ने सड़क पुनर्निर्माण से पहले दुर्घटना-इतिहास और सुरक्षा जोखिमों का आकलन अनिवार्य किया है। विशेषज्ञों का मत है कि बुनियादी ढाँचे में सुधार के साथ-साथ यातायात कानूनों का कड़ा प्रवर्तन और जागरूकता अभियान — दोनों एक साथ जरूरी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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