केरल में 21 मौतें, IMD पर उठे सवाल: राजस्व मंत्री बोले — 'मौसम चेतावनी जारी करना राज्य के अधिकार में नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
केरल में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है और 7 लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच राज्य के राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने मंगलवार, 4 अगस्त को स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी चेतावनी जारी करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता — यह दायित्व पूरी तरह भारतीय मौसम विभाग (IMD) का है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चेतावनी प्रणाली की सटीकता और समयबद्धता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
पथानमथिट्टा, इडुक्की, कोट्टायम और केरल के उत्तरी जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। भारी वर्षा के कारण कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन और निवासियों के अनुसार, वास्तविक वर्षा का स्तर IMD के पूर्वानुमान से कहीं अधिक रहा।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब केरल में मानसूनी आपदाओं के दौरान मौसम पूर्वानुमान की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हों। 2018 और 2019 की बाढ़ के बाद भी चेतावनी प्रणाली में सुधार की माँग उठी थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री अनिल कुमार ने कहा, 'राज्य सरकार अपने स्तर पर मौसम चेतावनी जारी नहीं कर सकती। हमारी जिम्मेदारी केवल भारतीय मौसम विभाग के अलर्ट की सूचना लोगों तक पहुँचाने तक सीमित है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चेतावनी जारी करने में कोई चूक हुई है, तो उसकी जवाबदेही IMD की है, न कि राज्य सरकार की।
आपदा प्रबंधन में प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि बचाव, निकासी और राहत कार्य विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से समय पर संपन्न किए गए। अभियान के दौरान सामने आई शिकायतों का तत्काल समाधान किया गया।
IMD पर उठते सवाल
आलोचकों का कहना है कि मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और चेतावनी जारी होने के समय में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, भारी बारिश की तीव्रता का अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सका, जिससे समय पर निकासी में बाधा आई।
मंत्री ने भी माना कि मौजूदा चेतावनी प्रणाली में सुधार की जरूरत है, ताकि अधिक सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा सके। उनके अनुसार, बेहतर पूर्वानुमान से प्रशासन और आम जनता दोनों को ही खराब मौसम की घटनाओं के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।
आम जनता पर असर
पथानमथिट्टा, इडुक्की और कोट्टायम जिलों में हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से घर, सड़कें और कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा है। 7 लापता लोगों की तलाश में बचाव दल अभी भी अभियान जारी रखे हुए हैं।
क्या होगा आगे
यह मामला केंद्र-राज्य समन्वय और आपदा प्रबंधन ढाँचे पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। राज्य सरकार ने IMD के साथ मिलकर चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राज्यों को स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र मौसम निगरानी का अधिकार नहीं दिया जाता, तब तक इस तरह की जवाबदेही की खाई बनी रहेगी।