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केरल में 21 मौतें, IMD पर उठे सवाल: राजस्व मंत्री बोले — 'मौसम चेतावनी जारी करना राज्य के अधिकार में नहीं'

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केरल में 21 मौतें, IMD पर उठे सवाल: राजस्व मंत्री बोले — 'मौसम चेतावनी जारी करना राज्य के अधिकार में नहीं'

सारांश

केरल में 21 मौतों के बाद राज्य सरकार बचाव की मुद्रा में है — राजस्व मंत्री ने साफ कहा कि मौसम चेतावनी जारी करना राज्य का काम नहीं, IMD की जिम्मेदारी है। लेकिन सवाल यह है कि जब पूर्वानुमान चूकता है, तो नुकसान आम जनता उठाती है।

मुख्य बातें

केरल में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 21 लोगों की मौत , 7 लोग लापता ।
अनिल कुमार ने कहा — राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से मौसम चेतावनी जारी करने में सक्षम नहीं।
चेतावनी प्रणाली में किसी भी चूक की जिम्मेदारी भारतीय मौसम विभाग (IMD) की बताई गई।
सबसे अधिक प्रभावित जिले: पथानमथिट्टा, इडुक्की, कोट्टायम और उत्तरी केरल।
मंत्री ने आपदा प्रबंधन में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया; बचाव व राहत कार्य समय पर संपन्न होने का दावा।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार वास्तविक वर्षा का स्तर IMD के पूर्वानुमान से कहीं अधिक रहा।

केरल में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है और 7 लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा के बीच राज्य के राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने मंगलवार, 4 अगस्त को स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी चेतावनी जारी करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता — यह दायित्व पूरी तरह भारतीय मौसम विभाग (IMD) का है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चेतावनी प्रणाली की सटीकता और समयबद्धता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

पथानमथिट्टा, इडुक्की, कोट्टायम और केरल के उत्तरी जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। भारी वर्षा के कारण कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन और निवासियों के अनुसार, वास्तविक वर्षा का स्तर IMD के पूर्वानुमान से कहीं अधिक रहा।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब केरल में मानसूनी आपदाओं के दौरान मौसम पूर्वानुमान की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हों। 2018 और 2019 की बाढ़ के बाद भी चेतावनी प्रणाली में सुधार की माँग उठी थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री अनिल कुमार ने कहा, 'राज्य सरकार अपने स्तर पर मौसम चेतावनी जारी नहीं कर सकती। हमारी जिम्मेदारी केवल भारतीय मौसम विभाग के अलर्ट की सूचना लोगों तक पहुँचाने तक सीमित है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चेतावनी जारी करने में कोई चूक हुई है, तो उसकी जवाबदेही IMD की है, न कि राज्य सरकार की।

आपदा प्रबंधन में प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि बचाव, निकासी और राहत कार्य विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से समय पर संपन्न किए गए। अभियान के दौरान सामने आई शिकायतों का तत्काल समाधान किया गया।

IMD पर उठते सवाल

आलोचकों का कहना है कि मौसम पूर्वानुमान की सटीकता और चेतावनी जारी होने के समय में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, भारी बारिश की तीव्रता का अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सका, जिससे समय पर निकासी में बाधा आई।

मंत्री ने भी माना कि मौजूदा चेतावनी प्रणाली में सुधार की जरूरत है, ताकि अधिक सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा सके। उनके अनुसार, बेहतर पूर्वानुमान से प्रशासन और आम जनता दोनों को ही खराब मौसम की घटनाओं के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी।

आम जनता पर असर

पथानमथिट्टा, इडुक्की और कोट्टायम जिलों में हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से घर, सड़कें और कृषि भूमि को नुकसान पहुँचा है। 7 लापता लोगों की तलाश में बचाव दल अभी भी अभियान जारी रखे हुए हैं।

क्या होगा आगे

यह मामला केंद्र-राज्य समन्वय और आपदा प्रबंधन ढाँचे पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। राज्य सरकार ने IMD के साथ मिलकर चेतावनी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राज्यों को स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र मौसम निगरानी का अधिकार नहीं दिया जाता, तब तक इस तरह की जवाबदेही की खाई बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तकनीकी रूप से सही हो सकता है — लेकिन यह उस व्यापक विफलता से ध्यान हटाने की कोशिश भी है जो केंद्र-राज्य समन्वय की खामियों में छिपी है। 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी यही बहस हुई थी, और तब भी IMD व राज्य सरकार ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाली थी। असली सवाल यह है कि जब पूर्वानुमान चूकता है और 21 जानें जाती हैं, तो जवाबदेही की रेखा कहाँ खींची जाए। जब तक राज्यों को स्थानीय मौसम निगरानी में स्वायत्त भूमिका नहीं मिलती, यह जिम्मेदारी का खेल हर मानसून में दोहराता रहेगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में भारी बारिश से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
4 अगस्त तक भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है और 7 लोग अभी भी लापता हैं। पथानमथिट्टा, इडुक्की, कोट्टायम और उत्तरी केरल के जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं।
केरल सरकार ने IMD को जिम्मेदार क्यों ठहराया?
राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने कहा कि राज्य सरकार के पास स्वतंत्र रूप से मौसम चेतावनी जारी करने का अधिकार नहीं है — यह दायित्व पूरी तरह भारतीय मौसम विभाग (IMD) का है। इसलिए चेतावनी में किसी भी चूक की जिम्मेदारी IMD पर डाली गई।
क्या केरल सरकार अपनी मौसम चेतावनी जारी कर सकती है?
नहीं, राजस्व मंत्री के अनुसार राज्य सरकार IMD द्वारा जारी अलर्ट को लोगों तक पहुँचाने तक ही सीमित है। राज्य के पास स्वतंत्र मौसम पूर्वानुमान जारी करने का संवैधानिक या प्रशासनिक अधिकार नहीं है।
केरल में बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिले कौन से हैं?
पथानमथिट्टा, इडुक्की, कोट्टायम और राज्य के उत्तरी जिले इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। इन क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन से घर, सड़कें और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुँचा है।
मौसम चेतावनी प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार का क्या रुख है?
मंत्री अनिल कुमार ने माना कि मौजूदा चेतावनी प्रणाली में सुधार की जरूरत है ताकि अधिक सटीक और समय पर पूर्वानुमान मिल सके। उनके अनुसार, बेहतर पूर्वानुमान से प्रशासन और आम जनता दोनों को आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी में मदद मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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