20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोलकाता मेट्रो ऑरेंज लाइन: तीसरे चरण में ट्रैक बिछाने का काम पूरा, बेलेघाटा-आईटी सेंटर सेक्शन तैयार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोलकाता मेट्रो ऑरेंज लाइन: तीसरे चरण में ट्रैक बिछाने का काम पूरा, बेलेघाटा-आईटी सेंटर सेक्शन तैयार

सारांश

कोलकाता मेट्रो ऑरेंज लाइन के तीसरे चरण में बेलेघाटा से आईटी सेंटर सेक्शन पर ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो गया है। 1984 में देश की पहली मेट्रो शुरू करने वाले शहर का नेटवर्क अब 130 किलोमीटर तक विस्तार की राह पर है — दशकों की देरी के बाद रफ्तार पकड़ रहा है।

मुख्य बातें

कोलकाता मेट्रो ऑरेंज लाइन के तीसरे चरण — बेलेघाटा से आईटी सेंटर — पर 20 सितंबर 2026 को पुश ट्रॉली से निरीक्षण सफलतापूर्वक पूरा।
वायाडक्ट और बैलेस्टलेस ट्रैक का काम संपन्न; अब थर्ड रेल बिछाने और सिग्नल सिस्टम लगाने का काम शुरू होगा।
32 किलोमीटर लंबी ऑरेंज लाइन कोलकाता के दक्षिणी हिस्से को एयरपोर्ट से जोड़ेगी, न्यू टाउन आईटी हब से होकर।
परियोजना को 2010 में मंजूरी; पहले दो चरण पहले से चालू, यात्री सेवाएँ जारी।
कोलकाता मेट्रो नेटवर्क अभी 73 किलोमीटर ; अगले कुछ वर्षों में 130 किलोमीटर तक विस्तार का लक्ष्य।
2025-26 में 23.60 करोड़ यात्री , यानी प्रतिदिन औसतन 6.5 लाख — नेटवर्क विस्तार से और वृद्धि की संभावना।

कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन (कवि सुभाष–जय हिंद विमानबंदर कॉरिडोर) के तीसरे चरणबेलेघाटा से आईटी सेंटर सेक्शन — पर 20 सितंबर 2026 को पहली बार पुश ट्रॉली से निरीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जो इस 32 किलोमीटर लंबी परियोजना में एक अहम मील का पत्थर है। इस निरीक्षण के पूरा होने का सीधा अर्थ है कि इस सेक्शन पर वायाडक्ट और बैलेस्टलेस ट्रैक का निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है, और अब विद्युतीकरण का अगला चरण शुरू किया जा सकेगा।

तीसरे चरण में क्या हुआ पूरा

मेट्रो रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, बेलेघाटा-आईटी सेंटर सेक्शन पर वायाडक्ट और बैलेस्टलेस ट्रैक का काम मुकम्मल हो गया है। एक अधिकारी ने कहा, 'बेलेघाटा से आईटी सेंटर तक तीसरे चरण में पुश ट्रॉली से किया गया निरीक्षण बताता है कि काफी काम पूरा हो चुका है। इस चरण के चालू होने के बाद यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ेगी, क्योंकि इससे शहर का आईटी हब सीधे दक्षिणी इलाकों से जुड़ जाएगा।'

अब इस सेक्शन पर थर्ड रेल बिछाने और सिग्नल सिस्टम लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा। साथ ही, जल्द ही ऑटो ट्रेन रनिंग सिस्टम (ATRS) भी लगाया जाएगा, जो लाल सिग्नल पार होने पर स्वतः ट्रेन को रोक देता है — यहाँ तक कि मोटरमैन का ध्यान भटकने पर भी।

परियोजना की पृष्ठभूमि

कवि सुभाष–जय हिंद विमानबंदर मेट्रो परियोजना को वर्ष 2010 में मंजूरी मिली थी और इसे पाँच चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले दो चरण — कवि सुभाष से हेमंत मुखोपाध्याय और हेमंत मुखोपाध्याय से बेलेघाटा — पहले ही चालू हो चुके हैं और उन पर यात्री सेवाएँ संचालित हो रही हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता मेट्रो का मौजूदा नेटवर्क केवल करीब 73 किलोमीटर का है। गौरतलब है कि कोलकाता देश का पहला शहर था जहाँ 1984 में मेट्रो सेवा शुरू हुई थी, लेकिन बाद में मेट्रो शुरू करने वाले कई शहर नेटवर्क विस्तार में आगे निकल गए हैं। मेट्रो रेलवे का अब लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में नेटवर्क को कम से कम 130 किलोमीटर तक बढ़ाया जाए।

अन्य विस्तार योजनाएँ

पर्पल लाइन (जोका से एस्प्लेनेड) पर भी काम आगे बढ़ रहा है। बारानगर से बैरकपुर तक के हिस्से का निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, एयरपोर्ट से बारासात तक एक नई मेट्रो लिंक को फिर से शुरू किए जाने की संभावना है, जिससे जेसोर रोड पर यातायात का दबाव कम होगा।

कोलकाता नगर निगम ने हाल ही में बीटी रोड के नीचे से गुजरने वाली पानी की पाइपलाइन को स्थानांतरित करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर दिया है, जो कई वर्षों से लंबित था। यह NOC मिलने के बाद बीटी रोड के साथ वायाडक्ट निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

आम यात्रियों पर असर

वर्ष 2025-26 में मेट्रो रेलवे ने 23.60 करोड़ यात्रियों को सफर कराया, यानी औसतन प्रतिदिन करीब 6.5 लाख यात्री। ऑरेंज लाइन का तीसरा चरण शुरू होने के बाद न केवल यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि न्यू टाउन और साल्ट लेक स्थित आईटी हब तक पहुँच आसान होगी। बेहतर सार्वजनिक परिवहन के उपयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।

ऑरेंज लाइन के पूरी तरह चालू होने से कोलकाता के सुदूर दक्षिणी इलाके सीधे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़ जाएँगे — एक संपर्क जो लंबे समय से यात्रियों और उद्योग दोनों की माँग रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संदर्भ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — 2010 में मंजूर इस परियोजना को अब तक 16 वर्ष हो चुके हैं और अभी भी कई चरण शेष हैं। देश में 1984 में पहली मेट्रो चलाने वाला शहर आज नेटवर्क विस्तार में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से पीछे है — यह महज संयोग नहीं, बल्कि दशकों की भूमि अधिग्रहण अड़चनों, NOC विवादों और बजट देरी का परिणाम है। बीटी रोड पाइपलाइन NOC का कई वर्षों तक अटके रहना इसी व्यापक समस्या का प्रतीक है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या शेष चरण इसी गति से पूरे होंगे, या विद्युतीकरण और सिग्नलिंग के जटिल कार्य में फिर देरी होगी।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता मेट्रो ऑरेंज लाइन का तीसरा चरण क्या है?
तीसरा चरण बेलेघाटा से आईटी सेंटर (न्यू टाउन) तक का सेक्शन है, जो 32 किलोमीटर लंबी कवि सुभाष–जय हिंद विमानबंदर कॉरिडोर का हिस्सा है। इस पर 20 सितंबर 2026 को पुश ट्रॉली से निरीक्षण पूरा हुआ, जिसका अर्थ है ट्रैक और वायाडक्ट का काम संपन्न।
ऑरेंज लाइन का तीसरा चरण कब शुरू होगा?
ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन अब थर्ड रेल बिछाने और सिग्नल सिस्टम लगाने का काम बाकी है। यात्री सेवाओं के लिए सटीक तारीख अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है।
ऑरेंज लाइन यात्रियों के लिए क्यों अहम है?
यह लाइन कोलकाता के सुदूर दक्षिणी इलाकों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सीधे जोड़ेगी और न्यू टाउन-साल्ट लेक के आईटी हब से होकर गुजरेगी। इससे एयरपोर्ट कनेक्टिविटी और आईटी कर्मचारियों की दैनिक यात्रा काफी आसान होगी।
कोलकाता मेट्रो का अभी कितना नेटवर्क है और लक्ष्य क्या है?
वर्तमान में कोलकाता मेट्रो का नेटवर्क करीब 73 किलोमीटर का है। मेट्रो रेलवे का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में इसे कम से कम 130 किलोमीटर तक विस्तारित करना है, जिसमें ऑरेंज लाइन, पर्पल लाइन और बारानगर-बैरकपुर सेक्शन शामिल हैं।
कोलकाता मेट्रो में यात्री संख्या कितनी है?
वर्ष 2025-26 में कोलकाता मेट्रो ने 23.60 करोड़ यात्रियों को सफर कराया, यानी प्रतिदिन औसतन करीब 6.5 लाख यात्री। नेटवर्क विस्तार के साथ यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले