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केरल में जंगली हाथियों की मौत पर CBI जांच की मांग, 2005 से 2024 तक संख्या 5,135 से घटकर 1,793

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केरल में जंगली हाथियों की मौत पर CBI जांच की मांग, 2005 से 2024 तक संख्या 5,135 से घटकर 1,793

सारांश

केरल में दो दशकों में जंगली हाथियों की संख्या 5,135 से गिरकर 1,793 पर आ गई है — और पर्यावरण समूह अब CBI जाँच माँग रहे हैं। अवैध शिकार की आशंका, GIS मैपिंग में उभरे हॉटस्पॉट जिले और 744 मौतें सिर्फ छह वर्षों में — यह संकट अब नज़रअंदाज़ करने लायक नहीं रहा।

मुख्य बातें

केरल में जंगली हाथियों की संख्या 2005 में 5,135 से घटकर 2024 में 1,793 रह गई — लगभग 65% की गिरावट।
सरकारी विशेषज्ञ समिति ने अप्रैल 2019 से मार्च 2025 के बीच 744 हाथियों की मौत दर्ज की; वार्षिक औसत लगभग 124 मौतें ।
GIS मैपिंग के 1,196 रिकॉर्ड में से 72.5% मौतें पाँच जिलों — इडुक्की, एर्नाकुलम, पलक्कड़, वायनाड, मलप्पुरम — में केंद्रित।
पर्यावरण संगठनों ने CBI जाँच और केरल उच्च न्यायालय की निगरानी में विशेष दल गठन की माँग की।
हाथियों के दाँत मिलने से अवैध शिकार की आशंका; हाथी कॉरिडोर से अवरोध हटाने की माँग भी उठी।
वायनाड नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एन.
बदुशा ने 'वन स्पंदनम' बैठक की अध्यक्षता की।

केरल में पर्यावरण समूहों ने राज्य के जंगली हाथियों की लगातार हो रही मौतों की सीबीआई (CBI) जांच की माँग उठाई है। 'वन स्पंदनम' नामक तीन दिवसीय बैठक में पर्यावरण संगठनों और कार्यकर्ताओं ने हाल के वर्षों में हाथियों की संख्या में भारी गिरावट और मृत्यु दर के उच्च स्तर का हवाला देते हुए केरल उच्च न्यायालय की देखरेख में एक विशेष जाँच दल गठित करने की भी अपील की।

चिंताजनक आँकड़े: दो दशकों में आधी से भी कम रह गई संख्या

राज्य के वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 में केरल में अनुमानित 5,135 जंगली हाथी थे, जो 2023 तक घटकर 2,386 रह गए और 2024 में यह संख्या और सिकुड़कर महज 1,793 पर आ गई। यह गिरावट लगभग दो दशकों में 65 प्रतिशत से अधिक की है। हालाँकि वन विभाग का कहना है कि इस उतार-चढ़ाव का एक कारण केरल और पड़ोसी राज्यों के बीच हाथियों की आवाजाही भी हो सकती है।

मुख्य घटनाक्रम: 744 मौतें छह वर्षों में

सरकार द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने अप्रैल 2019 से मार्च 2025 के बीच केरल में 744 जंगली हाथियों की मौत दर्ज की, यानी हर वर्ष औसतन लगभग 124 मौतें। समिति ने वार्षिक मृत्यु दर 4.45 प्रतिशत से 6.2 प्रतिशत के बीच आँकी है।

एक अन्य रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, 2011 से 2026 के बीच 1,260 हाथियों की मौत दर्ज की गई, जिनमें प्राकृतिक और मानव-जनित दोनों कारणों से हुई मौतें शामिल हैं।

GIS मैपिंग से उजागर हुए हॉटस्पॉट जिले

हाथियों की मौत के रिकॉर्ड की हालिया GIS मैपिंग से एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौतों की अधिकता सामने आई है। मैप किए गए 1,196 रिकॉर्ड में से इडुक्की में 226, एर्नाकुलम में 203, पलक्कड़ में 152, वायनाड में 146 और मलप्पुरम में 140 रिकॉर्ड दर्ज हुए।

इन पाँच जिलों में कुल 867 रिकॉर्ड हैं, जो मैप की गई कुल मौतों का लगभग 72.5 प्रतिशत है। अकेले इडुक्की, एर्नाकुलम और पलक्कड़ में 581 रिकॉर्ड दर्ज हैं — यानी मैप किए गए कुल आँकड़ों का लगभग आधा।

अवैध शिकार की आशंका और माँगें

पर्यावरण समूहों का कहना है कि हाथियों के दाँत मिलने से अवैध शिकार की आशंका गहरी हो गई है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मौतों का सिलसिला जारी रहा, तो राज्य में जंगली हाथियों का दीर्घकालिक अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसके साथ ही हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा और उनके पारंपरिक आवागमन मार्गों से अवरोध हटाने की भी माँग की गई।

बैठक में इडुक्की के कलेक्टर डॉ. दिनेशान चेरुवट्ट द्वारा ऐसी रुकावटें हटाने के लिए की गई पहल की सराहना की गई। साथ ही, कलेक्टर को कथित तौर पर धमकी देने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग भी उठाई गई। वायनाड नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष एन. बदुशा ने इस बैठक की अध्यक्षता की।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब केरल पहले से ही मानव-हाथी संघर्ष और वन संरक्षण नीतियों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि CBI या उच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच नहीं हुई, तो जवाबदेही तय करना कठिन होगा। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और न्यायपालिका की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक प्रणालीगत विफलता की कहानी कहते हैं — दो दशकों में 65% की गिरावट और वन विभाग का यह जवाब कि 'आवाजाही भी एक कारण हो सकती है', जाँच की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। GIS मैपिंग में पाँच जिलों में 72.5% मौतें केंद्रित होना यह संकेत देता है कि यह समस्या यादृच्छिक नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से पैटर्नयुक्त है — जो स्थानीय कारकों जैसे अतिक्रमण, विषाक्तता या संगठित शिकार की ओर इशारा कर सकती है। जब तक जाँच का दायरा CBI या न्यायिक निगरानी तक नहीं फैलता, राज्य के वन तंत्र की आंतरिक जाँच पर्याप्त जवाबदेही नहीं दे पाएगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में जंगली हाथियों की संख्या कितनी घट गई है?
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 में केरल में 5,135 जंगली हाथी थे, जो 2024 तक घटकर 1,793 रह गए — यानी लगभग दो दशकों में 65% से अधिक की गिरावट। हालाँकि विभाग का कहना है कि इस उतार-चढ़ाव में पड़ोसी राज्यों से आवाजाही का भी योगदान हो सकता है।
पर्यावरण समूहों ने CBI जाँच की माँग क्यों की है?
समूहों का कहना है कि छह वर्षों में 744 हाथियों की मौत, हाथियों के दाँत मिलने से अवैध शिकार की आशंका, और एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौतों की अधिकता से राज्य की आंतरिक जाँच पर्याप्त नहीं है। इसलिए CBI और केरल उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जाँच की माँग 'वन स्पंदनम' बैठक में उठाई गई।
केरल में हाथियों की सबसे ज़्यादा मौतें किन जिलों में हुई हैं?
GIS मैपिंग के अनुसार, मैप किए गए 1,196 रिकॉर्ड में से इडुक्की (226), एर्नाकुलम (203), पलक्कड़ (152), वायनाड (146) और मलप्पुरम (140) में सर्वाधिक मौतें दर्ज हुई हैं। ये पाँच जिले मिलकर कुल मैप की गई मौतों का लगभग 72.5% हिस्सा हैं।
'वन स्पंदनम' बैठक में और क्या माँगें उठाई गईं?
बैठक में हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा, पारंपरिक आवागमन मार्गों से अवरोध हटाने और इडुक्की कलेक्टर डॉ. दिनेशान चेरुवट्ट को कथित तौर पर धमकी देने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग भी की गई। इडुक्की कलेक्टर की अवरोध हटाने की पहल की सराहना की गई।
केरल में हाथियों की मृत्यु दर कितनी है?
सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति के अनुसार, अप्रैल 2019 से मार्च 2025 के बीच हर साल औसतन लगभग 124 हाथियों की मौत हुई। वार्षिक मृत्यु दर 4.45 प्रतिशत से 6.2 प्रतिशत के बीच आँकी गई है, जो विशेषज्ञों के अनुसार दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए गंभीर रूप से ऊँची है।
राष्ट्र प्रेस
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