खान सर-रौशन आनंद विवाद से शिक्षा की साख को नुकसान: गुरु रहमान की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पटना के शैक्षणिक जगत में हलचल मचाने वाले खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग संचालक रौशन आनंद के बीच जारी विवाद पर वरिष्ठ शिक्षाविद् गुरु रहमान ने 8 जून को कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि कोचिंग संस्थानों के बीच यह खींचतान शिक्षा जगत की छवि को गहरी चोट पहुँचा रही है और इसकी सबसे बड़ी कीमत छात्रों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे इन विवादों से दूरी बनाकर केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।
दशकों में पहली बार ऐसी स्थिति
गुरु रहमान ने कहा कि अपने लंबे शैक्षणिक करियर में उन्होंने पटना के कोचिंग क्षेत्र में अनेक बदलाव देखे हैं, परंतु हाल के वर्षों में जो माहौल बना है, वैसा पहले कभी नहीं देखा। दो शिक्षकों के बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव ने पूरे शिक्षा तंत्र को प्रभावित किया है, जिसे उन्होंने 'दुखद और शर्मनाक' बताया।
उनके अनुसार, यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इन्हीं कोचिंग संस्थानों पर निर्भर हैं। ऐसे में शिक्षकों के आपसी विवाद न केवल छात्रों का ध्यान भटकाते हैं, बल्कि उनके मनोबल पर भी प्रतिकूल असर डालते हैं।
गुरु परंपरा पर कलंक
गुरु रहमान ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि अब शिक्षकों को 'कोचिंग माफिया' जैसे शब्दों से संबोधित किया जा रहा है। उनका कहना है कि भारत में गुरु की परंपरा सदैव सम्मानित रही है, लेकिन वर्तमान विवाद ने 'गुरु' शब्द को कलंकित कर दिया है। उन्होंने कहा कि गुरु की अवधारणा को लेकर जिस तरह की बहस और आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं, वे शिक्षा जगत के लिए घातक संकेत हैं।
कानूनी कार्रवाई की माँग का समर्थन
विवाद में निष्पक्ष जाँच की माँग का समर्थन करते हुए गुरु रहमान ने कहा कि यदि किसी ने गलती की है तो उसके विरुद्ध पारदर्शी जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई भी। उनका मत है कि व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रौशन आनंद पर आरोप सिद्ध हुए और वे जेल गए; अब खान सर के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है, तो कानून को समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार, कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी को भी विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए।
छात्रों से अपील
गुरु रहमान ने छात्रों को सीधे संदेश देते हुए कहा कि वे 'जिंदाबाद-मुर्दाबाद' के नारों और कोचिंग विवादों से खुद को दूर रखें। उनका मानना है कि नकारात्मक माहौल से प्रभावित हुए बिना केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान देने वाले छात्र ही जीवन में आगे बढ़ सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
गौरतलब है कि पटना का कोचिंग उद्योग देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जाना जाता है और यहाँ के विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का त्वरित और निष्पक्ष समाधान न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि पटना की शैक्षणिक साख को बचाने के लिए भी ज़रूरी है।