किश्तवाड़ में 14 वर्षीय नाबालिग की मौत: उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला ने जताया आक्रोश, टीचर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने किश्तवाड़ जिले के छत्रू की एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की की मौत पर गहरा दुख और तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। लड़की की मृत्यु डोडा जिले रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में हो गई, जब उसे गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन (MTP) के लिए ले जाया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक सरकारी स्कूल शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, किश्तवाड़ की रहने वाली इस 14 वर्षीय नाबालिग को प्रेगनेंसी के मेडिकल टर्मिनेशन के लिए किश्तवाड़ से डोडा जिले रेफर किया गया था। डोडा पहुँचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी स्कूल शिक्षक उस अपराध के लिए जिम्मेदार था जिसके परिणामस्वरूप अंततः लड़की की जान गई। गर्भावस्था, मृत्यु और मामले के अन्य पहलुओं से जुड़ी परिस्थितियों की जाँच जारी है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रतिक्रिया
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। पार्टी ने कहा, 'एक बच्ची के साथ कथित यौन शोषण घिनौना, भयावह और पूरी तरह से अस्वीकार्य अपराध है।' दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले एक सरकारी शिक्षक की इसमें कथित भूमिका इस घटना को और भी अधिक निंदनीय बनाती है।
न्याय और जाँच की माँग
उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला ने मामले के हर पहलू की गहन, निष्पक्ष और समयबद्ध जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जानी चाहिए। दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि हर बच्चे की सुरक्षा, सम्मान और बचाव के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।
आरोपी शिक्षक और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने मामले में एक सरकारी स्कूल शिक्षक को गिरफ्तार किया है, जिसके खिलाफ संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पुलिस के बयान के अनुसार, जाँच में गर्भावस्था की परिस्थितियों, मृत्यु के कारणों और मामले के अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में बच्चों की सुरक्षा और पॉक्सो कानून के क्रियान्वयन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जाँच निष्पक्ष और तेज गति से आगे बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी दबाव बढ़ा है कि मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता सरकार ने सार्वजनिक रूप से दोहराई है।