किश्तवाड़ रेप-हत्या कांड: SIT ने मुख्य आरोपी सरकारी टीचर समेत तीन को दबोचा, कुल 5 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने किश्तवाड़ जिले में 15 वर्षीय आदिवासी नाबालिग के साथ बलात्कार और उसकी मौत के मामले में मुख्य आरोपी सरकारी स्कूल शिक्षक समेत तीन और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या पाँच हो गई है। 20 अगस्त को छत्रू इलाके में कथित गर्भपात की कोशिश के बाद नाबालिग की मौत हो गई थी।
मुख्य आरोपी और गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान
किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नरेश सिंह ने बताया कि नवीनतम गिरफ्तारियों में मुख्य आरोपी सरकारी स्कूल शिक्षक शामिल है, जिस पर नाबालिग के साथ बार-बार यौन शोषण का आरोप है। दो अन्य गिरफ्तार संदिग्धों की पहचान मोहम्मद इशाक और रियाज अहमद शेख के रूप में हुई है — ये शिक्षक के भाई बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, जिला अस्पताल किश्तवाड़ में कार्यरत एक दिहाड़ी सफाईकर्मी को भी गिरफ्तार किया गया है, हालाँकि उसकी आधिकारिक पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पुलिस के अनुसार, आरोप है कि शिक्षक ने कई महीनों तक नाबालिग का बार-बार यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। जाँच में यह भी सामने आया है कि शिक्षक ने अपने भाई के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और गर्भ गिराने के लिए दवाएँ दीं।
घटनाक्रम: कैसे सामने आया मामला
छत्रू पुलिस को 20 अगस्त को लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना मिली। प्रारंभ में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी, लेकिन पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू की। SSP नरेश सिंह के अनुसार, 'जाँच के दौरान ऐसे सबूत सामने आए जिनसे गंभीर अपराध होने का पता चला।' इसके बाद मामले को छत्रू पुलिस स्टेशन में औपचारिक एफआईआर में बदला गया।
लड़की को पहले छत्रू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, जहाँ से आरोपियों ने उसे जिला अस्पताल किश्तवाड़ पहुँचाया। पुलिस का आरोप है कि अस्पताल का सफाईकर्मी भी इस साजिश में शामिल था और अस्पताल में लड़की का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया।
कानूनी धाराएँ और SIT का गठन
यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं — जिनमें बलात्कार और गर्भपात के कारण मौत शामिल है — के तहत दर्ज किया गया है। इसके साथ ही यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए किश्तवाड़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप सिंह की अध्यक्षता में SIT गठित की गई है। इस टीम में DSP नीतीश शर्मा, छत्रू SHO इंस्पेक्टर ऋषि कुमार और अन्य अधिकारी शामिल हैं। SSP ने कहा कि 'जाँच निष्पक्ष, बिना किसी भेदभाव के, पेशेवर, वैज्ञानिक और सबूतों के आधार पर की जा रही है।'
सामाजिक प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय संस्थाओं का हस्तक्षेप
इस मामले ने किश्तवाड़ में व्यापक जन आक्रोश उत्पन्न किया है। किश्तवाड़ की जामा मस्जिद के स्थानीय इमाम ने गुरुवार को जिले में पूर्ण बंद का आह्वान किया, जिसे वकीलों और हिंदू धार्मिक संगठनों सहित अनेक संगठनों का समर्थन मिला। यह एकजुटता इस बात का संकेत है कि मामला सांप्रदायिक सीमाओं से परे सामाजिक न्याय का सवाल बन गया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और किश्तवाड़ के SSP को नोटिस जारी कर पाँच दिनों के भीतर जवाब माँगा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जवाब न मिलने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जा सकता है।
आगे क्या होगा
SSP नरेश सिंह ने संकेत दिया है कि जाँच में और सबूत मिलने पर अतिरिक्त गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं। SIT को मामले के सभी पहलुओं की गहन, वैज्ञानिक और समयबद्ध जाँच का निर्देश दिया गया है। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी नाबालिगों की सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर बहस को नई धार दे रहा है।