किश्तवाड़: गर्भपात रेफरल के दौरान 14 वर्षीय नाबालिग की मौत, स्कूल शिक्षक गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 21 अगस्त को एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की की मौत हो गई, जब उसे गर्भावस्था की चिकित्सीय समाप्ति (MTP) के लिए डोडा जिले रेफर किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक स्कूल शिक्षक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसी के कारण नाबालिग गर्भवती हुई थी।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, खत्रू इलाके की रहने वाली यह नाबालिग लड़की किश्तवाड़ से डोडा जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ गई। गिरफ्तार शिक्षक के विरुद्ध संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
पुलिस ने बयान में कहा, "गर्भावस्था, लड़की की मौत और मामले के अन्य पहलुओं से जुड़े हालात का पता लगाने के लिए आगे की जाँच जारी है।" अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षक उस अपराध में शामिल था जिसके कारण नाबालिग गर्भवती हुई।
समुदाय में आक्रोश
इस घटना की खबर फैलते ही जम्मू डिवीजन के दूरस्थ किश्तवाड़ जिले में सदमे और आक्रोश की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने इसे एक जघन्य अपराध करार दिया और दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की।
जम्मू-कश्मीर में बाल अपराध के आँकड़े
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्यसभा में मॉनसून सत्र के दौरान पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2024 में बच्चों के विरुद्ध अपराध के 887 मामले दर्ज हुए। इनमें से 444 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि वर्ष के अंत तक 537 मामलों की जाँच लंबित थी।
आँकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में 2024 में सजा दिलाने की दर मात्र 9.4 प्रतिशत रही, जबकि वर्ष के अंत तक बाल अपराध से संबंधित 2,517 मामलों में ट्रायल लंबित था। गौरतलब है कि 2022 में 920 मामले, 2023 में 910 मामले और 2024 में 887 मामले दर्ज हुए — यानी संख्या में मामूली गिरावट के बावजूद सजा दिलाने की दर चिंताजनक रूप से निम्न बनी हुई है।
2022 में सजा दिलाने की दर 11.7 प्रतिशत थी, 2023 में यह घटकर 8.7 प्रतिशत रह गई और 2024 में 9.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि बाल यौन अपराध के मामलों में त्वरित न्याय एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्या होगा आगे
पुलिस ने पुष्टि की है कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है। यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हैं। न्यायिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार शिक्षक को अदालत में पेश किया जाएगा, और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संबंधित धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा।