21 अगस्त 2026
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किश्तवाड़: गर्भपात रेफरल के दौरान 14 वर्षीय नाबालिग की मौत, स्कूल शिक्षक गिरफ्तार

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किश्तवाड़: गर्भपात रेफरल के दौरान 14 वर्षीय नाबालिग की मौत, स्कूल शिक्षक गिरफ्तार

सारांश

किश्तवाड़ में एक 14 वर्षीय नाबालिग की गर्भपात रेफरल के दौरान मौत ने पूरे जिले को हिला दिया। पुलिस ने स्कूल शिक्षक को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर इस अपराध का मुख्य आरोपी है। जम्मू-कश्मीर में 2024 में बाल अपराध की सजा दर महज 9.4% रही।

मुख्य बातें

किश्तवाड़ की 14 वर्षीय नाबालिग लड़की की मौत 21 अगस्त को गर्भपात के लिए डोडा रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में हुई।
पुलिस ने एक स्कूल शिक्षक को गिरफ्तार किया; उस पर आरोप है कि उसी के कारण नाबालिग गर्भवती हुई।
संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज; मामले की जाँच जारी है।
जम्मू-कश्मीर में 2024 में बच्चों के विरुद्ध अपराध के 887 मामले दर्ज, सजा दिलाने की दर केवल 9.4% ।
वर्ष के अंत तक 2,517 बाल अपराध मामलों में ट्रायल लंबित था।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 21 अगस्त को एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की की मौत हो गई, जब उसे गर्भावस्था की चिकित्सीय समाप्ति (MTP) के लिए डोडा जिले रेफर किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक स्कूल शिक्षक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसी के कारण नाबालिग गर्भवती हुई थी।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, खत्रू इलाके की रहने वाली यह नाबालिग लड़की किश्तवाड़ से डोडा जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ गई। गिरफ्तार शिक्षक के विरुद्ध संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

पुलिस ने बयान में कहा, "गर्भावस्था, लड़की की मौत और मामले के अन्य पहलुओं से जुड़े हालात का पता लगाने के लिए आगे की जाँच जारी है।" अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षक उस अपराध में शामिल था जिसके कारण नाबालिग गर्भवती हुई।

समुदाय में आक्रोश

इस घटना की खबर फैलते ही जम्मू डिवीजन के दूरस्थ किश्तवाड़ जिले में सदमे और आक्रोश की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने इसे एक जघन्य अपराध करार दिया और दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की।

जम्मू-कश्मीर में बाल अपराध के आँकड़े

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्यसभा में मॉनसून सत्र के दौरान पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2024 में बच्चों के विरुद्ध अपराध के 887 मामले दर्ज हुए। इनमें से 444 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि वर्ष के अंत तक 537 मामलों की जाँच लंबित थी।

आँकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में 2024 में सजा दिलाने की दर मात्र 9.4 प्रतिशत रही, जबकि वर्ष के अंत तक बाल अपराध से संबंधित 2,517 मामलों में ट्रायल लंबित था। गौरतलब है कि 2022 में 920 मामले, 2023 में 910 मामले और 2024 में 887 मामले दर्ज हुए — यानी संख्या में मामूली गिरावट के बावजूद सजा दिलाने की दर चिंताजनक रूप से निम्न बनी हुई है।

2022 में सजा दिलाने की दर 11.7 प्रतिशत थी, 2023 में यह घटकर 8.7 प्रतिशत रह गई और 2024 में 9.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि बाल यौन अपराध के मामलों में त्वरित न्याय एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

क्या होगा आगे

पुलिस ने पुष्टि की है कि मामले की विस्तृत जाँच जारी है। यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हैं। न्यायिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार शिक्षक को अदालत में पेश किया जाएगा, और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संबंधित धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

समय पर चिकित्सा सहायता भी नहीं मिल पाती। राज्यसभा के आँकड़े बताते हैं कि 2024 में सजा दिलाने की दर मात्र 9.4% रही — यानी हर दस में से नौ मामलों में आरोपी बच निकलता है। शिक्षक जैसे विश्वास के पात्र व्यक्ति द्वारा इस अपराध का किया जाना संस्थागत सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बिना त्वरित न्याय और स्कूल-स्तरीय जवाबदेही के, ऐसी घटनाएँ दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किश्तवाड़ में नाबालिग की मौत कैसे हुई?
14 वर्षीय नाबालिग लड़की को गर्भावस्था की चिकित्सीय समाप्ति (MTP) के लिए किश्तवाड़ से डोडा जिले रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, एक स्कूल शिक्षक के कारण वह गर्भवती हुई थी।
गिरफ्तार शिक्षक पर क्या आरोप हैं?
पुलिस ने शिक्षक पर उस अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया है जिसके कारण नाबालिग गर्भवती हुई और अंततः उसकी मौत हुई। संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है और जाँच जारी है।
जम्मू-कश्मीर में बाल अपराध की स्थिति क्या है?
राज्यसभा में पेश आँकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2024 में बच्चों के विरुद्ध 887 अपराध दर्ज हुए और सजा दिलाने की दर केवल 9.4% रही। वर्ष के अंत तक 2,517 मामलों में ट्रायल लंबित था।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस ने कहा है कि गर्भावस्था, मौत और मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जाँच जारी है। गिरफ्तार शिक्षक को अदालत में पेश किया जाएगा और संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
पिछले वर्षों में जम्मू-कश्मीर में बाल अपराध के मामले कितने दर्ज हुए?
आँकड़ों के अनुसार, 2022 में 920 मामले, 2023 में 910 मामले और 2024 में 887 मामले दर्ज हुए। सजा दिलाने की दर 2022 में 11.7%, 2023 में 8.7% और 2024 में 9.4% रही।
राष्ट्र प्रेस
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