कोलकाता एयरपोर्ट की 136 साल पुरानी मस्जिद में प्रवेश बहाली पर कलकत्ता हाईकोर्ट 7 अक्टूबर को करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट में 1 अक्टूबर 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित एक ऐतिहासिक मस्जिद में नमाज के लिए प्रवेश दोबारा बहाल करने की अनुमति माँगने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने शुक्रवार की नमाज के लिए तत्काल अंतरिम राहत देने से फिलहाल इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की।
मस्जिद का इतिहास और विवाद की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सव्यसाची चटर्जी ने किशोर दत्ता के नेतृत्व में अदालत को बताया कि संबंधित मस्जिद करीब 136 वर्ष पुरानी है और कभी बांकड़ा गाँव का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी। एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मस्जिद को ध्वस्त नहीं किया गया था, जबकि गाँव के बाकी निवासियों को मध्यमग्राम में पुनर्वासित किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के समय मस्जिद वाले हिस्से को विशेष रूप से छोड़ा गया था और उनके पास कब्जे से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं।
गौरतलब है कि यह मस्जिद बांकड़ा गेट नामक प्रवेश द्वार के जरिए सुलभ थी और पिछले करीब 50 वर्षों से नमाजियों को वहाँ जाने की अनुमति थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, 11 जुलाई 2026 से अचानक प्रवेश बंद कर दिया गया और उन्हें इस संदर्भ में कोई अधिसूचना भी नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता हर समय प्रवेश की माँग नहीं कर रहे, बल्कि केवल नमाज के निर्धारित समय पर जाने की अनुमति चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी या केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ओर से नमाजियों को बस के जरिए एकत्र कर मस्जिद तक पहुँचाया जाता था।
धार्मिक उपासना के मौलिक अधिकार का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि मंदिर हो या मस्जिद, किसी भी धर्म के व्यक्ति को उपासना स्थल में प्रवेश का कानूनी अधिकार है। इस संदर्भ में 1952 के तीन-न्यायाधीशों की पीठ के आदेश का उल्लेख भी किया गया।
अदालत के सवाल और रुख
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानना चाहा कि बस की व्यवस्था किसके द्वारा की जाती थी और इबादत के लिए मस्जिद में कितने लोग जाते हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि यदि याचिकाकर्ता संपत्ति पर अधिकार का दावा करते हैं, तो वे सिविल सूट क्यों नहीं दाखिल कर रहे। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वे टाइटल की घोषणा नहीं चाहते, बल्कि केवल प्रवेश की पुरानी व्यवस्था बहाल चाहते हैं।
याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया कि अगली सुनवाई तक मस्जिद में नियंत्रित और पर्यवेक्षित प्रवेश की पुरानी व्यवस्था जारी रखने की अनुमति दी जाए। अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले को 7 अक्टूबर 2026 तक के लिए सूचीबद्ध किया।
आगे क्या होगा
अगली सुनवाई में अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम व्यवस्था पर निर्णय ले सकती है। यह मामला धार्मिक उपासना के अधिकार, सुरक्षा प्रतिष्ठानों में पहुँच और भूमि अधिग्रहण के इतिहास से जुड़े कई संवेदनशील पहलुओं को एक साथ उठाता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अदालत एयरपोर्ट सुरक्षा ढाँचे और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाते हुए कोई अस्थायी राहत देती है।