5 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कुमारस्वामी का पलटवार: 'ग्रामीण होने पर गर्व है', प्रियांक खड़गे के 'गांव के बेवकूफ' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कुमारस्वामी का पलटवार: 'ग्रामीण होने पर गर्व है', प्रियांक खड़गे के 'गांव के बेवकूफ' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

सारांश

सिद्धारमैया स्टिंग विवाद ने अब व्यक्तिगत रंग ले लिया है। प्रियांक खड़गे के 'बुनियादी सामान्य ज्ञान' वाले कटाक्ष पर कुमारस्वामी ने गांधी का हवाला देते हुए अपनी ग्रामीण पहचान को गर्व का विषय बताया — कर्नाटक की राजनीति में यह वाकयुद्ध तथ्यों से परे, पहचान की लड़ाई बन चुकी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 5 नवंबर 2026 को कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे के बयान पर तीखा पलटवार किया।
कुमारस्वामी ने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा — 'मुझे ग्रामीण कहलाने पर गर्व है।' विवाद की जड़ पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन और एक कथित 2015 के ईमेल को लेकर है।
खड़गे ने पूछा कि कुमारस्वामी ने अपने डेढ़ साल के मुख्यमंत्रित्व काल में उस ईमेल पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
कांग्रेस और BJP-JD(S) गठबंधन के बीच यह वाकयुद्ध अब व्यक्तिगत योग्यता और पार्टी इतिहास तक पहुंच गया है।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 5 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे के 'गांव के बेवकूफ' वाले बयान पर तीखा पलटवार किया और कहा कि उन्हें अपनी ग्रामीण जड़ों पर पूरा गर्व है। यह विवाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर जारी राजनीतिक वाकयुद्ध की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

कुमारस्वामी का जवाब: गांधी का हवाला

कुमारस्वामी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रसिद्ध उक्ति का हवाला देते हुए कहा कि भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह सच है, मैं एक ग्रामीण हूं। मैं वहीं पैदा हुआ, खेला और बड़ा हुआ। मुझे खुद को ग्रामीण कहने पर गर्व है।' यह बयान खड़गे के उस व्यंग्यात्मक हमले के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कुमारस्वामी की जांच-प्रक्रिया संबंधी समझ पर सवाल उठाए थे।

प्रियांक खड़गे का मूल आरोप

गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार को कुमारस्वामी की उस टिप्पणी पर कड़ा हमला बोला था, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े ईमेल के ठिकाने पर सवाल उठाया था। खड़गे ने कहा था कि अगर कोई निजी ईमेल भेजता है, तो पुलिस या बाल अधिकार आयोग को इसके बारे में तब तक पता नहीं चलेगा जब तक मामला औपचारिक रूप से उनके संज्ञान में न लाया जाए। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'क्या उनके पास यह बुनियादी सामान्य ज्ञान नहीं है? वह मुख्यमंत्री रहे हैं और अब केंद्रीय मंत्री हैं।'

खड़गे का पलटवार: 2015 के ईमेल पर सवाल

खड़गे ने यह भी दावा किया कि कथित ईमेल 2015 का है और कुमारस्वामी उसके बाद लगभग डेढ़ साल तक मुख्यमंत्री के पद पर रहे। उन्होंने पूछा कि यदि कुमारस्वामी को उस शिकायत की पहले से जानकारी थी, तो उन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, 'क्या वह अपराध को बढ़ावा दे रहे थे?' गौरतलब है कि खड़गे ने यह भी कहा कि उन्हें कुमारस्वामी से गृह मंत्री बनने के लिए किसी 'प्रमाणपत्र' की आवश्यकता नहीं है।

जांच प्रक्रिया पर विवाद

खड़गे ने साफ किया कि किसी भी मामले की जांच के लिए उचित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और इसे बच्चों के खेल की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा, 'क्या हम जांच को लाइवस्ट्रीम करने के लिए राज्य में बिग बॉस शो चला रहे हैं?' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार जांच पूरी होने पर आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा, जो सार्वजनिक दस्तावेज बन जाएगा, लेकिन चल रही जांच के विवरण गोपनीय हैं।

राजनीतिक संदर्भ: कांग्रेस बनाम BJP-JD(S)

यह पूरा विवाद सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP)-जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] गठबंधन के बीच जारी व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है। कुमारस्वामी की पार्टी JD(S) के बारे में खड़गे ने कहा कि वह अपने इतिहास में कभी भी 100 विधायक जीतने में कामयाब नहीं हुई है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा। यह वाकयुद्ध अब स्टिंग ऑपरेशन के तथ्यों से आगे बढ़कर दोनों नेताओं के व्यक्तिगत और राजनीतिक इतिहास तक पहुंच गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह कर्नाटक में कांग्रेस और JD(S)-BJP गठबंधन के बीच की उस गहरी प्रतिस्पर्धा का प्रतिबिंब है जो अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ और तीखी होती जा रही है। खड़गे का '2015 के ईमेल' वाला तर्क कुमारस्वामी को रक्षात्मक स्थिति में धकेलने की कोशिश है, जबकि कुमारस्वामी की 'ग्रामीण पहचान' की राजनीति OBC और ग्रामीण मतदाताओं को साधने की रणनीति जान पड़ती है। मुख्यधारा की कवरेज बयानबाजी पर टिकी है — असली सवाल यह है कि क्या स्टिंग ऑपरेशन की जांच कभी किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी, या यह दोनों पक्षों के लिए महज एक चुनावी हथियार बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारस्वामी और प्रियांक खड़गे के बीच यह विवाद क्यों शुरू हुआ?
यह विवाद पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर शुरू हुआ। कुमारस्वामी ने मामले से जुड़े कथित ईमेल के ठिकाने पर सवाल उठाए, जिस पर खड़गे ने उनकी जांच-प्रक्रिया संबंधी समझ पर कटाक्ष किया।
प्रियांक खड़गे ने 'गांव के बेवकूफ' वाली टिप्पणी क्यों की?
खड़गे ने यह टिप्पणी कुमारस्वामी की उस बात के जवाब में कथित तौर पर की, जिसमें उन्होंने पुलिस विभाग द्वारा किसी निजी ईमेल पर स्वतः कार्रवाई न करने पर सवाल उठाया था। खड़गे ने तर्क दिया कि जब तक मामला औपचारिक रूप से संज्ञान में न लाया जाए, विभाग को उसकी जानकारी नहीं होती।
2015 के कथित ईमेल का इस विवाद से क्या संबंध है?
खड़गे ने दावा किया कि कथित शिकायत ईमेल 2015 का है और कुमारस्वामी उसके बाद डेढ़ साल तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कुमारस्वामी को इसकी जानकारी थी, तो उन्होंने अपने कार्यकाल में कोई कदम क्यों नहीं उठाया।
कुमारस्वामी ने खड़गे के हमले का क्या जवाब दिया?
कुमारस्वामी ने महात्मा गांधी की उक्ति — 'भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है' — का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें अपनी ग्रामीण जड़ों पर गर्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वहीं पैदा हुए, खेले और बड़े हुए।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह वाकयुद्ध सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी BJP-JD(S) गठबंधन के बीच जारी टकराव को और तेज करता है। स्टिंग ऑपरेशन की जांच के परिणाम और दोनों पक्षों की राजनीतिक रणनीति आने वाले विधानसभा चुनाव तक इस विवाद को जीवित रखेंगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. कल
  3. 3 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 3 सप्ताह पहले