9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एनआईसीई रोड टोल विवाद: कुमारस्वामी ने वाहन चालकों से टोल न देने की अपील की, कर्नाटक सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एनआईसीई रोड टोल विवाद: कुमारस्वामी ने वाहन चालकों से टोल न देने की अपील की, कर्नाटक सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम

सारांश

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एनआईसीई रोड पर टोल न देने की सीधी जन-अपील की और कर्नाटक सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया। कर्नाटक उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियों के बाद यह विवाद राजनीतिक और कानूनी — दोनों मोर्चों पर गरमा गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 8 अगस्त 2026 को वाहन चालकों से एनआईसीई रोड पर टोल न देने की अपील की।
कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया — टोल वसूली बंद करो, अन्यथा जेडीएस बड़ा आंदोलन शुरू करेगी।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई को एनआईसीई परियोजना को राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया था और फॉरेंसिक ऑडिट का सुझाव दिया था।
आरोप: परियोजना के नाम पर 20 हजार एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित, हजारों किसानों को मुआवजा नहीं।
एनआईसीई पर आरोप कि उसने राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना कई बार टोल दरें बढ़ाईं।

केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) [जेडीएस] के नेता एचडी कुमारस्वामी ने 8 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में वाहन चालकों से एनआईसीई रोड पर टोल न देने की सीधी अपील की और कर्नाटक सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया कि टोल वसूली तत्काल बंद की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (एनआईसीई परियोजना) में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं और टोल वसूली अवैध रूप से जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

बेंगलुरु स्थित जेडीएस मुख्यालय जेपी भवन में आयोजित प्रेस सम्मेलन में कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार से माँग की कि वह एनआईसीई परियोजना को तत्काल अपने नियंत्रण में ले और टोल वसूली रोके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं की, तो जेडीएस इस मुद्दे पर बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेगी।

कुमारस्वामी ने कहा, 'हाई कोर्ट ने एनआईसीई परियोजना में अनियमितताओं को लेकर गंभीर टिप्पणियाँ की हैं। सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर कंपनी द्वारा की जा रही टोल वसूली रोकनी चाहिए। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो हम संघर्ष शुरू करेंगे।'

कर्नाटक हाई कोर्ट की टिप्पणियाँ

कुमारस्वामी 29 जुलाई को कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना में कथित अनियमितताओं पर दिए गए फैसले का हवाला दे रहे थे। उनके अनुसार, अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह परियोजना राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक प्रतीत होती है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया था कि धोखाधड़ी और अन्य आरोपों की स्वतंत्र विशेषज्ञ टीम से जाँच और परियोजना के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाना चाहिए। कुमारस्वामी ने कहा कि ये टिप्पणियाँ ही सरकार के लिए परियोजना का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

किसानों पर असर और भूमि अधिग्रहण के आरोप

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि एनआईसीई परियोजना के नाम पर 20 हजार एकड़ से अधिक जमीन भूमि बैंक के रूप में जमा की गई, जिससे हजारों किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। उनका दावा है कि कई किसानों की जमीन करीब दो दशक पहले अधिग्रहित की गई थी, लेकिन कुछ मामलों में अब तक मुआवजा नहीं दिया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन बाद में निजी पक्षों को बेची या हस्तांतरित की गई। बेंगलुरु के होसकेरेहल्ली स्थित एनआईसीई जंक्शन के पास एक निर्माण परियोजना के लिए एनआईसीई द्वारा जारी किए गए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) पर भी उन्होंने सवाल उठाए और पूछा कि यह जमीन किसकी है और NOC किस आधार पर जारी हुआ।

टोल दरों में अवैध वृद्धि के आरोप

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि एनआईसीई ने राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना कई बार टोल दरों में वृद्धि की। उन्होंने कहा कि सरकार ने खुद अदालत को बताया था कि बिना पूर्व अनुमति के टोल दरों में संशोधन किया गया — यह फ्रेमवर्क समझौते की शर्तों का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनआईसीई परियोजना विवादों के घेरे में आई है। परियोजना वर्षों से भूमि अधिग्रहण, टोल दरों और पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना करती रही है।

जनता और युवाओं से आह्वान

कुमारस्वामी ने लोगों से अपील की, 'मैं लोगों से अपील करता हूँ कि किसी भी परिस्थिति में टोल न दें। इस शोषण को रोकिए। जनता को इस परियोजना के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। मैं युवाओं और किसानों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान करता हूँ।'

उन्होंने हाई कोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद राज्य सरकार पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया और कहा कि वे सरकार को पत्र लिखेंगे और उसके जवाब का इंतजार करेंगे। अब सरकार की प्रतिक्रिया और अदालत की आगामी सुनवाई तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जमीन कर्नाटक उच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों ने तैयार की है जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है। असली सवाल यह है कि कांग्रेस सरकार अदालत की सिफारिशों पर इतने समय से चुप क्यों है — क्या यह प्रशासनिक जड़ता है या कुछ और? एनआईसीई परियोजना दशकों से भूमि, टोल और पारदर्शिता के सवालों से घिरी रही है, और हर बार जाँच की माँग उठती है, राजनीतिक दल अपने-अपने कार्यकाल के हिसाब से पाला बदल लेते हैं। जब तक फॉरेंसिक ऑडिट और स्वतंत्र जाँच वास्तव में होती नहीं, यह विवाद अदालत और चुनावी मंच के बीच झूलता रहेगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईसीई रोड टोल विवाद क्या है?
बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (एनआईसीई) परियोजना पर आरोप है कि टोल वसूली अवैध रूप से और बिना सरकारी मंजूरी के की जा रही है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई को इसे राज्य के बड़े घोटालों में से एक बताते हुए फॉरेंसिक ऑडिट का सुझाव दिया था।
कुमारस्वामी ने टोल न देने की अपील क्यों की?
कुमारस्वामी का कहना है कि एनआईसीई ने फ्रेमवर्क समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है और सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना टोल दरें बढ़ाई हैं। उन्होंने इसे जनता के साथ शोषण बताते हुए टोल-बहिष्कार की अपील की।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एनआईसीई पर क्या कहा था?
29 जुलाई को कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने टिप्पणी की थी कि एनआईसीई परियोजना राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक प्रतीत होती है। अदालत ने स्वतंत्र विशेषज्ञ जाँच और परियोजना के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का सुझाव दिया था।
किसानों पर एनआईसीई परियोजना का क्या असर पड़ा?
कुमारस्वामी के अनुसार, परियोजना के नाम पर 20 हजार एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित की गई। कई किसानों की जमीन करीब दो दशक पहले ली गई थी, लेकिन कुछ मामलों में अब तक मुआवजा नहीं मिला और अधिग्रहित जमीन निजी पक्षों को हस्तांतरित करने के आरोप भी हैं।
जेडीएस का अगला कदम क्या होगा?
कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है। यदि इस अवधि में टोल वसूली नहीं रुकी, तो जेडीएस बड़ा जन-आंदोलन शुरू करेगी। कुमारस्वामी ने कहा कि वे सरकार को पत्र लिखेंगे और जवाब का इंतजार करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले