25 अगस्त 2026
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एनआईसीई परियोजना में अनियमितताओं पर जेडी(एस) का राज्यपाल से हस्तक्षेप का आग्रह, एसआईटी जांच और 554 एकड़ जमीन वापसी की मांग

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एनआईसीई परियोजना में अनियमितताओं पर जेडी(एस) का राज्यपाल से हस्तक्षेप का आग्रह, एसआईटी जांच और 554 एकड़ जमीन वापसी की मांग

सारांश

जेडी(एस) ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन सौंपकर एनआईसीई परियोजना में एसआईटी जांच, 554 एकड़ जमीन वापसी और कथित अवैध टोल पर रोक की माँग की। 25 वर्षों में 111 किमी में से केवल 5 किमी सड़क बनी, जबकि कंपनी के पास 20,000 एकड़ से अधिक जमीन है।

मुख्य बातें

जेडी(एस) प्रतिनिधिमंडल ने 25 अगस्त 2026 को राज्यपाल थावरचंद गहलोत को पाँच पन्नों का ज्ञापन सौंपा।
पार्टी ने एसआईटी जांच , 554 एकड़ जमीन वापसी और कथित अवैध टोल वसूली पर तत्काल रोक की माँग की।
ज्ञापन के अनुसार 111 किलोमीटर के प्रस्तावित कॉरिडोर में 25 वर्षों में केवल 5 किलोमीटर सड़क बनी; कंपनी के पास 20,000 एकड़ से अधिक भूमि बैंक।
निखिल कुमारस्वामी ने सरकार को दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया, कार्रवाई न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी।
बिदादी भूमि अधिग्रहण मामले में 81 किसान हाई कोर्ट पहुँचे; अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।
निखिल ने मंत्रिमंडल में बी.
नागेंद्र की वापसी पर भी सवाल उठाए।

जनता दल (सेक्युलर) [जेडी(एस)] के एक प्रतिनिधिमंडल ने 25 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित राजभवन में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (बीएमआईसीपी) में एनआईसीई कंपनी द्वारा कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की माँग की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को पाँच पन्नों का ज्ञापन और हाल ही में आए हाई कोर्ट के फैसले की प्रति सौंपी।

प्रतिनिधिमंडल और ज्ञापन का विवरण

जेडी(एस) विधायक दल के नेता सी.बी. सुरेश बाबू के नेतृत्व में गए इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के विधायक और युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी भी शामिल थे। ज्ञापन में पार्टी ने सात प्रमुख माँगें राज्यपाल के समक्ष रखीं, जिनमें एनआईसीई परियोजना से जुड़े व्यापक कथित उल्लंघनों पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया गया।

सात प्रमुख माँगें

जेडी(एस) की माँगों में शामिल हैं — कथित अवैध टोल वसूली पर तत्काल रोक, एनआईसीई के कब्जे से 554 एकड़ जमीन वापस लेना, विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच और फोरेंसिक ऑडिट, परियोजना का सरकारी अधिग्रहण सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून बनाना, किसानों को उचित मुआवजा देना, कथित रूप से शामिल अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई और झीलों व तालाबों की जमीन को फिर से सार्वजनिक स्वामित्व में लाना।

कथित अनियमितताओं का ब्योरा

जेडी(एस) ने आरोप लगाया कि करीब दो दशकों से किसानों की जमीन बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहित रखी गई है, जो संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है। पार्टी का दावा है कि एनआईसीई ने परियोजना से जुड़ी जमीन संयुक्त विकास समझौतों के जरिए निजी डेवलपर्स को बेच दी और झीलों व तालाबों की जमीन का आवंटन सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांतों के विरुद्ध किया गया।

ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित 111 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में 25 वर्षों में केवल लगभग पाँच किलोमीटर सड़क का निर्माण हो सका, जबकि कंपनी के पास 20,000 एकड़ से अधिक का भूमि बैंक बना हुआ है।

निखिल कुमारस्वामी की चेतावनी

राज्यपाल से मुलाकात के बाद निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि पार्टी ने राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार एनआईसीई परियोजना का अधिग्रहण नहीं करती, तो जेडी(एस) राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी सभी दस्तावेजों के साथ एक वेबसाइट भी जारी करेगी और जन-जागरूकता अभियान चलाएगी।

निखिल ने हाई कोर्ट के फैसले को 'ऐतिहासिक' बताते हुए कहा कि परियोजना समझौते के अनुसार लागू नहीं की गई और किसानों को मुआवजा नहीं मिला। उनके अनुसार, अदालत ने भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना रद्द कर दी है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत की टिप्पणियों के बावजूद करोड़ों रुपये का टोल वसूला जा रहा है।

बिदादी मामला और अन्य राजनीतिक बयान

बिदादी भूमि अधिग्रहण मामले पर निखिल ने बताया कि 81 किसान हाई कोर्ट पहुँचे हैं और अदालत ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं — मामले में आगे की सुनवाई बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के विभिन्न मुद्दों पर जेडी(एस) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करेगी। साथ ही उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल में बी. नागेंद्र की दोबारा एंट्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री स्वयं अनियमितताओं की बात स्वीकार कर चुके हैं, तो आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को मंत्री क्यों बनाया गया।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। एनआईसीई परियोजना से जुड़े विवाद दशकों पुराने हैं और अब न्यायिक हस्तक्षेप के बाद यह मुद्दा फिर से राजनीतिक केंद्र में आ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जेडी(एस) का राज्यपाल के दरवाजे तक पहुँचना यह संकेत देता है कि विपक्ष इसे चुनावी हथियार के रूप में तेज करने की तैयारी में है। असली सवाल यह है कि हाई कोर्ट के फैसले के बावजूद टोल वसूली जारी रहना किसकी जवाबदेही तय करता है — कंपनी की, सरकार की, या नियामक तंत्र की। 25 वर्षों में 111 किमी में से केवल 5 किमी सड़क और 20,000 एकड़ से अधिक भूमि बैंक का यह असंतुलन सार्वजनिक-निजी भागीदारी की निगरानी पर गहरे सवाल खड़े करता है। बिना स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट और पारदर्शी मुआवजे के, किसानों का न्याय राजनीतिक बयानबाजी में दबा रह सकता है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईसीई परियोजना विवाद क्या है?
बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (बीएमआईसीपी) में एनआईसीई कंपनी पर कथित अनियमितताओं के आरोप हैं, जिनमें बिना उचित मुआवजे के किसानों की जमीन अधिग्रहण, कथित अवैध टोल वसूली और झीलों की जमीन का निजी उपयोग शामिल है। 25 वर्षों में 111 किमी के कॉरिडोर में केवल 5 किमी सड़क बन सकी है।
जेडी(एस) ने राज्यपाल से क्या माँगें की हैं?
जेडी(एस) ने सात माँगें रखी हैं — कथित अवैध टोल पर रोक, 554 एकड़ जमीन वापसी, एसआईटी जांच और फोरेंसिक ऑडिट, परियोजना के सरकारी अधिग्रहण के लिए विशेष कानून, किसानों को मुआवजा, आरोपी अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई और झीलों की जमीन को सार्वजनिक स्वामित्व में लाना।
निखिल कुमारस्वामी ने सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया?
निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। यदि सरकार एनआईसीई परियोजना का अधिग्रहण नहीं करती, तो जेडी(एस) राज्यभर में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी और जन-जागरूकता अभियान भी चलाएगी।
बिदादी भूमि अधिग्रहण मामले में क्या स्थिति है?
बिदादी भूमि अधिग्रहण मामले में 81 किसान हाई कोर्ट पहुँचे हैं। अदालत ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और मामले में आगे की सुनवाई बाकी है।
हाई कोर्ट के फैसले का एनआईसीई परियोजना पर क्या असर है?
जेडी(एस) के अनुसार, हाई कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना रद्द कर दी है। पार्टी का कहना है कि इसके बावजूद करोड़ों रुपये की टोल वसूली जारी है, जो अदालत की भावना के विरुद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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