21 जुलाई 2026
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आर्ट ऑफ लिविंग पर भूमि अतिक्रमण जांच: कर्नाटक सरकार ने बनाई एसआईटी, 291 एकड़ भूमि विवाद में

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आर्ट ऑफ लिविंग पर भूमि अतिक्रमण जांच: कर्नाटक सरकार ने बनाई एसआईटी, 291 एकड़ भूमि विवाद में

सारांश

कर्नाटक सरकार ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और संबद्ध संस्थाओं पर बेंगलुरु के काग्गलिपुरा क्षेत्र में 291 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि के कथित अतिक्रमण की जांच के लिए एसआईटी बनाई है। संस्थापक श्री श्री रविशंकर समेत कई अधिकारियों पर पहले से एफआईआर दर्ज है और एसआईटी को तीन महीने में रिपोर्ट देनी है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 21 जुलाई 2026 को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और संबद्ध संस्थाओं के विरुद्ध भूमि अतिक्रमण जांच हेतु एसआईटी गठित की।
कथित अतिक्रमण काग्गलिपुरा, अगारा और जी.एम.
पाल्या गांवों में 291 एकड़ 38 गुंटा भूमि पर बताया जा रहा है।
41 एकड़ भूमि की लीज 2015 में समाप्त हो चुकी है, फिर भी संगठन कथित तौर पर उसका उपयोग कर रहा है।
संस्थापक श्री श्री रविशंकर समेत कई पदाधिकारियों के विरुद्ध पहले से एफआईआर दर्ज है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 में कानूनी कार्रवाई और सर्वे के निर्देश दिए थे।
एसआईटी को तीन महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है।

कर्नाटक सरकार ने 21 जुलाई 2026 को आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और उससे संबद्ध संस्थाओं के विरुद्ध बेंगलुरु दक्षिण तालुक के काग्गलिपुरा व आसपास के क्षेत्रों में सरकारी और सार्वजनिक भूमि के कथित अतिक्रमण की जांच हेतु विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। राजस्व विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार यह निर्णय बेंगलुरु संभागीय आयुक्त की रिपोर्ट और सहायक भूमि अभिलेख निदेशक (एडीएलआर) के सर्वेक्षण निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है।

जांच का दायरा और आरोप

एसआईटी काग्गलिपुरा (सर्वे नंबर-46 सहित), अगारा और जी.एम. पाल्या गांवों में कथित अतिक्रमण की व्यापक जांच करेगी। जांच के दायरे में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, वेद विज्ञान महा विद्यापीठ, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, सुमेरु ग्लोबल सर्विसेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, सुमेरु इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड तथा अन्य संबंधित व्यक्ति और संस्थाएं शामिल हैं।

सरकार के अनुसार भूमि अभिलेखों और सर्वेक्षण से संकेत मिले हैं कि कई दशकों के दौरान लीज, समझौतों और अन्य लेन-देन के माध्यम से 290 एकड़ से अधिक सरकारी व सार्वजनिक उपयोग की भूमि उक्त संगठन और संबद्ध संस्थानों के नियंत्रण में आ गई है।

लीज विवाद और भूमि का ब्यौरा

सरकारी आदेश के अनुसार सर्वे नंबर-46 की 41 एकड़ भूमि वर्ष 1985 में 40 वर्षों के लिए ₹500 प्रति एकड़ वार्षिक की नाममात्र दर पर लीज पर दी गई थी। सरकार का दावा है कि 2015 में लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद संगठन अब भी इस भूमि का उपयोग कर रहा है। वहीं जी.एम. पाल्या के सर्वे नंबर-135 की 19 एकड़ भूमि वर्ष 2003 में 30 वर्षों के लिए लीज पर दी गई थी, जिसकी अवधि अभी सात वर्ष शेष है।

प्रारंभिक जांच में सरकार ने पाया है कि संगठन और संबद्ध संस्थाओं के नियंत्रण में वर्तमान में करीब 291 एकड़ 38 गुंटा भूमि है, जिसमें लगभग 60 एकड़ सरकारी लीज वाली भूमि भी शामिल है। सरकारी रिकॉर्ड में इन क्षेत्रों में सार्वजनिक सड़कें, जलाशय, नाले और 'बी-खराब' श्रेणी की सरकारी भूमि दर्ज है।

एफआईआर और न्यायालय के निर्देश

सरकारी आदेश में उल्लेख है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर समेत कई पदाधिकारियों और संबद्ध संस्थाओं के अधिकारियों के विरुद्ध पहले से एफआईआर दर्ज है। यह मामला काग्गलिपुरा गांव के सर्वे नंबर 160, 164/1, 164/2, 150 और 137 में कथित अतिक्रमण से जुड़ा है।

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू करने और विवादित भूमि का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि सर्वे के दौरान अधिकारियों को स्थानीय लोगों और संगठन से जुड़े व्यक्तियों के विरोध का सामना करना पड़ा था।

एसआईटी को सौंपे गए कार्य

एसआईटी को भूमि अभिलेख, लीज डीड और अनुदान संबंधी दस्तावेजों की जांच, लाभार्थियों और कानूनी उत्तराधिकारियों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों की पड़ताल, लीज शर्तों के पालन की समीक्षा, सैटेलाइट इमेजरी और जियोस्पेशियल तकनीक से नए सर्वे कराने तथा सार्वजनिक सड़क, जलाशय व नागरिक सुविधाओं की पहचान करने का निर्देश दिया गया है। एसआईटी को सभी पक्षों की सुनवाई कर तीन महीने के भीतर सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी।

यह एसआईटी कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 की धारा 195 और कर्नाटक भूमि हड़प निषेध अधिनियम, 2011 की धारा 8 के तहत गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्हें पिछली सरकारों ने नज़रअंदाज़ किया। कर्नाटक उच्च न्यायालय के सितंबर 2025 के निर्देशों के बाद भी सर्वे के दौरान विरोध का सामना करना पड़ा — यह दर्शाता है कि जमीनी जांच कितनी जटिल होगी। असली परीक्षा यह है कि एसआईटी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर तीन महीने में ठोस और सत्यापन-योग्य निष्कर्ष दे पाती है या नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार ने आर्ट ऑफ लिविंग के खिलाफ एसआईटी क्यों बनाई?
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु दक्षिण तालुक के काग्गलिपुरा और आसपास के क्षेत्रों में 291 एकड़ से अधिक सरकारी व सार्वजनिक भूमि के कथित अतिक्रमण की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। बेंगलुरु संभागीय आयुक्त की रिपोर्ट और एडीएलआर सर्वेक्षण निष्कर्षों के आधार पर यह निर्णय लिया गया।
एसआईटी जांच के दायरे में कौन-कौन सी संस्थाएं हैं?
एसआईटी की जांच में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, वेद विज्ञान महा विद्यापीठ, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, सुमेरु ग्लोबल सर्विसेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सुमेरु इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। संस्थापक श्री श्री रविशंकर समेत कई पदाधिकारियों के विरुद्ध पहले से एफआईआर दर्ज है।
कितनी भूमि विवाद में है और लीज की क्या स्थिति है?
प्रारंभिक जांच के अनुसार संगठन और संबद्ध संस्थाओं के नियंत्रण में करीब 291 एकड़ 38 गुंटा भूमि है, जिसमें लगभग 60 एकड़ सरकारी लीज वाली भूमि शामिल है। सर्वे नंबर-46 की 41 एकड़ भूमि की लीज 2015 में समाप्त हो चुकी है, फिर भी संगठन कथित तौर पर उसका उपयोग जारी रखे हुए है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय की इस मामले में क्या भूमिका रही है?
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 में अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और विवादित भूमि का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि सर्वे के दौरान अधिकारियों को स्थानीय लोगों और संगठन से जुड़े व्यक्तियों के विरोध का सामना करना पड़ा था।
एसआईटी को रिपोर्ट कब तक देनी है और आगे क्या होगा?
एसआईटी को सभी पक्षों की सुनवाई कर तीन महीने के भीतर सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट के आधार पर कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 और कर्नाटक भूमि हड़प निषेध अधिनियम, 2011 के तहत आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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