कुर्सी योग: वृद्धावस्था में जोड़ों के दर्द और कमजोरी को दूर करने का सरल और सुरक्षित उपाय
सारांश
Key Takeaways
- कुर्सी योग बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित विकल्प है।
- यह जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी को कम करता है।
- सामान्य स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक है।
- प्रशिक्षित शिक्षक की देखरेख में करना उत्तम है।
- सावधानियाँ बरतना जरूरी है।
नई दिल्ली, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शारीरिक गतिशीलता में कमी और संतुलन बनाए रखने में मुश्किल होना सामान्य है। कई बुजुर्ग फर्श पर बैठने और उठने में असमर्थ हो जाते हैं और पारंपरिक योग आसनों से दूर रहते हैं। इस स्थिति में कुर्सी योग बुजुर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन जाता है।
कुर्सी योग उन बुजुर्गों और व्यक्तियों के लिए एक वरदान है, जिन्हें जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी या संतुलन की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कुर्सी पर बैठकर या उसका सहारा लेकर किया जाता है। इसके लिए बस एक मजबूत और स्थिर कुर्सी की आवश्यकता होती है, जिसे घर, पार्क या किसी सुरक्षित स्थान पर आसानी से किया जा सकता है।
कुर्सी योग न केवल बुजुर्गों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए एक सुरक्षित और सुलभ विकल्प है जो अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहते हैं लेकिन पारंपरिक तरीके से असुविधा महसूस करते हैं। यह स्वास्थ्य में सुधार और खुशहाल जीवन जीने का एक सरल, प्रभावी और जोखिम-मुक्त साधन है। नियमित अभ्यास से बुजुर्ग अपनी शारीरिक क्षमता को बढ़ा सकते हैं और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रह सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुर्सी योग को अपनाकर बढ़ती उम्र की कुछ समस्याओं का सामना किया जा सकता है।
इस योग में कंधे और गर्दन की स्ट्रेचिंग, कुर्सी पर बैठकर पैरों की गतिविधियाँ और सहारे के साथ खड़े होकर किए जाने वाले आसन शामिल हैं। ये तरीके पारंपरिक योग को जोखिम-मुक्त बनाते हैं। नियमित अभ्यास से जोड़ों की जकड़न कम होती है, मांसपेशियां मजबूत बनती हैं और शरीर में लचीलापन बढ़ता है। प्राणायाम की तकनीकें तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती हैं, जिससे मानसिक शांति मिलती है। यह हृदय स्वास्थ्य, रक्तचाप नियंत्रण और अच्छी नींद में भी सहायक है। बुजुर्ग बिना किसी भय के सहजता से व्यायाम कर सकते हैं।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, कुर्सी योग की शुरुआत सरल आसनों से करनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में शुरू करना बेहतर होता है। हफ्ते में दो-तीन बार २० से ३० मिनट का अभ्यास फायदेमंद सिद्ध हो सकता है।
कुर्सी योग करते समय कुछ सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है। इसके लिए बिना पहियों वाली एक मजबूत कुर्सी का चयन करें। कुर्सी की सीट ज्यादा गद्देदार नहीं होनी चाहिए, कुर्सी की पीठ सीधी होनी चाहिए और इसकी ऊंचाई ऐसी हो कि पैर जमीन पर पूरी तरह सपाट रह सकें।