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क्या हाल के वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलाव आया है?

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क्या हाल के वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलाव आया है?

सारांश

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में संदीप गंभीर ने भारत की उभरती अंतरराष्ट्रीय पहचान पर चर्चा की। इस आयोजन ने वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य में भारतीय भूमिका को रेखांकित किया। क्या भारत की पहचान वाकई बदल रही है? जानिए इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की बातें।

मुख्य बातें

भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलाव आ रहा है।
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है।
स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर दिया गया।
युवाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
आत्मनिर्भर भारत का आंदोलन मजबूत हो रहा है।

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में वर्टेलो के सीईओ संदीप गंभीर ने कहा कि यह आयोजन वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य में भारत की उभरती भूमिका पर चर्चा के लिए एक शक्तिशाली मंच के रूप में कार्य करता है।

समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में शनिवार को गंभीर ने शिखर सम्मेलन को विचारों और नेतृत्व का एक उत्कृष्ट संगम बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण को उत्साहवर्धक बताते हुए कहा कि यह आगामी वर्ष में देश की महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण माहौल तैयार करेगा।

उन्होंने कहा कि वक्ताओं और विषयों का चयन दुनिया में विभिन्न स्तरों पर, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे और गतिशीलता के क्षेत्र में हो रही अस्थिरता और परिवर्तन को दर्शाता है।

गंभीर ने कहा कि आज के सत्र में बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक वाहन उद्योग पर गहन चर्चा हुई। हम सभी ईंधन-आधारित दोपहिया, तिपहिया और यात्री कारों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ते संक्रमण को देख रहे हैं और अब इलेक्ट्रिक ट्रक भी इस दौड़ में शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन ने उद्योग के हितधारकों को नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी नेताओं के साथ जुड़ने का अवसर दिया, जिससे भारत के आत्मनिर्भर भारत मिशन के साथ एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण तैयार हुआ।

स्वदेशी की बढ़ती भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह देखना उत्साहजनक है कि सरकार का प्रयास, उद्योग नवाचार और उपभोक्ता विश्वास मिलकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वच्छ ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों में युवाओं की भागीदारी के महत्व पर जोर दिया, जो प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल परिवर्तन पर दिए गए जोर को प्रतिध्वनित करता है।

उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर, आत्मनिर्भर भारत का नारा एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया है। यह केवल आत्मनिर्भरता के बारे में नहीं है, बल्कि स्थायित्व और विश्व नेता बनने के बारे में भी है। हम इस दिशा में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक प्रभाव पर गंभीर ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान बदली है।

उन्होंने आगे कहा कि आज जब हम विदेश यात्रा करते हैं, तो लोग हमें प्रधानमंत्री मोदी की धरती से आने वाला मानते हैं। इस तरह की पहचान हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश का नेतृत्व उसे नवाचार, लचीलेपन और वैश्विक सम्मान की दिशा में सही रास्ते पर ले जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलाव केवल एक घटनाक्रम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह परिवर्तन भारत को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनडीटीवी वर्ल्ड समिट का उद्देश्य क्या है?
एनडीटीवी वर्ल्ड समिट का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य में भारत की उभरती भूमिका को रेखांकित करना है।
संदीप गंभीर ने शिखर सम्मेलन में क्या कहा?
संदीप गंभीर ने शिखर सम्मेलन को विचारों और नेतृत्व का उत्कृष्ट संगम बताया और भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलाव पर चर्चा की।
भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान पर क्या प्रभाव पड़ा है?
भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान में बदलाव ने उसे एक नवाचार और लचीलेपन के प्रतीक के रूप में स्थापित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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