राहुल गांधी 'लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' हैं, झारखंड पर चुप्पी साधते हैं: शाइना एनसी का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने 17 अगस्त 2026 को मुंबई में कई अहम मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी — जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा निशाना, महबूबा मुफ्ती के विवादित बयान, पंजाब में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर उठे विवाद और पान मसाला विज्ञापन पर एफडीए की कार्रवाई शामिल हैं। शाइना एनसी ने राहुल गांधी पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि वे दिल्ली में प्रोपेगेंडा करते हैं लेकिन झारखंड के मामलों पर मौन रहते हैं।
राहुल गांधी पर सीधा प्रहार
झारखंड सरकार की छात्रों से संवाद की पहल पर टिप्पणी करते हुए शाइना एनसी ने कहा कि बच्चों से चर्चा और संवाद होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी 'लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' हैं — वे जंतर-मंतर पर और प्रधानमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन झारखंड के मामलों पर एकदम चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह दोतरफा रवैया बिल्कुल नहीं चलेगा।'
महबूबा मुफ्ती और 'दिमागी नक्सल' पर तीखी टिप्पणी
'दिमागी नक्सल' की अवधारणा पर बोलते हुए शाइना एनसी ने कहा कि जो लोग टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ नारे लगाते हैं, सेना और सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते हैं, वंदे मातरम और तिरंगे का विरोध करते हैं तथा विदेशी फंडिंग से एनजीओ चलाते हैं — वे इस श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी राय में महबूबा मुफ्ती इस कैटेगरी में फिट बैठती हैं।
पंजाब में स्वतंत्रता दिवस विवाद
पंजाब में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर उठे विवाद पर शाइना एनसी ने कहा कि वहाँ जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह बेहद दुखद है। उनके अनुसार, स्वतंत्रता दिवस उत्सव का अवसर होता है, लेकिन पंजाब में इस मौके पर तुच्छ राजनीति की जा रही है।
एफडीए कार्रवाई और पान मसाला विज्ञापन
पान मसाले के विज्ञापन में नज़र आने वाले कुछ अभिनेताओं के खिलाफ एफडीए (FDA) की ओर से की गई कार्रवाई को शाइना एनसी ने उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि एफडीए बिल्कुल सही काम कर रहा है और ऐसे विज्ञापनों पर अंकुश लगाना जरूरी है।
गोपीनाथ मुंडे पर कांग्रेस नेता के बयान का जवाब
कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण की ओर से गोपीनाथ मुंडे को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए शाइना एनसी ने कहा कि चव्हाण शायद यह भूल गए हैं कि गोपीनाथ मुंडे एक समर्पित स्वयंसेवक और प्रखर ओबीसी नेता थे, जिनका दिल सिर्फ 'कमल' के लिए धड़कता था। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है और भाजपा-शिवसेना गठबंधन विपक्ष पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।