गांधी जयंती पर एलजी मनोज सिन्हा का संदेश: तकनीकी प्रगति में करुणा और कमजोर वर्गों की चिंता ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि विकास और प्रगति का मार्ग करुणा तथा समाज के सबसे कमजोर वर्गों की चिंता के बिना अधूरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक होती है, जब वह मानवता, सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हो।
तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन
उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के संवाद करने और सूचनाओं तक पहुँचने के तरीके को तेज़ी से बदल दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि तकनीकी विकास की दिशा मानव मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी से तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'तकनीक एक शक्तिशाली माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाता है, यही तय करता है कि यह मानवता की सेवा करेगी या नई चुनौतियाँ पैदा करेगी।' सिन्हा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक का उपयोग शिक्षा, नवाचार, रोजगार और समाज की भलाई के लिए करें — न कि विभाजन या गलत सूचना के प्रसार के लिए।
गांधी का दर्शन और आज की प्रासंगिकता
सिन्हा ने कहा कि महात्मा गांधी का दर्शन आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती केवल उन्हें याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उनके विचारों पर चिंतन और उनकी मौजूदा प्रासंगिकता को समझने का भी अवसर है।
उन्होंने गांधी के जीवन से यह सीख उद्धृत की कि सत्य केवल एक विचार नहीं, बल्कि ऐसा सिद्धांत है जिसे जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाया जाना चाहिए। डिजिटल युग में, जब सूचनाएँ कुछ ही क्षणों में पूरी दुनिया में पहुँच जाती हैं, उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने या प्रतिक्रिया देने से पहले उसका सत्यापन जरूर करें।
समावेशी विकास और कमजोर वर्ग
उपराज्यपाल ने कहा कि विकास की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि उन लोगों के जीवन में कितना सुधार आया, जिन्हें सबसे अधिक सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने न्याय, दूसरों के प्रति सम्मान और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता को विकास प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बताया।
उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस यात्रा में आर्थिक और तकनीकी प्रगति के साथ करुणा और मानवीय मूल्यों को जोड़ना अनिवार्य है। जम्मू-कश्मीर की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश आधुनिक शिक्षा, तकनीक और बुनियादी ढाँचे के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है।
शिक्षा, संवाद और नागरिक जिम्मेदारी
सिन्हा ने शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा जताई कि वे केवल ज्ञान और कौशल ही न दें, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र, जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका ऐसे नागरिकों के निर्माण में महत्वपूर्ण है जो सक्षम होने के साथ-साथ जिम्मेदार और संवेदनशील भी हों।
उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि विचारों की असहमति को दुश्मनी का कारण नहीं बनना चाहिए और संवाद, विविधता तथा प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा के सम्मान की आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके सिद्धांतों को रोज़मर्रा के आचरण में उतारा जाए और विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।