मां मनसा देवी: हरिद्वार में शिव की मानस पुत्री की अद्भुत कथा
सारांश
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हरिद्वार, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देवभूमि उत्तराखंड, जो सदियों से ऋषि-मुनियों और देवी-देवताओं का आश्रय स्थल रहा है, के हरिद्वार में शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित मां मनसा देवी का मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसकी खूबसूरत वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता भी इसे विशेष बनाती है।
माता मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री और वासुकी नागराज की बहन माना जाता है। हरिद्वार के बिलवा पर्वत पर स्थित उनका प्रमुख मंदिर (सिद्धपीठ) सबसे प्रसिद्ध है। इन्हें मुख्य रूप से सर्प दंश (सांप के काटने) से सुरक्षा प्रदान करने और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
इस मंदिर की मान्यता और भव्यता इतनी अद्भुत है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने आते हैं। बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंदिर का विशेष वीडियो साझा किया, जिसमें लिखा, "मनसा देवी का पावन मंदिर जनपद हरिद्वार में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के शिखर पर स्थित है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। अपने हरिद्वार आगमन के दौरान माँ मनसा देवी के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव अवश्य करें।"
बिल्वा पर्वत पर स्थापित माता की मूर्ति कमल या सर्प पर विराजमान होती है। मान्यता है कि माता मनसा देवी हर किसी की मनोकामना पूरी करती हैं। कहा जाता है कि यदि कोई अपनी इच्छा पूरी कराना चाहता है, तो मंदिर के प्रांगण में स्थित पेड़ पर धागा बांधने से माता रानी उसकी मन्नत पूरी करती हैं।
कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर पेड़ पर बांधे धागे को खोलने जरूर आते हैं।
माता मनसा की पूजा विशेष रूप से नाग पंचमी के अवसर पर की जाती है। इन्हें 'विषहरी' (विष को हरने वाली) भी कहा जाता है, क्योंकि वे सांप के जहर से लोगों की रक्षा करती हैं।