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कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर: जहाँ कैलाश से उतरकर रुकी थी भगवान शंकर की बारात

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कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर: जहाँ कैलाश से उतरकर रुकी थी भगवान शंकर की बारात

सारांश

हरिद्वार के घने जंगलों में बसा श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं — यह उस पौराणिक क्षण का जीवंत प्रमाण माना जाता है जब भगवान शंकर की बारात कैलाश से उतरकर यहाँ रुकी थी। मुख्यमंत्री धामी के पोस्ट के बाद यह रहस्यमय स्थल अब चर्चा के केंद्र में है।

मुख्य बातें

श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व के पास श्यामपुर क्षेत्र में स्थित है।
पौराणिक मान्यता है कि इसी स्थल पर भगवान शंकर की बारात कैलाश से उतरकर विश्राम के लिए रुकी थी।
मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है — खुदाई के दौरान स्वयं प्रकट हुआ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 27 जुलाई को सोशल मीडिया पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसे श्रद्धालुओं के लिए अनुशंसित किया।
स्थानीय परंपरा में एक विशेष वृक्ष के निकट जाने की मनाही है और वहाँ प्रतिदिन भोजन अर्पित किया जाता है।

हरिद्वार के राजाजी टाइगर रिजर्व के घने वनों के मध्य, श्यामपुर क्षेत्र और सज्जनपुर पीली (नजीबाबाद रोड) के निकट स्थित श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के सर्वाधिक रहस्यमय और आस्थापूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही पावन स्थल है जहाँ भगवान शंकर की बारात कैलाश से उतरकर विश्राम के लिए रुकी थी। 27 जुलाई को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर मंदिर का वीडियो साझा कर इसके धार्मिक महत्व को रेखांकित किया।

स्वयंभू शिवलिंग और पौराणिक महत्व

इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है — अर्थात यह किसी मानव द्वारा स्थापित नहीं, बल्कि खुदाई के दौरान स्वयं प्रकट हुआ था। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान शंकर के गणों ने कुंडी सोटा में भांग घोटी थी, और उस काल के प्रमाण समय-समय पर इस क्षेत्र की खुदाई में मिलते रहे हैं। मंदिर का नाम भी इसी ऐतिहासिक-पौराणिक घटना से जुड़ा बताया जाता है।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की वीडियो जारी करते हुए लिखा, 'श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर, हरिद्वार में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर राजाजी टाइगर रिजर्व के पास शांत और प्राकृतिक वातावरण में स्थित है, जहाँ हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।' उन्होंने यह भी लिखा कि 'सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं' और हरिद्वार यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से इस मंदिर के दर्शन का आग्रह किया।

रहस्यमय परंपरा — बारात से बिछड़े गण

स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, इस क्षेत्र में एक विशेष वृक्ष है जिसके संबंध में मान्यता है कि भगवान शंकर की बारात में आए कुछ गण, भांग के अत्यधिक नशे के कारण बारात से बिछड़ गए और इसी वृक्ष पर रुक गए। इस कारण आज भी स्थानीय परंपरा में उस वृक्ष के आसपास जाने की मनाही बताई जाती है। इस मान्यता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा गया है।

आम जनता पर असर और स्थानीय परंपराएँ

स्थानीय परंपरा के अनुसार, उस वृक्ष पर निवास करने वाली आत्माओं के लिए प्रतिदिन भोजन पहुँचाया जाता है और क्षेत्र के लोगों का विश्वास है कि वह भोजन ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा मंदिर की आस्था और रहस्य को और गहरा बनाती है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से यह मंदिर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनता जा रहा है।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री धामी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद इस मंदिर की चर्चा व्यापक रूप से होने लगी है। उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार के ध्यान आकर्षित होने से इस स्थल के धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ ऐसे वन-क्षेत्रीय मंदिरों को उभारना पर्यटन विकेंद्रीकरण की दिशा में सकारात्मक कदम हो सकता है। हालाँकि, राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित वन क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से एक संतुलन की माँग करती है जिस पर अभी तक कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर हरिद्वार में राजाजी टाइगर रिजर्व के पास श्यामपुर क्षेत्र और सज्जनपुर पीली (नजीबाबाद रोड) के निकट स्थित है। यह घने जंगलों के बीच शांत और प्राकृतिक वातावरण में है।
कुंडी सोटेश्वर महादेव मंदिर का पौराणिक महत्व क्या है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शंकर की बारात कैलाश से उतरकर इसी स्थल पर रुकी थी और यहीं उनके गणों ने कुंडी सोटा में भांग घोटी थी। यह स्थान उस घटना का जीवंत प्रमाण माना जाता है।
इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग क्या विशेष है?
मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, अर्थात यह खुदाई के दौरान स्वयं प्रकट हुआ था, किसी मनुष्य द्वारा स्थापित नहीं किया गया। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 27 जुलाई को सोशल मीडिया पर मंदिर का वीडियो साझा किया और इसे अत्यंत प्राचीन व पवित्र स्थल बताया। उन्होंने हरिद्वार यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से इस मंदिर के दर्शन करने का आग्रह किया।
मंदिर के पास उस रहस्यमय वृक्ष की क्या मान्यता है?
स्थानीय किंवदंती के अनुसार, भगवान शंकर की बारात से बिछड़े कुछ गण भांग के नशे में इसी वृक्ष पर रुक गए थे। इसीलिए आज भी उस वृक्ष के आसपास जाने की मनाही है और वहाँ प्रतिदिन भोजन अर्पित किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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