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मद्रास हाईकोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति घोषणाओं की जांच का दिया आदेश

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मद्रास हाईकोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति घोषणाओं की जांच का दिया आदेश

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले, मद्रास उच्च न्यायालय ने उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति घोषणाओं की विसंगतियों की जांच के लिए आयकर विभाग को आदेश दिया है। यह निर्णय महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ में आया है।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय ने आयकर विभाग को जांच के आदेश दिए।
उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति घोषणाओं में विसंगतियाँ पाई गईं।
रिपोर्ट 20 अप्रैल को पेश की जाएगी।
याचिका का उद्देश्य चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
झूठी घोषणाओं के लिए दंड का प्रावधान है।

चेन्नई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को आयकर विभाग को उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति घोषणाओं में संभावित विसंगतियों की प्रारंभिक जांच करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने आयकर महानिदेशक (जांच) को 20 अप्रैल तक अदालत में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। यह याचिका चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी निर्वाचन क्षेत्र के निवासी आर कुमारवेल द्वारा दायर की गई थी, जहां से उदयनिधि स्टालिन पुनः चुनाव लड़ रहे हैं।

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ वकील वी. राघवाचारी ने प्रस्तुत किया कि 2021 के विधानसभा चुनावों और वर्तमान चुनाव के दौरान स्टालिन द्वारा दिए गए हलफनामों की तुलना से कई विसंगतियाँ उजागर हुईं।

याचिकाकर्ता ने बताया कि इन विसंगतियों में पहले घोषित संपत्तियों का गायब होना, वित्तीय लेनदेन का गलत विवरण और चुनावी हलफनामों तथा कॉर्पोरेट दस्तावेजों के बीच अंतर्विरोध शामिल हैं।

भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता निरंजन राजगोपालन ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवारों को पूर्ण और सत्य जानकारी प्रदान करना अनिवार्य है, लेकिन नामांकन प्रक्रिया के दौरान हर घोषणा की सटीकता को स्वतंत्र रूप से जांचने का अधिकार रिटर्निंग अधिकारियों के पास नहीं है।

उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125ए में झूठी घोषणाओं के मामलों में दंड का प्रावधान है, जिसमें छह महीने तक की कैद, जुर्माना या दोनों शामिल हैं।

हालांकि, ऐसी कार्रवाई आमतौर पर चुनाव के बाद उचित कानूनी प्रक्रिया का अनुसरण करती है।

याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया कि उद्देश्य आपराधिक कार्यवाही शुरू करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि मतदान से पहले मतदाताओं को उम्मीदवारों के सही वित्तीय विवरणों की जानकारी प्राप्त हो जाए। आयकर विभाग की रिपोर्ट पेश होने तक अदालत ने मामले को 20 अप्रैल तक स्थगित कर दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मतदाता सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें। यह कदम लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाईकोर्ट ने उदयनिधि स्टालिन की संपत्ति संबंधी जांच का आदेश क्यों दिया?
आयकर विभाग को उनकी संपत्ति घोषणाओं में विसंगतियों की प्रारंभिक जांच करने का आदेश दिया गया है।
इस मामले में अंतिम रिपोर्ट कब पेश की जाएगी?
अदालत ने आयकर महानिदेशक को 20 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
क्या चुनावी हलफनामों में विसंगतियाँ सामान्य हैं?
हां, चुनावी हलफनामों में विसंगतियाँ अक्सर देखी जाती हैं, लेकिन इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
क्या नियमों का उल्लंघन होने पर दंड का प्रावधान है?
जी हां, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125ए में झूठी घोषणाओं के लिए दंड का प्रावधान है।
यह मामला समाज पर किस प्रकार का प्रभाव डालेगा?
यह मामला चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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