6 अक्टूबर 2026
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मद्रास हाई कोर्ट ने बिना सैंपल लिए शव जलाने पर पुलिस को लताड़ा, 10 दिन में रिपोर्ट का आदेश

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मद्रास हाई कोर्ट ने बिना सैंपल लिए शव जलाने पर पुलिस को लताड़ा, 10 दिन में रिपोर्ट का आदेश

सारांश

चेन्नई में एक लापता ट्रांसपोर्ट कर्मचारी के शव को बिना किसी फिंगरप्रिंट या जेनेटिक सैंपल के जला देने पर मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। पुत्री श्रीदेवी ने अंग तस्करी में पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाया है। अदालत ने 10 दिनों में रिपोर्ट माँगी है।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट ने कोयम्बेडु पुलिस की आलोचना की — टी.
बालाजी का शव बिना फिंगरप्रिंट, जेनेटिक सैंपल या किसी साक्ष्य के जला दिया गया।
कुड्डालोर निवासी बालाजी 2024 में लापता हुए थे; नेल्लिकुप्पम पुलिस ने एक वर्ष बाद 2025 में मामला दर्ज किया।
हैदराबाद की महिला उमा ने शव का दावा किया और मृत्यु प्रमाण पत्र भी हासिल कर लिया।
याचिकाकर्ता श्रीदेवी ने अंग तस्करी में पुलिस की मिलीभगत का कथित आरोप लगाया है — जो अभी सत्यापित नहीं।
लक्ष्मीनारायणन ने 10 दिनों में जाँच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मद्रास हाई कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 को कोयम्बेडु पुलिस की कड़ी आलोचना की, जिसने स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के एक लापता कर्मचारी का शव बिना कोई फिंगरप्रिंट, जेनेटिक सैंपल या अन्य साक्ष्य संरक्षित किए जला दिया। न्यायालय ने नेल्लिकुप्पम पुलिस को 10 दिनों के भीतर जाँच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

कुड्डालोर जिले के नेल्लिकुप्पम निवासी टी. बालाजी पनरुति डिपो में स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के कर्मचारी थे। वे 2024 में अचानक लापता हो गए। उनकी पुत्री श्रीदेवी की शिकायत पर नेल्लिकुप्पम पुलिस ने करीब एक वर्ष बाद 2025 में मामला दर्ज किया।

इस बीच श्रीदेवी को सूचना मिली कि उनके पिता कोयम्बेडु बस टर्मिनस पर मृत अवस्था में पाए गए थे। जब वह संबंधित पुलिस थाने गईं, तो कथित तौर पर उन्हें स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। बाद में उन्हें ज्ञात हुआ कि 'उदवुम करंगल' नामक संस्था के माध्यम से उनका अंतिम संस्कार किया जा चुका है।

मृत्यु प्रमाण पत्र का विवाद

श्रीदेवी को यह जानकर और आघात पहुँचा कि हैदराबाद की एक महिला उमा ने उनके पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल कर लिया था। पुलिस के अनुसार बालाजी की जेब में मिले फोन नंबर से संपर्क करने पर उमा ने दावा किया कि मृतक उसका भाई है, जिस आधार पर शव उसे सौंप दिया गया।

पुलिस ने न्यायालय को बताया कि शव के अंतिम संस्कार से पूर्व न कोई फिंगरप्रिंट, न जेनेटिक सैंपल, न कोई अन्य सामग्री एकत्र की गई। वर्तमान में केवल एक फोटो उपलब्ध है।

अदालत की तीखी प्रतिक्रिया

न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने पुलिस से सीधे पूछा, 'आप बिना एक भी सैंपल लिए शव का अंतिम संस्कार कैसे कर सकते थे?' यह टिप्पणी अदालत की उस गहरी चिंता को दर्शाती है जो पुलिस की प्रक्रियागत चूकों को लेकर है।

याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि शव को इस प्रकार जलाया गया जिससे पहचान नामुमकिन हो गई, जिससे यह संदेह उत्पन्न हुआ कि पुलिस का अंग तस्करी में संलिप्त किसी गिरोह से संबंध हो सकता है। यह आरोप अभी तक सत्यापित नहीं है।

अदालत का निर्देश और आगामी कार्रवाई

न्यायालय ने नेल्लिकुप्पम पुलिस को निर्देश दिया कि वह श्रीदेवी की शिकायत के आधार पर उनके पिता के लापता होने की जाँच करे और 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इसके अतिरिक्त श्रीदेवी ने याचिका में कोयम्बेडु पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, अंतिम संस्कार से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।

इस मामले ने पुलिस प्रक्रिया में लापरवाही और असत्यापित दावेदारों को शव सौंपने जैसी गंभीर प्रणालीगत खामियों को उजागर किया है। अगली सुनवाई में पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अज्ञात शवों के मामले में मानक पहचान प्रक्रियाओं की अनदेखी की जाती है। एक असत्यापित दावेदार के आधार पर शव सौंपना और बिना किसी फोरेंसिक साक्ष्य के अंतिम संस्कार करना न केवल प्रक्रियागत चूक है, बल्कि संभावित न्याय को स्थायी रूप से नष्ट कर देना है। अंग तस्करी के आरोप अभी सिद्ध नहीं हैं, लेकिन पुलिस की यह कार्यप्रणाली ऐसे संदेहों को पनपने का अवसर देती है। हाई कोर्ट की 10-दिन की समयसीमा एक शुरुआत है, लेकिन असली जवाबदेही के लिए राज्य सरकार को अज्ञात शवों के प्रबंधन पर स्पष्ट और बाध्यकारी मानक प्रक्रियाएँ लागू करनी होंगी।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाई कोर्ट ने कोयम्बेडु पुलिस को क्यों लताड़ा?
अदालत ने इसलिए आलोचना की क्योंकि पुलिस ने लापता व्यक्ति टी. बालाजी के शव को बिना कोई फिंगरप्रिंट, जेनेटिक सैंपल या अन्य फोरेंसिक साक्ष्य संरक्षित किए जला दिया। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने पुलिस से सीधे पूछा कि बिना एक भी सैंपल के अंतिम संस्कार कैसे किया जा सकता है।
टी. बालाजी कौन थे और वे कैसे लापता हुए?
टी. बालाजी कुड्डालोर जिले के नेल्लिकुप्पम के निवासी और स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के पनरुति डिपो में कर्मचारी थे। वे 2024 में अचानक लापता हो गए थे; उनकी पुत्री श्रीदेवी की शिकायत पर पुलिस ने करीब एक साल बाद 2025 में मामला दर्ज किया।
शव हैदराबाद की महिला को क्यों सौंपा गया?
पुलिस के अनुसार बालाजी की जेब में मिले फोन नंबर पर संपर्क करने पर हैदराबाद की उमा नामक महिला ने दावा किया कि मृतक उसका भाई है। इस अकेले दावे के आधार पर पुलिस ने बिना किसी अन्य पहचान सत्यापन के शव उसे सौंप दिया और अंतिम संस्कार करा दिया।
याचिकाकर्ता श्रीदेवी ने अदालत में क्या माँग की है?
श्रीदेवी ने मद्रास हाई कोर्ट से अपने पिता की मौत की परिस्थितियों की सीबी-सीआईडी जाँच का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी माँग की है कि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड और अंतिम संस्कार से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए।
अब आगे इस मामले में क्या होगा?
न्यायालय ने नेल्लिकुप्पम पुलिस को 10 दिनों के भीतर जाँच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी; सीबी-सीआईडी जाँच की माँग पर भी अगली सुनवाई में विचार किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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