मद्रास हाईकोर्ट का निर्देश: एमके अलागिरी की बेटी कायलविझी के मामले में 4 हफ्तों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करे पुलिस
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय ने 31 अक्टूबर 2026 को शास्त्रीनगर पुलिस को निर्देश दिया कि वह पूर्व केंद्रीय मंत्री एमके अलागिरी की बेटी कायलविझी के खिलाफ दर्ज एसबीआई बैंक मैनेजर को कथित तौर पर थप्पड़ मारने के मामले में चार सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह निर्देश तब आया जब कायलविझी के वकील ने न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयन की पीठ के समक्ष अपनी एफआईआर रद्द करने की याचिका वापस लेने की इच्छा जताई।
मुख्य घटनाक्रम
कायलविझी के खिलाफ यह मामला चेन्नई के अड्यार स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक शाखा में हुई कथित घटना से जुड़ा है। पुलिस ने उनके विरुद्ध आपराधिक धमकी समेत चार धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि कायलविझी ने उक्त शाखा के बैंक मैनेजर को कथित तौर पर थप्पड़ मारा।
इस मामले में कायलविझी ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की माँग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि बैंक मैनेजर ने उनके साथ अश्लील भाषा में दुर्व्यवहार किया था और शिकायत दर्ज कराते समय इस तथ्य को कथित तौर पर छिपाया गया।
अदालत की कार्यवाही
न्यायमूर्ति जी.के. इलंथिरैयन की पीठ के समक्ष जब यह याचिका सुनवाई के लिए आई, तब कायलविझी के अधिवक्ता ने स्वयं याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी। न्यायालय ने इसे स्वीकार करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।
साथ ही, अदालत ने शास्त्रीनगर पुलिस को स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस आपराधिक प्रकरण में चार सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल करे। गौरतलब है कि याचिका वापस लेने के बावजूद अदालत ने जाँच प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूरा करने का निर्देश देना ज़रूरी समझा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
एमके अलागिरी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। वे तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। उनकी बेटी कायलविझी से जुड़े इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों क्षेत्रों में ध्यान आकर्षित किया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में राजनीतिक परिवारों से जुड़े आपराधिक प्रकरणों पर जनता और न्यायपालिका दोनों की नज़रें टिकी हैं।
आगे क्या
अदालत के निर्देशानुसार, शास्त्रीनगर पुलिस को अब निर्धारित समयसीमा के भीतर ट्रायल कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अंतिम रिपोर्ट के आधार पर ट्रायल कोर्ट यह तय करेगा कि कायलविझी के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ेगा या नहीं। इस प्रकरण की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें होंगी।