महाराष्ट्र सूखा सूची विवाद: महायुति में दरार, 265 तालुकों के चयन पर विपक्ष का पक्षपात का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में महायुति सरकार द्वारा राज्य के 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने के निर्णय ने एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। 1 अक्टूबर 2026 को यह विवाद उस समय और गहरा गया जब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही असंतोष की आवाज़ें उठने लगीं और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) ने राज्य सरकार पर खुलकर 'राजनीतिक पक्षपात' का आरोप मढ़ दिया। 36 जिलों के 358 तालुकों में से केवल 265 को ही सूची में स्थान दिया गया है, जिससे चयन की वस्तुनिष्ठता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
विवाद की जड़: क्या है सूखा सूची का मामला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले सप्ताह 265 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया था। यह अधिसूचना जारी होते ही दो तरफा विरोध शुरू हो गया — एक ओर विपक्ष और दूसरी ओर गठबंधन के भीतर के असंतुष्ट नेता।
सूची की पारदर्शिता पर सवाल इसलिए भी गहरे हैं क्योंकि इसमें महाबलेश्वर, राधानगरी और श्रीवर्धन जैसे अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाले क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब फडणवीस सरकार ने महज चार माह पहले पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान ऋण माफी की घोषणा की थी।
मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्रों को प्राथमिकता का आरोप
सूची में महायुति सरकार के 28 मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े तालुकों को स्थान दिया गया है। इनमें उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (बारामती), राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (कामठी), छगन भुजबल (येओला), गिरीश महाजन (जामनेर), गुलाबराव पाटिल (जलगांव ग्रामीण), दादाजी भुसे (मालेगांव आउटर), संजय राठौड़ (दिग्रस), उदय सामंत (रत्नागिरी), पंकजा मुंडे (परली), दत्तात्रय भरणे (इंदापुर), अदिति तटकरे (श्रीवर्धन) और मकरंद जाधव-पाटिल (वाई-महाबलेश्वर) के क्षेत्र शामिल हैं।
इसके अलावा संजय शिरसात (छत्रपति संभाजीनगर), नितेश राणे (कंकावली), आकाश फंडकर (खामगांव), बाबासाहेब पाटिल (अहमदपुर), इंद्रनील नाइक (पुसाद), मेघना सकोरे-बोर्दिकर (जिंतूर) और स्वयं मुख्यमंत्री फडणवीस का निर्वाचन क्षेत्र नागपुर दक्षिण-पश्चिम भी अधिसूचना में शामिल है।
गठबंधन के भीतर असंतोष और वायरल ऑडियो
दूसरी तरफ, सूची से बाहर रखे गए तालुकों के नेताओं में भी भारी रोष है। जिन प्रमुख मंत्रियों के क्षेत्रों को सूची से बाहर रखा गया है उनमें शंभूराज देसाई (पाटन), हसन मुश्रीफ (कगल), राधाकृष्ण विखे-पाटिल (शिरडी), नरहरि जीरवाल (दिंडोरी), योगेश कदम (दापोली) और भरत गोगावाले (महाड) शामिल हैं।
गठबंधन में दरार की बात तब और पुख्ता हुई जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद अशोक चव्हाण की एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें उन्हें कथित तौर पर असंतुष्ट पार्टी कार्यकर्ताओं को सलाह देते सुना जा सकता है कि वे अस्थायी रूप से सार्वजनिक आलोचना सहन करें। इसके अलावा, BJP विधायक सुमित वानखेड़े ने अपने अरवी निर्वाचन क्षेत्र को सूची में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। फडणवीस द्वारा अनुरोध मानने के बाद वानखेड़े ने अपनी पोस्ट और पत्र सोशल मीडिया से हटा लिया।
विपक्ष का तीखा हमला
वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सूखे जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका अपना निर्वाचन क्षेत्र ब्रह्मपुरी बुरी तरह प्रभावित होने के बावजूद सूची से जानबूझकर बाहर रखा गया। उन्होंने पूछा कि कोई भी मंत्री विपक्ष के कब्ज़े वाले क्षेत्रों का दौरा क्यों नहीं कर रहा और क्या ये इलाके महाराष्ट्र का हिस्सा नहीं हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखकर प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख की वित्तीय सहायता की माँग की। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक आदित्य ठाकरे ने पेयजल संकट और किसान आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या की ओर ध्यान दिलाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 2026 की खरीफ फसल में भारी नुकसान से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। गंभीर सूखे की स्थिति के चलते कृषि क्षेत्र के साथ-साथ राज्य की व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस दोहरे दबाव — गठबंधन की आंतरिक दरार और विपक्ष के हमले — के बीच राहत वितरण को किस तरह पारदर्शी बना पाती है।