22 सितंबर 2026
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कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या 177 हुई, 53 नए तालुके जोड़े; गडग पर BJP ने कांग्रेस सरकार को घेरा

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कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या 177 हुई, 53 नए तालुके जोड़े; गडग पर BJP ने कांग्रेस सरकार को घेरा

सारांश

कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या 177 पहुँच गई, लेकिन असली विवाद गडग को लेकर है — जहाँ एक वरिष्ठ कांग्रेस विधायक की इस्तीफे की धमकी के बाद तालुके को सूची में जोड़ा गया। BJP का कहना है कि यह सूखे का नहीं, दबाव की राजनीति का नतीजा है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 53 नए तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया, कुल संख्या अब 177 ।
परमेश्वर ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में यह संख्या 200 तक पहुँच सकती है।
वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एच.के.
पाटिल की इस्तीफे की धमकी के बाद गडग तालुका सूची में जोड़ा गया।
रवि ने आरोप लगाया कि सरकार सूखे की घोषणा में राजनीति कर रही है।
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि सूखे की घोषणा इस्तीफे की धमकी के आधार पर नहीं होती।
सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर भी कई विधायक अपने क्षेत्रों को सूची से बाहर रखे जाने पर असंतोष में हैं।

कर्नाटक सरकार ने 22 सितंबर 2026 को 53 और तालुकों को सूखाग्रस्त क्षेत्रों की आधिकारिक सूची में शामिल किया, जिससे राज्य में सूखे से प्रभावित तालुकों की कुल संख्या 177 पर पहुँच गई। इस ताज़ा घोषणा में गडग तालुका को भी सूची में जोड़ा गया, जो कि वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल का निर्वाचन क्षेत्र है। विधान परिषद में हुए इस घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने विधायकों की इस्तीफे की धमकी के दबाव में आकर यह निर्णय लिया।

मुख्य घटनाक्रम

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने विधान परिषद को सूचित किया कि 53 नए तालुकों को सूखाग्रस्त सूची में जोड़ा गया है। इससे पहले पहले चरण में 101 तालुकों को और उसके बाद के चरणों में 23 अन्य तालुकों को सूची में शामिल किया गया था। 53 नए तालुकों के जुड़ने से यह कुल संख्या अब 177 हो गई है।

परमेश्वर ने संकेत दिया कि जो तालुके अभी भी सूची से बाहर हैं, उन्हें भी मौजूदा परिस्थितियों के आकलन के आधार पर शामिल करने पर विचार होगा। उन्होंने कहा, 'मेरी जानकारी के मुताबिक, आने वाले दिनों में लगभग 200 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा।'

गडग विवाद और इस्तीफे की धमकी

BJP एमएलसी सी.टी. रवि ने सदन में परमेश्वर से सीधे पूछा कि क्या एच.के. पाटिल के निर्वाचन क्षेत्र गडग को नई सूची में शामिल किया गया है। परमेश्वर ने पुष्टि की कि गडग को सूची में जोड़ दिया गया है। गौरतलब है कि पाटिल ने पहले सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि यदि उनके क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया तो वे अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे देंगे।

हालांकि परमेश्वर ने यह स्पष्ट किया कि सरकार किसी विधायक की इस्तीफे की धमकी के आधार पर सूखे की घोषणा नहीं करती। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर कई विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों को सूची में शामिल न किए जाने पर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।

BJP की आलोचना

रवि ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जिसमें विधायकों को अपने तालुकों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल करवाने के लिए इस्तीफे की धमकी देनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा को लेकर राजनीति कर रही है।

BJP के वरिष्ठ एमएलसी बसवराज होरट्टी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि परमेश्वर ने किसी तरह एच.के. पाटिल को इस्तीफा देने से रोक दिया। आलोचकों का कहना है कि यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा में तकनीकी आकलन के बजाय राजनीतिक दबाव हावी है।

विपक्ष की माँग

विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने कहा कि सरकार को सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जनता की कठिनाइयों के प्रति सही संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार पर जवाबदेही बनाए रखने की अपनी भूमिका का निर्वहन करता रहेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिलों में मानसून की अनिश्चितता के चलते किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और राहत राशि का इंतजार अनेक परिवारों के लिए अत्यंत अहम बन चुका है।

आगे क्या होगा

परमेश्वर के बयान के अनुसार, कुल 200 तालुकों तक सूची का विस्तार होने की संभावना है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि घोषणा के बाद राहत वितरण की प्रक्रिया कितनी तेज़ी से और पारदर्शिता के साथ लागू होगी। राज्य सरकार पर दबाव है कि वह सूखा राहत को राजनीतिक समीकरणों से अलग रखते हुए ज़रूरतमंद किसानों तक जल्द से जल्द पहुँचाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक वरिष्ठ विधायक की इस्तीफे की धमकी के बाद हुआ — यह कर्नाटक सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाता है। जब सूखा राहत की घोषणा राजनीतिक दबाव के अनुसार होती है, तो उन किसानों का क्या जिनके तालुके में कोई प्रभावशाली विधायक नहीं? परमेश्वर का यह कहना कि 'इस्तीफे की धमकी से फर्क नहीं पड़ता' और साथ ही गडग को उसी सत्र में सूची में जोड़ना — यह विरोधाभास बड़ी खबर है जिसे मुख्यधारा की रिपोर्टिंग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में अब कुल कितने तालुके सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं?
22 सितंबर 2026 तक कर्नाटक में कुल 177 तालुके आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं। पहले चरण में 101, फिर 23, और अब 53 नए तालुके जोड़े गए हैं। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार यह संख्या जल्द ही 200 तक पहुँच सकती है।
गडग को सूखाग्रस्त सूची में क्यों जोड़ा गया और इस पर विवाद क्यों है?
गडग को उस समय सूची में जोड़ा गया जब वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एच.के. पाटिल ने चेतावनी दी थी कि यदि उनके क्षेत्र को सूखाग्रस्त नहीं माना गया तो वे विधानसभा सीट से इस्तीफा दे देंगे। BJP ने इसे राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय बताया है।
BJP ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
BJP एमएलसी सी.टी. रवि ने आरोप लगाया कि सरकार सूखाग्रस्त घोषणा में राजनीति कर रही है और विधायकों को इस्तीफे की धमकी देकर अपने तालुके को सूची में शामिल करवाना पड़ रहा है। BJP के वरिष्ठ एमएलसी बसवराज होरट्टी ने भी व्यंग्य किया कि परमेश्वर ने पाटिल को इस्तीफे से रोक लिया।
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहा?
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी विधायक की इस्तीफे की धमकी के आधार पर सूखे की घोषणा नहीं करती। साथ ही उन्होंने कहा कि जो तालुके अभी सूची से बाहर हैं, उन्हें भी मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की सूची आगे कहाँ तक जाएगी?
परमेश्वर के अनुसार आने वाले दिनों में लगभग 200 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की संभावना है। हालांकि यह घोषणा मौजूदा परिस्थितियों के आकलन पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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