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कर्नाटक में 23 और तालुक सूखाग्रस्त घोषित, कुल संख्या 124 पहुँची; तीसरे चरण की जाँच शुरू

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कर्नाटक में 23 और तालुक सूखाग्रस्त घोषित, कुल संख्या 124 पहुँची; तीसरे चरण की जाँच शुरू

सारांश

कर्नाटक में सूखे की मार अब 124 तालुकों तक फैल गई है — दूसरे चरण में 23 नए तालुक जुड़े, जिनमें 21 गंभीर श्रेणी में हैं। 'क्रॉप लॉस जीटी' ऐप और जियो-टैगिंग के ज़रिये 19-20 सितंबर को तीसरे चरण की जाँच होगी। राज्य सरकार का कहना है — कोई किसान राहत से वंचित नहीं रहेगा।

मुख्य बातें

कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की कुल संख्या 124 हो गई है — दूसरे चरण में 23 नए तालुक जोड़े गए।
नए घोषित तालुकों में 21 गंभीर रूप से और 2 मध्यम रूप से सूखाग्रस्त हैं।
गंभीर श्रेणी में टिपटूर, कलबुर्गी, हुबली, सिंदहनूर समेत 21 तालुक; पोन्नामपेट और विराजपेट मध्यम श्रेणी में।
तीसरे चरण की जमीनी जाँच के लिए 17 जिलों के 53 तालुकों को चुना गया; 19-20 सितंबर को खेत दौरा।
अधिकारियों को 21 सितंबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश; 'क्रॉप लॉस जीटी' ऐप से पारदर्शी आकलन।
परमेश्वर ने कहा — वास्तविक फसल नुकसान के आधार पर नियमानुसार राहत सुनिश्चित की जाएगी।

कर्नाटक सरकार ने 17 सितंबर 2026 को सूखे के आकलन के दूसरे चरण में 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया, जिससे राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की कुल संख्या बढ़कर 124 हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने यह जानकारी देते हुए कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमज़ोर बारिश के कारण उपजे सूखे के हालात का वैज्ञानिक तरीकों से लगातार आकलन किया जा रहा है।

दो चरणों में कितने तालुक प्रभावित

सूखे के आकलन के पहले चरण में 102 तालुकों की जमीनी जाँच की गई थी, जिनमें से 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया — इनमें 89 गंभीर रूप से और 12 मध्यम रूप से प्रभावित तालुक शामिल हैं। अब दूसरे चरण में जोड़े गए 23 तालुकों में से 21 को गंभीर और 2 को मध्यम श्रेणी में रखा गया है।

गंभीर रूप से सूखाग्रस्त घोषित नए तालुकों में टिपटूर, करातगी, मानवी, सिंदहनूर, सिरवार, अफजलपुर, अलंद, चित्तापुर, कलबुर्गी, यादरामी, शाहबाद, भालकी, बसवनबागेवाड़ी, बबलेश्वर, टिकोटा, रट्टीहल्ली, हुबली, नवलगुंड, हुबली शहर, अन्नगिरी और कदुर शामिल हैं। पोन्नामपेट और विराजपेट को मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।

तीसरे चरण की ग्राउंड-ट्रूथिंग की तैयारी

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि 1 जून से 16 सितंबर के बीच हुई वर्षा, मिट्टी की नमी, फसल की स्थिति और अन्य वैज्ञानिक मानकों के आधार पर तीसरे चरण की जमीनी जाँच के लिए 17 जिलों के 53 तालुकों को चुना गया है। अधिकारियों की टीमें 19 और 20 सितंबर को चुने गए गाँवों के खेतों का सीधा दौरा करेंगी।

डिप्टी कमिश्नरों और संबंधित अधिकारियों को 21 सितंबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह आकलन पूरी तरह डेटा-आधारित है और मानसून सीज़न की समाप्ति तक जारी रहेगा।

तकनीक से पारदर्शी सर्वे

सरकार फसल नुकसान के आकलन को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए 'क्रॉप लॉस जीटी' मोबाइल ऐप का उपयोग कर रही है। इस ऐप के माध्यम से मौके पर ही जियो-टैग की गई तस्वीरें, GPS जानकारी, कृषि भूमि का विवरण और फसल के नुकसान का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा। गौरतलब है कि इस तरह की तकनीक-आधारित ग्राउंड-ट्रूथिंग राज्य में सूखा राहत वितरण की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अपेक्षाकृत नई पहल है।

सरकार की प्रतिबद्धता और किसानों को राहत

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा, 'किसानों की मुश्किलों की असल स्थिति सरकार के संज्ञान में आनी चाहिए। हमारा मकसद यह पक्का करना है कि फसल के वास्तविक नुकसान के दस्तावेजीकरण से कोई भी किसान न छूटे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सहायता का निर्धारण वैज्ञानिक आकलन और सटीक रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार किया जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई उत्तरी और मध्य जिले खरीफ सीज़न में फसल क्षति की मार झेल रहे हैं। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि यदि मानसून सीज़न समाप्त होने तक स्थिति और बिगड़ती है, तो जमीनी जाँच के अगले दौर में अतिरिक्त तालुकों को भी शामिल किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राहत राशि का वास्तविक वितरण कितनी तेज़ी से होगा — क्योंकि पिछले सूखा-राहत चक्रों में देरी और नौकरशाही अड़चनें किसानों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती रही हैं। उत्तरी कर्नाटक के ज़िले — कलबुर्गी, रायचूर, विजयपुरा — लगातार सूखे की चपेट में रहते हैं और वहाँ कर्ज़ और पलायन की समस्या पहले से गंभीर है। 21 सितंबर की रिपोर्ट की समयसीमा महत्त्वपूर्ण है — यदि केंद्र से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) की माँग में देरी हुई, तो खरीफ फसल का नुकसान किसानों पर सीधे टूटेगा।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में अब तक कितने तालुक सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं?
17 सितंबर 2026 तक कर्नाटक में कुल 124 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। पहले चरण में 101 और दूसरे चरण में 23 और तालुक जोड़े गए हैं।
दूसरे चरण में कौन-से तालुक गंभीर रूप से सूखाग्रस्त घोषित हुए?
दूसरे चरण में टिपटूर, करातगी, मानवी, सिंदहनूर, सिरवार, अफजलपुर, अलंद, चित्तापुर, कलबुर्गी, यादरामी, शाहबाद, भालकी, बसवनबागेवाड़ी, बबलेश्वर, टिकोटा, रट्टीहल्ली, हुबली, नवलगुंड, हुबली शहर, अन्नगिरी और कदुर को गंभीर रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। पोन्नामपेट और विराजपेट को मध्यम श्रेणी में रखा गया है।
कर्नाटक सरकार सूखे का आकलन कैसे कर रही है?
सरकार वर्षा डेटा, मिट्टी की नमी, फसल की स्थिति जैसे वैज्ञानिक मानकों के आधार पर जमीनी जाँच कर रही है। इसके लिए 'क्रॉप लॉस जीटी' मोबाइल ऐप का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जियो-टैग तस्वीरें, GPS डेटा और फसल नुकसान का ब्यौरा मौके पर दर्ज किया जाता है।
तीसरे चरण की जाँच कब और कहाँ होगी?
तीसरे चरण की जमीनी जाँच के लिए 17 जिलों के 53 तालुकों को चुना गया है। अधिकारियों की टीमें 19 और 20 सितंबर 2026 को चुने गए गाँवों के खेतों का दौरा करेंगी और 21 सितंबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपेंगी।
किसानों को राहत कब मिलेगी?
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के अनुसार, सहायता वैज्ञानिक आकलन और सटीक रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार दी जाएगी। तीसरे चरण की रिपोर्ट 21 सितंबर तक आने के बाद राहत की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है, हालाँकि राशि और समयसीमा की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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