कर्नाटक में 23 और तालुक सूखाग्रस्त घोषित, कुल संख्या 124 पहुँची; तीसरे चरण की जाँच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 17 सितंबर 2026 को सूखे के आकलन के दूसरे चरण में 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया, जिससे राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की कुल संख्या बढ़कर 124 हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने यह जानकारी देते हुए कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमज़ोर बारिश के कारण उपजे सूखे के हालात का वैज्ञानिक तरीकों से लगातार आकलन किया जा रहा है।
दो चरणों में कितने तालुक प्रभावित
सूखे के आकलन के पहले चरण में 102 तालुकों की जमीनी जाँच की गई थी, जिनमें से 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया — इनमें 89 गंभीर रूप से और 12 मध्यम रूप से प्रभावित तालुक शामिल हैं। अब दूसरे चरण में जोड़े गए 23 तालुकों में से 21 को गंभीर और 2 को मध्यम श्रेणी में रखा गया है।
गंभीर रूप से सूखाग्रस्त घोषित नए तालुकों में टिपटूर, करातगी, मानवी, सिंदहनूर, सिरवार, अफजलपुर, अलंद, चित्तापुर, कलबुर्गी, यादरामी, शाहबाद, भालकी, बसवनबागेवाड़ी, बबलेश्वर, टिकोटा, रट्टीहल्ली, हुबली, नवलगुंड, हुबली शहर, अन्नगिरी और कदुर शामिल हैं। पोन्नामपेट और विराजपेट को मध्यम सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
तीसरे चरण की ग्राउंड-ट्रूथिंग की तैयारी
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने बताया कि 1 जून से 16 सितंबर के बीच हुई वर्षा, मिट्टी की नमी, फसल की स्थिति और अन्य वैज्ञानिक मानकों के आधार पर तीसरे चरण की जमीनी जाँच के लिए 17 जिलों के 53 तालुकों को चुना गया है। अधिकारियों की टीमें 19 और 20 सितंबर को चुने गए गाँवों के खेतों का सीधा दौरा करेंगी।
डिप्टी कमिश्नरों और संबंधित अधिकारियों को 21 सितंबर तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह आकलन पूरी तरह डेटा-आधारित है और मानसून सीज़न की समाप्ति तक जारी रहेगा।
तकनीक से पारदर्शी सर्वे
सरकार फसल नुकसान के आकलन को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए 'क्रॉप लॉस जीटी' मोबाइल ऐप का उपयोग कर रही है। इस ऐप के माध्यम से मौके पर ही जियो-टैग की गई तस्वीरें, GPS जानकारी, कृषि भूमि का विवरण और फसल के नुकसान का ब्यौरा दर्ज किया जाएगा। गौरतलब है कि इस तरह की तकनीक-आधारित ग्राउंड-ट्रूथिंग राज्य में सूखा राहत वितरण की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अपेक्षाकृत नई पहल है।
सरकार की प्रतिबद्धता और किसानों को राहत
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा, 'किसानों की मुश्किलों की असल स्थिति सरकार के संज्ञान में आनी चाहिए। हमारा मकसद यह पक्का करना है कि फसल के वास्तविक नुकसान के दस्तावेजीकरण से कोई भी किसान न छूटे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सहायता का निर्धारण वैज्ञानिक आकलन और सटीक रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार किया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई उत्तरी और मध्य जिले खरीफ सीज़न में फसल क्षति की मार झेल रहे हैं। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि यदि मानसून सीज़न समाप्त होने तक स्थिति और बिगड़ती है, तो जमीनी जाँच के अगले दौर में अतिरिक्त तालुकों को भी शामिल किया जा सकता है।