1 सितंबर 2026
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मैसूर सूखा: राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 16,000 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र का किया निरीक्षण, दो सप्ताह में केंद्र को ज्ञापन

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मैसूर सूखा: राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 16,000 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र का किया निरीक्षण, दो सप्ताह में केंद्र को ज्ञापन

सारांश

कर्नाटक के राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर मंगलवार को मैसूर के सूखाग्रस्त खेतों में उतरे — जहाँ अकेले हुंसूर तालुक में 16,000 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। राज्य 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुका है और दो सप्ताह में केंद्र को ज्ञापन सौंपेगा, लेकिन राहत राशि केंद्रीय टीम के दौरे के बाद ही तय होगी।

मुख्य बातें

परमेश्वर ने मंगलवार को मैसूर जिले के केआर नगर, हुंसूर और वरुणा विधानसभा क्षेत्रों में सूखा प्रभावित किसानों से मुलाकात की।
हुंसूर तालुक में अकेले 16,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सूखे और फसल बीमारी से प्रभावित।
राज्य सरकार अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर चुकी है।
अगले दो सप्ताह में केंद्र सरकार को विस्तृत सूखा ज्ञापन सौंपा जाएगा; इसके बाद केंद्रीय दल दौरा करेगा।
मक्का (डाउनी मिल्ड्यू) और तंबाकू जैसी व्यावसायिक फसलें फिलहाल बीमा दायरे से बाहर; मंत्रिमंडल स्तर पर चर्चा होगी।
क्लाउड सीडिंग के आदेश जारी; सितंबर के पहले-दूसरे सप्ताह तक बारिश थमने का पूर्वानुमान।

कर्नाटक के राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को मैसूर जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का सीधे दौरा कर फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने केआर नगर, हुंसूर और वरुणा विधानसभा क्षेत्रों में किसानों से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि राज्य सरकार व्यापक आकलन पूरा होने के बाद राहत उपायों पर अंतिम निर्णय लेगी।

मुख्य घटनाक्रम

हुंसूर तालुक के कट्टेमालालावाडी गाँव में स्थिति का निरीक्षण करने के बाद परमेश्वर ने कहा कि अकेले इस तालुक में 16,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सूखे की चपेट में आई है और आसपास के अन्य तालुकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने मैसूर जिला पंचायत सभागार में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की, जिसमें पेयजल आपूर्ति, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता, रोजगार के अवसर और राहत प्रबंधन जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई।

सूखा घोषणा और केंद्र की शर्तें

परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर चुकी है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा सूखा घोषित करने मात्र से केंद्र सरकार की राहत स्वतः नहीं मिलती — इसके लिए केंद्र द्वारा निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। एक सप्ताह बाद स्थिति की पुनः समीक्षा होगी और जो क्षेत्र निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें भी आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया जाएगा।

राज्य सरकार अगले दो सप्ताह में केंद्र सरकार को विस्तृत सूखा ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद एक केंद्रीय दल राज्य का दौरा कर जमीनी हालात का स्वतंत्र आकलन करेगा, जिसके आधार पर राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

फसल बीमा और व्यावसायिक फसलों की समस्या

परमेश्वर ने बताया कि मक्के की फसल डाउनी मिल्ड्यू बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन फिलहाल यह फसल बीमा के दायरे में नहीं आती। सरकार इस मुद्दे पर बीमा कंपनियों के साथ अलग से बातचीत करेगी। इसी तरह हुंसूर तालुक में तंबाकू की फसल भी इस सीजन में 16,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नष्ट हुई है। चूँकि केंद्र सरकार के मानकों के तहत व्यावसायिक फसलों पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर मंत्रिमंडल स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

क्लाउड सीडिंग और मौसम पूर्वानुमान

क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं और तकनीकी तैयारियाँ जारी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन हल्की बारिश से भी फसलों को कुछ राहत मिल सकती है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक सितंबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक बारिश लगभग थम सकती है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार शीघ्र राहत कदम उठाने की तैयारी में है।

सरकार की समन्वित रणनीति

परमेश्वर ने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गदग जिले में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, जबकि अन्य मंत्रियों को भी विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी रिपोर्टें मिलने के बाद सरकार किसानों को सहायता और फसल बीमा से जुड़े निर्णय लेगी। बैठक में मैसूर जिला प्रभारी मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया, हुंसूर विधायक हरीश गौड़ा, केआर नगर विधायक रविशंकर, पूर्व विधायक एचपी मंजूनाथ और उपायुक्त लक्ष्मीकांत रेड्डी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले लगातार दूसरे वर्ष अनिश्चित मानसून की मार झेल रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 101 तालुकों की सूखा घोषणा और केंद्रीय राहत के बीच की लंबी प्रक्रिया में किसान कितने महीने और इंतजार करेंगे। मक्का और तंबाकू जैसी व्यावसायिक फसलों का बीमा दायरे से बाहर होना एक पुरानी नीतिगत खामी है जो हर सूखे में उजागर होती है, पर हल नहीं होती। क्लाउड सीडिंग के आदेश सकारात्मक हैं, लेकिन विशेषज्ञों की ही चेतावनी है कि इससे भारी राहत की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। जब तक केंद्र-राज्य समन्वय की यह धीमी प्रक्रिया नहीं बदलती, सूखा राहत हमेशा फसल के बाद आती रहेगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में कितने तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है?
राज्य सरकार के आकलन के आधार पर अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। एक सप्ताह बाद पुनः समीक्षा होगी और केंद्र के मानकों को पूरा करने वाले अतिरिक्त क्षेत्रों को भी इस सूची में शामिल किया जाएगा।
किसानों को केंद्र सरकार की राहत कब तक मिलेगी?
राज्य सरकार दो सप्ताह में केंद्र को विस्तृत सूखा ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद एक केंद्रीय दल राज्य का दौरा कर स्वतंत्र आकलन करेगा, जिसके बाद ही राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी। केवल राज्य द्वारा सूखा घोषित करने से केंद्रीय राहत स्वतः नहीं मिलती।
मैसूर के हुंसूर तालुक में सूखे से कितनी फसल प्रभावित हुई?
हुंसूर तालुक में इस सीजन 16,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर फसल को नुकसान दर्ज किया गया है। इसमें मक्का (डाउनी मिल्ड्यू बीमारी से) और तंबाकू दोनों प्रमुख प्रभावित फसलें हैं।
मक्का और तंबाकू किसानों को बीमा का लाभ क्यों नहीं मिलेगा?
मक्के की फसल फिलहाल फसल बीमा के दायरे में शामिल नहीं है, और केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार व्यावसायिक फसलों जैसे तंबाकू पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है। सरकार इन दोनों मुद्दों पर बीमा कंपनियों और मंत्रिमंडल स्तर पर अलग से चर्चा करेगी।
क्लाउड सीडिंग से कर्नाटक के किसानों को कितनी राहत मिलेगी?
क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) के लिए आदेश जारी हो चुके हैं और तकनीकी तैयारियाँ चल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन हल्की बारिश भी फसलों के लिए कुछ हद तक लाभकारी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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