मैसूर सूखा: राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 16,000 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र का किया निरीक्षण, दो सप्ताह में केंद्र को ज्ञापन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने मंगलवार को मैसूर जिले के सूखा प्रभावित इलाकों का सीधे दौरा कर फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने केआर नगर, हुंसूर और वरुणा विधानसभा क्षेत्रों में किसानों से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि राज्य सरकार व्यापक आकलन पूरा होने के बाद राहत उपायों पर अंतिम निर्णय लेगी।
मुख्य घटनाक्रम
हुंसूर तालुक के कट्टेमालालावाडी गाँव में स्थिति का निरीक्षण करने के बाद परमेश्वर ने कहा कि अकेले इस तालुक में 16,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सूखे की चपेट में आई है और आसपास के अन्य तालुकों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने मैसूर जिला पंचायत सभागार में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की, जिसमें पेयजल आपूर्ति, पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता, रोजगार के अवसर और राहत प्रबंधन जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई।
सूखा घोषणा और केंद्र की शर्तें
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार अब तक 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर चुकी है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा सूखा घोषित करने मात्र से केंद्र सरकार की राहत स्वतः नहीं मिलती — इसके लिए केंद्र द्वारा निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है। एक सप्ताह बाद स्थिति की पुनः समीक्षा होगी और जो क्षेत्र निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें भी आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया जाएगा।
राज्य सरकार अगले दो सप्ताह में केंद्र सरकार को विस्तृत सूखा ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद एक केंद्रीय दल राज्य का दौरा कर जमीनी हालात का स्वतंत्र आकलन करेगा, जिसके आधार पर राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फसल बीमा और व्यावसायिक फसलों की समस्या
परमेश्वर ने बताया कि मक्के की फसल डाउनी मिल्ड्यू बीमारी से बुरी तरह प्रभावित हुई है, लेकिन फिलहाल यह फसल बीमा के दायरे में नहीं आती। सरकार इस मुद्दे पर बीमा कंपनियों के साथ अलग से बातचीत करेगी। इसी तरह हुंसूर तालुक में तंबाकू की फसल भी इस सीजन में 16,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नष्ट हुई है। चूँकि केंद्र सरकार के मानकों के तहत व्यावसायिक फसलों पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर मंत्रिमंडल स्तर पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
क्लाउड सीडिंग और मौसम पूर्वानुमान
क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं और तकनीकी तैयारियाँ जारी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन हल्की बारिश से भी फसलों को कुछ राहत मिल सकती है। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक सितंबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक बारिश लगभग थम सकती है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार शीघ्र राहत कदम उठाने की तैयारी में है।
सरकार की समन्वित रणनीति
परमेश्वर ने बताया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गदग जिले में सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं, जबकि अन्य मंत्रियों को भी विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी रिपोर्टें मिलने के बाद सरकार किसानों को सहायता और फसल बीमा से जुड़े निर्णय लेगी। बैठक में मैसूर जिला प्रभारी मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया, हुंसूर विधायक हरीश गौड़ा, केआर नगर विधायक रविशंकर, पूर्व विधायक एचपी मंजूनाथ और उपायुक्त लक्ष्मीकांत रेड्डी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले लगातार दूसरे वर्ष अनिश्चित मानसून की मार झेल रहे हैं।