23 सितंबर 2026
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कर्नाटक: इंडी-चडचन को सूखा सूची से बाहर रखने पर कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल का इस्तीफा, अध्यक्ष ने नामंजूर किया

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कर्नाटक: इंडी-चडचन को सूखा सूची से बाहर रखने पर कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल का इस्तीफा, अध्यक्ष ने नामंजूर किया

सारांश

विजयपुरा के दो तालुक सूखा सूची से बाहर — और एक कांग्रेस विधायक का इस्तीफा भीतरी दरार को उजागर कर गया। यशवंतरायगौड़ा पाटिल का यह दूसरा इस्तीफा है महज कुछ महीनों में, और इस बार वजह किसानों की तकलीफ है। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे नामंजूर किया, लेकिन कांग्रेस का आंतरिक असंतोष दब नहीं रहा।

मुख्य बातें

इंडी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने 23 सितंबर 2026 को विजयपुरा के इंडी और चडचन तालुकों को सूखा प्रभावित सूची से बाहर रखने के विरोध में इस्तीफा दिया।
विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने इस्तीफा नामंजूर किया — कारण: निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं था।
कर्नाटक में अब तक चार चरणों में 188 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है; इंडी और चडचन इस सूची से बाहर हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार दिशा-निर्देशों के बाहर स्वेच्छा से सूखा घोषित नहीं कर सकती।
यह पाटिल का दूसरा इस्तीफा है — पहला मंत्री पद न मिलने पर आया था, जिसे बाद में वापस लिया गया था।
विपक्षी भाजपा ने विधानसभा में मुद्दा उठाया; विधायक अरागा ज्ञानेंद्र और विपक्ष के नेता आर.
अशोक ने सरकार को घेरा।

कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को उस समय राजनीतिक हलचल मच गई जब विजयपुरा जिले के इंडी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया। उनकी नाराज़गी की मूल वजह यह है कि इंडी और चडचन तालुकों को राज्य सरकार की सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल नहीं किया गया। हालांकि, बाद में विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने के कारण इसे स्वीकार नहीं किया गया है।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि

यशवंतरायगौड़ा पाटिल के अनुसार उन्होंने राज्य सरकार से कई बार अनुरोध किया था कि इंडी और चडचन को सूखा प्रभावित तालुकों की सूची में जगह दी जाए, लेकिन उनकी माँगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पाटिल ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, 'अब हमारी बातों और भावनाओं को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है।' यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब राज्य में सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा को लेकर कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग में असंतोष पहले से ही बना हुआ है।

गौरतलब है कि यह पाटिल का दूसरा इस्तीफा है। इससे पहले हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद न मिलने पर भी उन्होंने इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि ईमानदार और पार्टी के प्रति वफादार कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया जा रहा। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने वह इस्तीफा वापस लिया था।

सूखा घोषणा की स्थिति

केंद्र सरकार द्वारा 2020 में तैयार दिशा-निर्देशों के तहत कर्नाटक में अब तक चार चरणों में 188 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। पहले चरण में 101, दूसरे में 23, तीसरे में 53 और चौथे चरण में 11 तालुकों को यह दर्जा दिया गया। इंडी और चडचन इस सूची में अभी तक शामिल नहीं हो पाए हैं।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि किसी तालुक को सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए पूर्वनिर्धारित दिशा-निर्देश हैं और सरकार अपनी मर्जी से किसी क्षेत्र को यह दर्जा नहीं दे सकती। उन्होंने कहा, 'किसी क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए दिशा-निर्देश हैं। सरकार अचानक ऐसी घोषणा नहीं कर सकती।'

विधानसभा में राजनीतिक हंगामा

इस्तीफे की खबर फैलते ही विधानसभा में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मोर्चा खोल दिया। पूर्व गृह मंत्री और भाजपा विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने विधानसभा अध्यक्ष से इस्तीफे की स्थिति स्पष्ट करने की माँग की। ज्ञानेंद्र और स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि भाजपा के पास पाटिल के इस्तीफे की एक प्रति है। अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार के उस पुराने बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, 'क्या अब इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है? अगर ऐसा है तो क्या डीके शिवकुमार की बात की कोई अहमियत है? अगर हिम्मत है तो इस्तीफा स्वीकार कीजिए।'

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विपक्ष को शांत करते हुए कहा कि भाजपा को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने पाटिल के इस्तीफे को किसानों की तकलीफ से जोड़ते हुए कहा, 'यह लोगों की रोजी-रोटी के लिए दिया गया इस्तीफा है। प्रधानमंत्री ने भी हमें सूखे की स्थिति को लेकर चेतावनी दी है।' उन्होंने कहा कि पाटिल के निर्वाचन क्षेत्र के किसानों ने कर्ज लेकर खेती में पैसा लगाया है, इसलिए विधायक पर दबाव था।

शिवकुमार ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेता एचके पाटिल जैसे कई नेता भी सूखे की स्थिति को लेकर दबाव में हैं, इसलिए यशवंतरायगौड़ा पाटिल का दबाव असामान्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि उन्होंने पाटिल से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया।

आगे क्या

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा नामंजूर किए जाने के बाद फिलहाल यशवंतरायगौड़ा पाटिल विधायक पद पर बने हुए हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर सूखा प्रबंधन को लेकर उठ रहे असंतोष को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह देखना होगा कि सरकार इंडी और चडचन जैसे असंतुष्ट तालुकों की माँगों को आगामी दिनों में किस प्रकार संबोधित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब सूखा सूची — यह संकेत देता है कि कर्नाटक कांग्रेस में जमीनी स्तर के विधायकों और नेतृत्व के बीच की खाई सतह पर आ रही है। मुख्यमंत्री शिवकुमार का 'दिशा-निर्देशों की बाध्यता' वाला तर्क तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह उस राजनीतिक असंतोष का जवाब नहीं देता जो सूखाग्रस्त किसानों के बीच से उठ रहा है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा नामंजूर करना तात्कालिक संकट टाल सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार इंडी और चडचन जैसे छूटे हुए तालुकों के लिए वैकल्पिक राहत का रास्ता निकालेगी — वरना यह असंतोष अगले चुनावों तक सुलगता रहेगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने इस्तीफा क्यों दिया?
कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि उनके विजयपुरा जिले के इंडी और चडचन तालुकों को राज्य सरकार की सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल नहीं किया गया। उनका कहना था कि उन्होंने सरकार से कई बार यह माँग की थी लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।
क्या विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार किया?
नहीं, विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस्तीफा निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं था, इसलिए इसे नामंजूर किया गया और यशवंतरायगौड़ा पाटिल अभी भी विधायक पद पर बने हुए हैं।
कर्नाटक में अब तक कितने तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है?
केंद्र सरकार के 2020 के दिशा-निर्देशों के तहत कर्नाटक में चार चरणों में कुल 188 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है — पहले चरण में 101, दूसरे में 23, तीसरे में 53 और चौथे में 11 तालुक। इंडी और चडचन इस सूची में शामिल नहीं हैं।
मुख्यमंत्री शिवकुमार का इस मामले पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सूखा घोषित करने के लिए पूर्वनिर्धारित दिशा-निर्देश हैं और सरकार अपनी मर्जी से किसी क्षेत्र को यह दर्जा नहीं दे सकती। उन्होंने पाटिल के इस्तीफे को किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ी भावनात्मक प्रतिक्रिया बताया और कहा कि उन्होंने विधायक से बातचीत की है।
क्या यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने पहले भी इस्तीफा दिया था?
हाँ, पाटिल ने इससे पहले हाल के मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद न मिलने पर भी इस्तीफे की पेशकश की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि ईमानदार कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया जा रहा और मंत्री पद का वादा पूरा नहीं हुआ। वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने वह इस्तीफा वापस लिया था।
राष्ट्र प्रेस
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