कर्नाटक सूखा संकट: जेडीएस का हमला — 'सीएम शिवकुमार के निर्देश नहीं मान रहे अधिकारी'
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गडग से वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एच.के. पाटिल का हालिया पत्र राज्य में सूखे की स्थिति को लेकर सरकारी निष्क्रियता का प्रमाण है। पार्टी ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी करने वाले अधिकारियों के रहते प्रदेश में जवाबदेह प्रशासन कैसे संभव है।
मुख्य आरोप और पाटिल का पत्र
एच.के. पाटिल ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि सांख्यिकी विभाग के अधिकारी फसल बीमा से जुड़े मामलों में उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे। उन्होंने लिखा, 'सच का सम्मान नहीं किया जा रहा है। अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसलों के विपरीत निर्णय किए जा रहे हैं।'
पाटिल ने आगे चेतावनी दी कि यदि उनके निर्वाचन क्षेत्र गडग के तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि 'किसान-विरोधी यह रवैया सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।'
सूखे का आकलन और प्रभावित क्षेत्र
जेडीएस के अनुसार, कर्नाटक के कई तालुकों में 40 से 60 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई है, फिर भी उन्हें अभी तक आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। पाटिल ने भी अपने पत्र में बताया कि कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के 73 तालुकों में से 27 को सूखाग्रस्त घोषित करना अभी बाकी है।
जेडीएस ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा, 'पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और वर्षा की कमी 40 से 60 प्रतिशत के बीच है, फिर भी अधिकारी मानो यह सपना देख रहे हैं कि 27 तालुकों के किसान समृद्ध हैं।' पार्टी ने सरकार से इन तालुकों को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की माँग की है।
बेंगलुरु-केंद्रित प्रशासन पर सवाल
जेडीएस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार बेंगलुरु-केंद्रित प्रशासन चला रही है और उत्तर कर्नाटक के किसानों का भविष्य वातानुकूलित कमरों में बैठे नौकरशाह तय कर रहे हैं। पार्टी ने पूछा, 'क्या यह आईटी-बीटी राज्य है या फिर पाषाण युग का प्रशासन?' — यह इशारा इस तथ्य की ओर था कि सरकारी पत्राचार को अपने गंतव्य तक पहुँचने में कई दिन लग रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ और विपक्ष की रणनीति
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कांग्रेस के भीतर ही असंतोष के स्वर उठने लगे हैं। जेडीएस ने इसे भुनाते हुए कहा कि जब सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ विधायक स्वयं यह मानते हैं कि अधिकारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि कांग्रेस सरकार प्रशासन पर पकड़ खो चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में किसान संकट एक राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है और राज्य में विधानसभा की अगली परीक्षा से पहले विपक्षी दल ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पैठ मज़बूत करने की कोशिश में हैं।
आगे क्या होगा
पाटिल ने सरकार से सूखा घोषित करने के दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। जेडीएस ने माँग की है कि पाटिल द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। अब सबकी नज़रें मुख्यमंत्री शिवकुमार की प्रतिक्रिया और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।